Sunday, August 30, 2026

भारत की अभूतपूर्व निर्यात क्रांति:



भारत की अभूतपूर्व निर्यात क्रांति: 2015 से 2025 का सफर

पिछले एक दशक में भारत ने वैश्विक व्यापार के मंच पर एक ऐतिहासिक बदलाव देखा है। जो देश कभी भारी आयात पर निर्भर था, वह आज दुनिया का एक प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब बनकर उभरा है। 

आइए समझते हैं कि कैसे भारत का निर्यात 2015 से 2025 के बीच नाटकीय रूप से बदल गया।

------------------------------

1. निर्यात के आंकड़ों में अभूतपूर्व उछाल (2015 बनाम 2025)


कुल मर्चेंडाइज (वस्तु) निर्यात: साल 2015 में भारत का वस्तु निर्यात लगभग $310 बिलियन (अवरुद्ध वैश्विक कीमतों के कारण) था, जो साल 2025 तक बढ़कर $441.8 बिलियन के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया।


मोबाइल फोन निर्यात: साल 2015 में भारत मात्र ₹1,500 करोड़ का मोबाइल निर्यात करता था। 2025 तक यह 165 गुना से अधिक बढ़कर ₹2,59,000 करोड़ ($31+ बिलियन) पार कर गया। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता है।


रक्षा (डिफेंस) निर्यात: साल 2015 में भारत का रक्षा निर्यात केवल ₹1,941 करोड़ था। साल 2025 तक यह 19 गुना से अधिक की छलांग लगाकर ₹38,424 करोड़ ($4.6 बिलियन) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।


रिफाइंड पेट्रोलियम: भारत कच्चे तेल के आयात को रिफाइंड ईंधन (डीजल, जेट फ्यूल) में बदलकर वैश्विक बाजार में बड़ा खिलाड़ी बना, जिसका निर्यात मूल्य 2015 के ~$30.4 बिलियन से दोगुना होकर 2025 में ~$63 बिलियन हो गया।


------------------------------

 2. साल 2014 से पहले क्या कमियां थीं?

2014 से पहले भारत की व्यापार नीतियों में कई बुनियादी ढांचागत और रणनीतिक कमियां थीं, जिन्होंने निर्यात की क्षमता को दबाकर रखा था:


नीतिगत पंगुता (Policy Paralysis): विनिर्माण (Manufacturing) क्षेत्र के लिए कोई स्पष्ट और आक्रामक दीर्घकालिक नीति नहीं थी। नौकरशाही की जटिलताओं के कारण विदेशी कंपनियां भारत में निवेश करने से कतराती थीं।


खराब बुनियादी ढांचा (Weak Infrastructure): बंदरगाहों (Ports) पर माल चढ़ाने-उतारने में हफ्तों का समय लगता था। बिजली की कमी, खराब सड़कें और लॉजिस्टिक्स की भारी लागत (जीडीपी का 14-15%) के कारण भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में महंगे और प्रतिस्पर्धी नहीं रह जाते थे।


अत्यधिक आयात निर्भरता: इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उपकरण और यहां तक कि रोजमर्रा की जरूरी चीजों के लिए भारत पूरी तरह विदेशी ताकतों (जैसे चीन) पर निर्भर था। 'असेंबलिंग' और 'मैन्युफैक्चरिंग' के अंतर को नजरअंदाज किया गया था।


------------------------------

3. इस ऐतिहासिक विकास के पीछे मुख्य कारण और सरकारी पहल

साल 2014 के बाद सरकार ने "व्यापार करने में आसानी" (Ease of Doing Business) और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए क्रांतिकारी कदम उठाए:


प्रॉडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम: इस गेम-चेंजर नीति ने भारत में उत्पादन बढ़ाने वाली कंपनियों को नकद प्रोत्साहन (Incentives) दिया। इसी नीति के कारण Apple, Samsung और फॉक्सकॉन जैसी दिग्गज कंपनियों ने भारत को अपना मुख्य मैन्युफैक्चरिंग बेस बनाया।


मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया: इन अभियानों ने घरेलू उद्योगों को वैश्विक पहचान दिलाई। 'चरणबद्ध विनिर्माण कार्यक्रम' (PMP) के तहत आयातित कल-पुर्जों पर शुल्क लगाया गया, जिससे कंपनियों के लिए भारत के भीतर ही पार्ट्स बनाना जरूरी हो गया।


लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार: 'पीएम गतिशक्ति' और 'भारतमला/सागरमाला' परियोजनाओं के जरिए हाईवे, फ्रेट कॉरिडोर और अत्याधुनिक पोर्ट्स विकसित किए गए। इससे लॉजिस्टिक्स समय और लागत में भारी कमी आई।


रक्षा क्षेत्र का निजीकरण: रक्षा उत्पादन में निजी कंपनियों को शामिल होने की अनुमति दी गई और रक्षा निर्यात की प्रक्रियाओं को ऑनलाइन व सरल बनाया गया। ब्रह्मोस मिसाइल और एडवांस्ड रडार सिस्टम जैसे स्वदेशी उत्पादों को वैश्विक खरीदार मिले।


भू-राजनीतिक कूटनीति (Geopolitical Advantage): वैश्विक स्तर पर जब कंपनियों ने "चीन + 1" (China+1) की रणनीति अपनाई, तो भारत ने खुद को एक सुरक्षित और विश्वसनीय विकल्प के रूप में पेश किया। रूस-यूक्रेन संकट के दौरान भारत ने रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदकर उसे रिफाइंड ईंधन के रूप में यूरोप को निर्यात किया।


------------------------------

भारत की यह विकास यात्रा दर्शाती है कि सही नीति, मजबूत इच्छाशक्ति और आधुनिक बुनियादी ढांचे के दम पर कोई भी देश वैश्विक व्यापार की महाशक्ति बन सकता है।

------------------------------


कृषि निर्यात की छलांग और भारतीय उत्पादों के प्रमुख वैश्विक गंतव्य

भारतीय निर्यात क्रांति केवल मोबाइल फोन, रक्षा या पेट्रोलियम उत्पादों तक सीमित नहीं रही है; देश के कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य (Processed Food) क्षेत्र ने भी दुनिया भर में भारत का परचम लहराया है। साथ ही, भारतीय सामानों के वैश्विक खरीदार देशों का दायरा भी काफी विस्तृत हुआ है।

------------------------------

कृषि निर्यात में भारी उछाल (Agriculture & Foodgrain Growth)

भारत दुनिया की "फूड बास्केट" बनकर उभरा है और वैश्विक खाद्य सुरक्षा (Global Food Security) में एक केंद्रीय भूमिका निभा रहा है:


आंकड़ों में वृद्धि: साल 2014-15 में भारत का कुल कृषि और संबद्ध निर्यात लगभग $32.08 बिलियन था, जो बढ़कर $52 बिलियन से अधिक के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।


चावल का वैश्विक दबदबा: चावल भारत का सबसे बड़ा कृषि निर्यात उत्पाद है (सालाना $11 से $13 बिलियन)। भारत अकेले पूरी दुनिया के कुल चावल निर्यात का लगभग 40% हिस्सा संभालता है।

बासमती चावल: इसकी सबसे बड़ी मांग खाड़ी और पश्चिमी देशों में है।

गैर-बासमती चावल: यह अफ्रीका और एशियाई देशों में बड़े पैमाने पर खाद्य आपूर्ति सुनिश्चित करता है।


प्रोसेस्ड फूड (प्रसंस्कृत खाद्य) की हिस्सेदारी: 2014-15 में कृषि निर्यात में प्रोसेस्ड फूड की हिस्सेदारी सिर्फ 13.7% थी, जो मूल्य-संवर्धन (Value Addition) नीतियों के कारण बढ़कर 20.4% से अधिक हो गई है।


अन्य प्रमुख कृषि उत्पाद: भारत से समुद्री उत्पाद (Marine/Shrimp - $8+ बिलियन), मसाले (Spices - $4+ बिलियन), भैंस का मांस (Buffalo Meat), ताजे फल (आम, अंगूर, केला), चीनी और चाय-कॉफी का रिकॉर्ड निर्यात हो रहा है।


------------------------------

भारत का माल किन देशों में सबसे ज्यादा जाता है? (Top Export Destinations)

पहले भारत के निर्यात कुछ सीमित पारंपरिक बाजारों पर निर्भर थे, लेकिन अब भारतीय उत्पादों की पहुंच दुनिया के कोने-कोने में है। भारत के शीर्ष 10 निर्यातक साझीदार देश निम्नलिखित हैं:


World's Top Exports

📊 India's Top 10 Export Commodities

Rank Commodity Group Total Export Value (USD) Ratio of Total Merchandise Export (%) Core Items Included


Mineral Fuels & Oils $59.2 Billion 13.3% Refined petroleum, diesel, gasoline, jet fuel


Electrical Machinery & Equipment $53.7 Billion 12.0% Smartphones (e.g., Apple iPhone manufacturing), home electronics.


 Mechanical Machinery & Computers $36.2 Billion 8.1% Industrial reactors, boilers, pumps, and computer hardware.


Gems & Precious Metals $29.7 Billion 6.7% Cut & polished diamonds, gold jewelry, lab-grown gems.


Pharmaceutical Products $25.8 Billion 5.8% Generic drugs, active pharmaceutical ingredients (APIs), vaccines.


Vehicles & Auto Components $25.1 Billion 5.6% Passenger cars, two-wheelers, tractors, and auto spare parts.


Organic Chemicals $20.2 Billion 4.5% Industrial chemical building blocks, agrochemicals, and dyes.


Cereals $12.4 Billion 2.8% Basmati and non-basmati rice, wheat, and millets.


Articles of Iron or Steel $10.6 Billion 2.4% Finished steel pipes, tubes, structures, and hardware.


Raw Iron & Steel $9.9 Billion 2.2% Semi-finished iron, ferroalloys, and flat-rolled steel plates.


Key Structural Trends to Note


The Rise of Electronics: Electrical machinery and smartphone exports have seen a massive surge, firmly locking in the spot. This shift is primarily driven by India’s Production Linked Incentive (PLI) schemes drawing global tech manufacturers. 


भारत का माल किन देशों में सबसे ज्यादा जाता है? (Top Export Destinations)

पहले भारत के निर्यात कुछ सीमित पारंपरिक बाजारों पर निर्भर थे, लेकिन अब भारतीय उत्पादों की पहुंच दुनिया के कोने-कोने में है। भारत के शीर्ष 10 निर्यातक साझीदार देश निम्नलिखित हैं:


1. संयुक्त राज्य अमेरिका (USA): भारत का सबसे बड़ा एकल निर्यात गंतव्य (कुल निर्यात का लगभग 18-20%)। यहां स्मार्टफोन, दवाइयां (Pharma), इंजीनियरिंग सामान और रत्न-आभूषण भारी मात्रा में जाते हैं।

2. संयुक्त अरब अमीरात (UAE): खाड़ी और अफ्रीकी बाजारों का प्रमुख केंद्र, जहां रिफाइंड तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोना-गहने और खाद्यान्न निर्यात होते हैं।

3. नीदरलैंड्स (Netherlands): यूरोप का मुख्य प्रवेश द्वार, जहां भारत से सबसे ज्यादा रिफाइंड ईंधन (डीजल/जेट फ्यूल) और केमिकल्स भेजे जाते हैं।

4. चीन (China): कच्चा माल, जैविक रसायन (Organic Chemicals), कपास और खनिज उत्पाद।

5. यूनाइटेड किंगडम (UK): परिधान (Textiles), आईटी/सॉफ्टवेयर, मशीनरी और समुद्री खाद्य पदार्थ।

6. सिंगापुर (Singapore): इलेक्ट्रॉनिक्स, पेट्रोलियम उत्पाद और इंजीनियरिंग कंपोनेंट्स।

7. सऊदी अरब (Saudi Arabia): बासमती चावल, निर्माण सामग्री और रिफाइंड उत्पाद।

8. बांग्लादेश (Bangladesh): कपास, अनाज, बिजली के उपकरण और वाहन।

9. जर्मनी (Germany): ऑटो पार्ट्स, दवाइयां और विशेष औद्योगिक रसायन।

10. इटली एवं दक्षिण अफ्रीका (Italy & South Africa): धातु उत्पाद, चमड़ा, मशीनरी और दोपहिया/तिपहिया वाहन।


------------------------------


भारत के बदलते वैश्विक व्यापार समझौते (Free Trade Agreements - FTAs) और उनके लाभ

भारतीय निर्यात के इतिहास में पिछले कुछ साल नीतिगत रूप से सबसे क्रांतिकारी रहे हैं। 2014 से पहले जहां भारत एफटीए (मुक्त व्यापार समझौतों) को लेकर बहुत झिझकता था, वहीं आज भारत बेहद आक्रामक और रणनीतिक कूटनीति के साथ दुनिया के बड़े देशों के साथ नए जमाने के व्यापार समझौते कर रहा है।

------------------------------

 1. हाल ही में किए गए ऐतिहासिक व्यापार समझौते

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में कई देशों के साथ रिकॉर्ड समय में समझौते पूरे किए हैं, जो सीधे तौर पर हमारे निर्यात को बढ़ावा दे रहे हैं:


भारत-यूएई सेपा (India-UAE CEPA): 2022 में लागू हुआ यह समझौता भारत का पहला बड़ा आधुनिक व्यापार समझौता था। इसके तहत रत्न-आभूषण, कपड़ा (Textiles) और कृषि उत्पादों पर ड्यूटी बिल्कुल खत्म या बेहद कम कर दी गई है। इसके कारण यूएई को होने वाले निर्यात में रिकॉर्ड उछाल आया है।


भारत-ऑस्ट्रेलिया एक्टा (India-Australia ECTA): इस समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया ने भारत के 96% से अधिक उत्पादों के लिए अपने बाजार को बिना किसी कस्टम ड्यूटी (Zero Duty) के खोल दिया है। भारतीय इंजीनियरिंग सामान, परिधान और दवाओं को इससे भारी बढ़त मिली है।


भारत-ईएफटीए समझौता (India-EFTA Trade Agreement): यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (जिसमें स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं) के साथ ऐतिहासिक समझौता हुआ। इसके तहत अगले 15 वर्षों में भारत में $100 बिलियन के निवेश का वादा किया गया है, जिससे घरेलू विनिर्माण और निर्यात को नया आसमान मिलेगा।


------------------------------

2. जिन देशों के साथ बातचीत (Negotiations) अंतिम चरण में है

भारत अब उन बाजारों को लक्षित कर रहा है जो उच्च क्रय शक्ति (High Purchasing Power) वाले हैं:


यूनाइटेड किंगडम (India-UK FTA): भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत अंतिम चरणों में है। इससे भारत के कपड़ा, चमड़ा उद्योग और आईटी सर्विसेज को ब्रिटिश बाजार में बिना किसी बाधा के प्रवेश मिलेगा।


यूरोपीय संघ (India-EU FTA): 27 देशों के इस विशाल समूह के साथ भारत गहन चर्चा कर रहा है। यूरोपीय संघ के मानकों के अनुरूप खुद को ढालकर भारत वहां इंजीनियरिंग और फार्मास्यूटिकल्स का निर्यात कई गुना बढ़ाना चाहता है।


------------------------------

3. पहले की तुलना में नीति में क्या बड़ा बदलाव आया?

2014 से पहले और आज की व्यापार नीति में एक बुनियादी अंतर है:


संतुलित और सुरक्षात्मक दृष्टिकोण: पुराने समझौतों (जैसे आसियान देशों के साथ) में भारत का व्यापार घाटा (Trade Deficit) बहुत बढ़ गया था क्योंकि विदेशी सामान बिना शुल्क भारत आने लगा था, जबकि हमारे निर्यातकों को उतना लाभ नहीं मिला।


आज की नीति (Reciprocity): आज भारत केवल उन्हीं क्षेत्रों में रियायतें देता है जिससे हमारे घरेलू उद्योगों को नुकसान न हो, और बदले में भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स, डॉक्टरों, इंजीनियरों और लोकल विनिर्माताओं के लिए विदेशों में "आसान वीजा" और "जीरो ड्यूटी" का अधिकार सुरक्षित करता है।


------------------------------

इस व्यापक व्यापार क्रांति के दम पर भारत अब सालाना $1 ट्रिलियन (1 लाख करोड़ डॉलर) के कुल निर्यात लक्ष्य की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट में एक गंभीर आरोप

 


कुछ  दिन पहले, BJP MP डॉनिशिकांत दुबे ने सुप्रीम कोर्ट में एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा:

अगर इस देश में कोई धार्मिक हिंसा भड़काने के लिए ज़िम्मेदार हैतो वह सुप्रीम कोर्ट और उसके जज हैं!”


उनके इस बयान से बड़ा विवाद हुआ और विपक्षी पार्टियों ने उनकी कड़ी आलोचना की। हालांकिजाने-माने साइंटिस्टलेखक और स्पीकर आनंद रंगनाथन ने दुबे का पूरा सपोर्ट करते हुए एक वीडियो स्टेटमेंट जारी किया। 


रंगनाथन ने धाराप्रवाह इंग्लिश में सुप्रीम कोर्ट से 9 कड़े सवाल पूछे। ये सवाल बहुत ज़रूरी हैं। नीचे हिंदी में एकछोटी समरी दी गई है जिसे अब सभी को साफ-साफ समझने के लिए इंग्लिश में ट्रांसलेट किया गया है और सबसे नीचे प्रस्तुत किया गया है 


*आनंद रंगनाथन के सुप्रीम कोर्ट से 9 सवाल:


1. `कश्मीर के मुद्दों पर दोहरे मापदंड:` सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर को स्पेशल स्टेटस देने वाले आर्टिकल 370 को हटाने के खिलाफ विपक्षी पार्टियों की पिटीशन पर तुरंत सुनवाई की।  लेकिन जब 1990 के दशक में कश्मीरी हिंदुओं पर हुए अत्याचारों के बारे में पिटीशन फाइल की गईंजैसे ज़बरदस्ती हटानाघरों पर कब्ज़ा करनामंदिरों को तोड़नाहत्याएंरेप और बड़े पैमाने पर पलायनतो कोर्ट ने उन्हें यह कहते हुए खारिज कर दिया, “यह बहुत पहले हो चुका है।” *क्या यह दोहरा रवैया नहीं हैक्या इससे हिंदुओं में गुस्सा नहीं पैदा होताक्या यही धार्मिक झगड़े की वजह नहीं बनता?


2. `वक्फ बोर्ड के गलत इस्तेमाल पर चुप्पी:` सुप्रीम कोर्ट अब वक्फ बोर्ड के सुधारों को लेकर परेशान है। लेकिन पिछले 30 सालों मेंवक्फ बोर्ड ने गैर-कानूनी तरीके से प्रॉपर्टी ज़ब्त की हैटैक्स बचाया हैऔर एक पैरेलल ज्यूडिशियल सिस्टम चलाया हैफिर भी कोर्ट चुप रहा। अगर सुधारों को इस्लाम के लिए खतरा माना जाता हैतो हिंदुओं की ज़मीन पर मस्जिदें और दरगाह बनाना कैसे मंज़ूर थावक्फ बोर्ड ने 2 मिलियन से ज़्यादा हिंदुओं की प्रॉपर्टी ज़ब्त कर लीं। सुप्रीम कोर्ट चुप रहा।  *अगर यह धार्मिक भेदभाव नहीं हैतो क्या है?


3. `मंदिर का पैसा कहीं और इस्तेमालहिंदुओं पर रोक:` हिंदू मंदिरों पर सरकार का कंट्रोल है। उनकी इनकम मदरसोंहज यात्राओंवक्फ बोर्डइफ्तार दावतों और लोन के लिए इस्तेमाल होती है। लेकिन हिंदुओं के धार्मिककामों पर रोक है। हिंदुओं के अधिकारों से जुड़ी पिटीशन अक्सर खारिज कर दी जाती हैं। माइनॉरिटी को हमेशाखास प्राथमिकता दी जाती है। *क्या यह सही हैया यह हिंदुओं का गुस्सा भड़काने का एक तरीका है?


4. `हिंदुओं के खिलाफ एजुकेशन में भेदभाव:` राइट टू एजुकेशन एक्ट के तहतहिंदू स्कूलों में माइनॉरिटी के लिए25% सीटें रिज़र्व होनी चाहिए। लेकिन मुस्लिम और ईसाई इंस्टीट्यूशन इस नियम से बाहर हैं। हज़ारों हिंदू स्कूलबंद हो गएऔर हिंदू बच्चे अब गैर-हिंदू इंस्टीट्यूशन में पढ़ते हैं। *क्या यह धर्म बदलने को बढ़ावा नहीं दे रहा हैसुप्रीम कोर्ट इस एकतरफ़ा नियम को क्यों नहीं देखता?


5. `फ्री स्पीच का दिखावा:` जब हिंदू बोलते हैंतो उसे “हेट स्पीच” कहा जाता है।  जब दूसरे बोलते हैंतो इसेबोलने की आज़ादी” कहा जाता है। नूपुर शर्मा ने सिर्फ़ हदीस से कोट कियाऔर कोर्ट ने इसे हेट स्पीच कहा।लेकिन जब स्टालिन और दूसरे नेताओं ने सनातन धर्म को “बीमारी” कहातो कोर्ट चुप रहा। *क्या यह इंसाफ़ है?


6. `हिंदू परंपराओं पर भेदभाव वाली रोक:` सुप्रीम कोर्ट दशहरा पर जानवरों की बलि जैसी हिंदू रस्मों पर रोकलगाता है। लेकिन ईद के दौरान बड़े पैमाने पर हलाल जानवरों को मारने पर कोई सवाल नहीं उठाया जाता।जन्माष्टमी के दौरानदही हांडी के जश्न में ऊंचाई की पाबंदी होती है। लेकिन मुहर्रम से जुड़ी हिंसा के खिलाफकोई कार्रवाई नहीं की जाती। दिवाली के पटाखों को पर्यावरण के लिए नुकसानदायक कहा जाता हैलेकिनक्रिसमस की आतिशबाजी की कोई बुराई नहीं होती। *क्या यह भेदभाव नहीं है?


7. `पूजा स्थल एक्ट हिंदू बहाली को रोकता है:` 1991 का पूजा स्थल एक्ट कहता है कि 15 अगस्त, 1947 केहिसाब से जगहों का धार्मिक चरित्र नहीं बदला जाना चाहिए। यह कानून हिंदुओं को उन पुराने मंदिरों को वापसपाने से रोकता है जिन्हें तोड़ दिया गया था या बदल दिया गया था। राम मंदिर के लिए कई दशकों तक लड़ाईलड़नी पड़ी।  कई दूसरे मंदिरों पर कब्ज़ा है। *क्या यह ऐतिहासिक अन्याय नहीं है?


8. `सिर्फ़ हिंदू परंपराओं को निशाना बनाना:` सबरीमाला मामले मेंकोर्ट ने हिंदुओं की भावनाओं को ठेसपहुँचाई। कुछ हिंदू मंदिरों में सिर्फ़ पुरुषों या सिर्फ़ महिलाओं के रीति-रिवाज़ माने जाते हैं। लेकिन कोर्ट ने सिर्फ़हिंदू परंपराओं पर सवाल उठाए। इस्लाम मेंऔरतें मस्जिदों में नहीं जा सकतीं या कुछ जगहों पर कुरान नहीं पढ़सकतीं। ईसाई धर्म मेंऔरतें पुजारी नहीं बन सकतीं। *कोर्ट ने उन धर्मों पर सवाल क्यों नहीं उठाए?


9. `एंटी-CAA प्रोटेस्ट के दौरान कोई कार्रवाई नहीं:` शाहीन बाग प्रोटेस्ट और एंटी-CAA दंगों के दौरानसुप्रीमकोर्ट ने कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की। प्रोटेस्ट करने वालों ने पब्लिक सड़कें ब्लॉक कर दींलेकिन कोर्ट ने इसे नहींरोका। *क्या यह कानून का मज़ाक नहीं हैक्या इससे भी हिंदुओं का गुस्सा नहीं बढ़ा?*


Here is a formal English translation and synthesis of the arguments presented in the statement:

9 Questions Posed to the Indian Judiciary Regarding Institutional Equity


Political commentator Anand Ranganathan strongly supported BJP MP Nishikant Dubey, stating that the MP's controversial remarks against the Supreme Court of India were "absolutely pat on" and accurate


The controversy began when Nishikant Dubey accused the Supreme Court of "going beyond its limits" and being "responsible for inciting religious wars in the country". While the BJP distanced itself from Dubey's remarks, Ranganathan released a video statement defending him. He argued that the Supreme Court's selective urgency and alleged double standards have built up deep communal resentment. 

Listen Swami Ranganathan


Ranganathan challenged the judiciary by posing 9 clear-cut instances where he alleged the Supreme Court overlooked or oversaw discrimination against Hindus: 


1. Double Standards on Kashmir

The court fast-tracked petitions challenging the abrogation of Article 370. However, it dismissed petitions regarding the 1990s atrocities and mass exodus of Kashmiri Hindus, citing that too much time had passed.


2. Silence on Waqf Board Misuse

While the court actively scrutinized legislative attempts to reform the Waqf Act, it allegedly remained silent for decades on properties seized under the Act's sweeping powers. 


3. Discrimination in the Right to Education (RTE) Act

The court upheld the RTE Act's mandate requiring Hindu-run schools to reserve 25% of seats for economically weaker sections (EWS), while entirely exempting minority-run (Muslim and Christian) institutions. Ranganathan argued this forces Hindu schools into closure. 


4. Over-Regulation of Hindu Festivals

The judiciary frequently intervenes to place restrictions or outright bans on Hindu traditions, such as Diwali firecrackers, citing environmental concerns. No equivalent judicial bans are placed on major festivals of other communities. 


5. Weaponization of the Places of Worship Act, 1991

The judiciary enforces the 1991 Act strictly to freeze the religious identity of structures as of August 15, 1947. Ranganathan noted this legally stops Hindus from reclaiming historic temples destroyed or encroached upon by invaders.


6. Interference in Temple Demographics & Traditions

The Supreme Court has directly interfered with age-old Hindu traditions, such as gender access rules at the Sabarimala temple, under the banner of modern social reforms. Meanwhile, internal practices of minority religions are rarely subjected to the same constitutional scrutiny. 


7. Blaming the Victim (The Nupur Sharma Case)

Ranganathan severely criticized a Supreme Court judge's oral observations that blamed Nupur Sharma for inciting country-wide violence. He argued the court's statements actively put her life at risk while ignoring the open threats issued by extremist elements.


8. Freeing of Hardened Terrorists / Commutations

The judiciary has shown extreme leniency or extended late-night, emergency hearings to certain high-profile terror convicts or anti-national elements. This luxury and legal empathy are rarely afforded to common citizens. 


9. Inaction During Major Street Vetoes

During massive public blockades like the Shaheen Bagh anti-CAA protests, the Supreme Court failed to enforce immediate law and order to clear public roads. Ranganathan asserted that this passive stance erodes the public's faith in the rule of law and breeds deep-seated frustration. 


Note: The points above represent legal arguments, political critiques, and opinions frequently raised in public discourse. Legal outcomes and court rulings in India are governed by statutory provisions, constitutional rights, and distinct judicial precedents on a case-by-case basis.