यह प्रवचन मुनि श्री प्रमाण सागर जी द्वारा 'उत्तम आर्जव'धर्म के महत्व पर केंद्रित है, जिसमें वे जीवन में सरलता और निश्चलता अपनाने की प्रेरणा देते हैं।
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सुने प्रमाण सागर महाराज के प्रवचन
मनुष्य के भीतर कुटिलता मुख्य रूप से अहंकार और आसक्ति के कारण जन्म लेती है, जो उसे स्वयं की एक झूठी छवि बनाए रखने के लिए मजबूर करती है। वे चेतावनी देते हैं कि व्यक्ति को कम से कम स्वयं, परिजनों, संतों और समाज के साथ कभी छल नहीं करना चाहिए क्योंकि यह अंततः आत्म-वंचना ही है।
विभिन्न वास्तविक उदाहरणों के माध्यम से वे समझाते हैं कि कैसे बाहरी दिखावा और दोहरा आचरण व्यक्ति की विश्वसनीयता और मानसिक शांति को नष्ट कर देता है।
अंततः, यह स्रोत संदेश देता है कि सच्चा धर्म केवल बाहरी क्रियाओं में नहीं, बल्कि मन की निष्कपटता और ईमानदारी में निहित है।
हमारे चित्त में कुटिलता (छल-कपट और विकृति) आने के दो मुख्य कारण बताए गए हैं— अहंकार और आसक्ति।
1. अहंकार (Ego) से कुटिलता कैसे आती है?
काल्पनिक छवि को बनाए रखने की होड़:
हर व्यक्ति अपने मन में अपनी एक काल्पनिक छवि बना लेता है और समाज के सामने खुद को वैसा दिखाना चाहता है जैसा वह वास्तव में नहीं है।
झूठ और तिकड़म का सहारा:
अपनी इस काल्पनिक और झूठी प्रतिष्ठा को कायम (मेंटेन) रखने के लिए व्यक्ति झूठ, फरेब, दुराव-छुपाव और अनेक प्रकार के तिकड़म या हथकंडे अपनाता है ।
निश्छलता का अंत:जब तक मन में अहंकार पलता रहता है, तब तक हृदय में सरलता और निश्छलता प्रवेश नहीं कर सकती ।
2. आसक्ति (Attachment) से कुटिलता कैसे आती है?
पाने की तीव्र चाहत: जब किसी व्यक्ति या वस्तु के प्रति हमारा विशेष झुकाव, आकर्षण या लगाव बढ़ जाता है, तो उसे किसी भी तरह पाने की तीव्र इच्छा उत्पन्न होती है ।
साम, दाम, दंड, भेद का प्रयोग:
जब वह वस्तु या स्थिति सहज रूप से प्राप्त नहीं होती, तो व्यक्ति उसे हासिल करने के लिए साम, दाम, दंड और भेद की नीतियां अपनाने लगता है ।
इसी झुकाव और खिंचाव के कारण जीवन सहज रहने के बजाय कुटिल और जटिल बन जाता है ।
3. कुटिलता का परिणाम और जीवन की सीख
बच्चों का उदाहरण:छोटे बच्चों का ईगो (अहंकार) और आसक्ति ज्यादा मजबूत नहीं होती, इसीलिए उनका मन निश्छल और निष्पाप होता है । जैसे-जैसे व्यक्ति दुनियादारी से जुड़ता है, अहंकार और आसक्ति बढ़कर कुटिलताका रूप ले लेते हैं ।
खुद के साथ धोखा (आत्म-वंचना):
कुटिल व्यक्ति दूसरों को धोखा देने की कोशिश में सबसे पहले खुद को धोखा देता है । इससे उसकी विश्वसनीयता, नैतिकता और प्रामाणिकता नष्ट हो जाती है और वह अंदर से कमजोर व अशांत हो जाता है ।
चार क्षेत्रों में कुटिलता से बचें:
उत्तम आर्जव धर्म जीवन में सरलता लाने के लिए मुख्य रूप से चार स्थानों पर कुटिलता समाप्त करने का संदेश देता है— स्वयं से, अपने स्वजनों (परिवार) से, संतों से, और समाज या धर्म क्षेत्रसे।

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