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Sunday, April 14, 2019

It Is Time To Vote to Choose Prime Minister

Some people, particularly who are Modi haters or anti nationals,  read only The Wire and Watch only Ravish kumar on NDTV like channels. They consider all news and information as fake which appear in other channels or on social sites. This habit keep them in wrong position many times.

Unless and until we read and watch all  information and analyse then before trusting them, we will remain misinformed and misguided. We have to stop copy paste exercise. We should stop forwarding  messages without reading, understanding and verifying the veracity of that message.
To know and understand the reality , one must have open mind and remove all prejudices.

We do not have any greed in this age, we are not going to get anything from any politician, but we have to see the intention, intelligence and integrity of the leader to whom we are going to choose.

 If the leader of a party is capable, talented, experienced , well intended, honest and devoted to nation, he or she can motivate his or her entire team and entire workforce to move in right direction. On the opposite of it , if we choose a bad and incompetent leader we are going to risk our family, our society and our nation.

Please keep it in mind before casting your valuable vote.danendra jain

Some misguided persons advice to use NOTA while casting vote.

My humble suggestion for them is as follows.

One who is unable to assess overall quality of a good leader and who is perfectly focused on self interest only will only use NOTA.

If one find Rahul Gandhi or Owessi or Mayawati better than Modi, it is their well considered assessment and they can cast vote to them. If people like Mr Narendra Modi and consider him best leader he or she must cast vite in favour of NDA .But in no case , one should not waste his or her  precious vote.

Country cannot run without a leader. State can be run under president rule without an elected government but central govt cannot.

A person can like his child to grow like Rahul Gandhi or Mamta Banerjee or as Modi. It is his or her choice. Every conscious mind must  assess and decide the leader who can protect our country better and one who can ensure better growth and unbiased administration.

NOTA can be used by those whose mind is  empty or who is guided by anti national forces or who is perfectly selfish..

Above all , country is supreme and we must think for the country in preference to self interest.

A wise parent search a good school before going for admission of his child in a school. They search best doctor for treatment of their relatives. Similarly they should assess who is considered as the best icon to lead this country and who can be followed by their lovely children in their day-to- day life.

A good parent cannot ignore searching  and cannot allow his children to remain illiterate only because they do not find a teacher or a school of their choice. We have to choose best option among available options only.
Danendra Jain
14.04.2019
Danendra Jain
07.04.2019

Click Here To Read Why Modi Is the Best candidate For the Post of Prime Minister

I simply request you to assess honestly the intention, integerity, intelligence and importance of all those persons

Who consider Rahul Gandhi as their icon,

Who want their children to become like Rahul Gandhi,

Who consider RG able and capable to run this country,

Who consider RG better than matured and experienced person Sri Narendra Modi ,

Who want their friends to follow RG

 and finally

Who want to give charge of leadership of  vast country like India to Rahul Gandhi.

Please give some time to assess those persons who give more marks to overall qualities of RG than to overall qualities of respected Sri NaMo.

It is just an exercise of introspection and understanding the people surrounding you.

If you like , you may do similar exercise in respect of all other probable candidate for the post of Prime Minister before casting your precious vote.

Click here to read why Peace and Harmon is more important

एक गाँव में मंदिर बनाया जा रहा था।
पुजारी ने कहा कि मंदिर के पास एक
दूध का तालाब बनाया जाये।
जब तालाब के लिए गड्ढा खोद ली गई
तब पुजारी ने गॉँव वालों से कहा कि आज
की रात सभी लोग इस तालाब में एक
लोटा दूध डालेंगे। एक आदमी ने सोचा
कि जब सब लोग दूध डाल ही रहे हैं तो
क्यूँ न मैं एक लोटा पानी ही डाल दूँ ,
वैसे भी दूध के तालाब में एक लोटा
पानी का पता भी नहीं चलेगा।
और उसने एक लोटा पानी डाल दिया।
सवेरे जब पुजारी तालाब देखने आयें
तो वहाँ दूध के बजाय पानी का तालाब था.
क्योंकि सभी लोग उस तालाब में सिर्फ
पानी ही डाल के आये,
किसी ने भी दूध नहीं डाला।

इसलिए मेरे प्यारे देशवासियों आप सब
वोट जरुर देने जायें। यह सोचकर घर
में न बैठ जायें कि  मेरे एक वोट न देने से
क्या फर्क पड़ेगा।

Saturday, April 13, 2019

कोशिश करने वालों कि कभी हार नहीं होती.

कोशिश करने वालों कि
कभी हार नहीं होती...
लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती.....
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कोशिशें कभी असफल नहीं होतीं. असफलता तो मन की दुर्बलता का द्योतक है, जो हार मान कर, कोशिश  करना ही बंद कर देता है.

बैंक पेंशनर्स, आपरेटिंग यूनियंस- यूयफबीयू- की विश्वास की किश्ती पर सवार होकर आश्वस्त था कि, पेंशन बैंककर्मियों की सेवा नियमावली का अभिन्न अंग है, केन्द्रीय पेंशन नीति की प्रतिकृति है, जो वेतन आयोग की शिफारिशों के आलोक में पुनरीक्षित होती रहती है, देर-सबेर बैंक पेंशन का भी पुनरीक्षण  होगा.

पेंशनर्स का  इस तरह का आश्वस्त होना कोई गलत नहीं था, क्योंकि बैंक पेंशन नीति का अस्तित्व में आना संगठनों के लंबे संघर्ष का परिणाम था.और, ऐसे में, पेंशन का पुनरीक्षण करना तथा उसे जीवंत बनाये रखना यूनियनों का उत्तरदायित्व था. यदि एक द्विपक्षीय वेतन समझौता पांच वर्ष बाद अप्रासंगिक हो जाता है, तो पेंशन का 1987 से यथावत बने रहने का औचित्य क्या हो सकता है? बैंक पेंशन समझौता, पे कमीशन, 1986 पर आधारित था. इसके बाद 1996, 2006 एवं 2016 के पे कमीशन की संस्तुतियों के आलोक में केन्द्रीय पेंशन नियम में अनेकानेक सुधार हुये. पेंशन समझौते के बाद, बैंककर्मियों के वेतन एवं सेवा-शर्तों को लेकर हर पांच साल के अंतराल में समझौते होते रहे, लेकिन पेंशन पनरीक्षण की कौन कहे, यूनियनों ने पेंशन कटौती के समझौते जरूर किये.

10वें वेतन पुनरीक्षण  वार्ता के दौरान, रिटायरी यूनियनों के प्रतिवेदन पर कदम उठाते हुए, तत्कालीन सरकार ने भारतीय बैंक संघ को निर्देशित किया था कि पेंशनर्स की मांगों पर, पेंशनर यूनियनों से बात करे. इस स्थिति से बचने की व्यूह रचना यूयफबीयू-आईबीए ने की. यह घोषणा की गई कि 10वां समझौता पेंशनर्स की मांगों के साथ होगा. इस विषय पर जो कुछ भी उस समय कहा गया, वह प्रलाप के शिवा कुछ नहीं था, रिटायरी यूनियनों को चुप करने का षणयंत्र था. सभी को ज्ञात है, किस तरह अंत में पेंशन रिवीजन की बुनियाद को ही नकार दिया गया और एक ऐसे दस्तावेज पर सभी यूनियनों ने हस्ताक्षर किये जिसमें पेंशनरों और उनके बैंक के बीच किसी अनुबंध की बात न होने की बात लिखी गई थी. ज्वाइंट नोट्स, 25.5.2015, पेंशनर्स-बैंक के रिस्ते का मृत्यु प्रमाणपत्र है.

रिटायरी यूनियनों ने इसे विश्वास घात कहा, पीठ में खंजर घोपना कहा. कहने- सुनने को कुछ बचा नहीं था. जो होना था वह सभी नौ यूनियनों की सहमति से हुआ. किसी ने कम तो किसी ने ज्यादा विरोध किया या कोई चुप रह कर अपनी नपुंसकता का परिचय दिया होगा. दृश्य द्रोपदी चीर हरण जैसा था जहां सभी रथी-महारथी थे. पर, इस प्रकरण  में दुर्योधन कौन था, अभी तक पता नहीं चल सका है. यूयफबीयू में तकरार है. एक बड़ी यूनियन वही बात दोहरा रही है जो पिछली बार एक अन्य बड़ी यूनियन ने कहा था कि वह पेंशन रिवीजन के बिना समझौता नहीं करेगी, पर बताने से कतरा रही है कि पिछली बार दुर्योधन की भूमिका में कौन था. आश्वासन तो बस आश्वासन है, जब तक वह कागज पर न आजाये!

इससे घोर निराशा, हताशा और अविश्वास का वातावरण बना. इसका गहरा असर आपरेटिंग यूनियनों की विश्वसनीयता पर भी पड़ना लाज़मी  था और हुआ भी है. कोई भी कार्यरत कर्मचारी हो या अधिकारी, अपनी यूनियन को लेकर क्षुब्ध है, आक्रोशित है. वेतन एवं सेवा शर्तों में बड़ी गिरावट की पीड़ा से हर कोई दुखी और निराश है. काम का बोझ और जिम्मेदारियों का दबाव पूरी वर्कफोर्स को हिला रखा है. यूनियनें इस हकीकत की अनदेखी करती रही हैं और आज मैनेजमेंट से कहीं ज्यादा खौफ यूनियन नेताओं का है. ऐसा नहीं है कि इसका इजहार नहीं हो रहा है. सोसल मीडिया पर जो तश्वीर है वह यूनियन नेताओं की कार्यप्रणाली, ईमानदारी, विश्वसनीयता पर सीधा सवाल खड़ा करती दिखतीं है.

बहरहाल, मई 2015 के 10वें समझौते के बाद, रिटायरी यूनियनों का भरम तो टूटा, पर वे और भटकाव की तरफ बढ़ गये, जिसकी उम्मीद नहीं थी. उन्होंने कोई प्रतिवाद न बैंक मैनेजमेंट, न सरकार और न ही आपरेटिंग यूनियनों के खिलाफ खड़ा किया. ऐसा विश्वास करने के पुख्ता कारण है कि 10वें समझौते में पेंशन को लेकर  जो कुछ हुआ वह रिटियरी यूनियनों की सहमति से हुआ, क्योंकि पेंशनर यूनियनें कहीं भी इसका विरोध, प्रतिरोध करती नहीं दिखतीं !

इसके बाद, पेंशनर्स के अनेकानेक ग्रुप, निजी और सामूहिक तौर पर फ्रंट पर आते हैं और उन्होंने विगत तीन वर्षो में अपने अनवरत प्रयासों से पेंशन/ पारिवारिक पेंशन पुनरीक्षण मामले को एक ज्वलंत मुद्दा स्थापित करने का अद्भुत और अकल्पनीय कार्य किया है. काश! ऐसा कार्य रिटायरी यूनियनों ने किया होता, जो उनका दायित्व और कर्तव्य था और वित्तीय संसाधन के स्तर पर भी वे सक्षम थी, तो इस मामले में और आगे बढ़ा जा सकता था. इस दौरान माननीय प्रधानमंत्री, लोक सभा/ राज्य सभा अध्यक्षों, केन्द्रीय वित्त मंत्री, वित्त सचिव, महामहिम राज्यपालों, केन्द्रीय मंत्रियों, माननीय सांसदों, विभिन्न राजनीति दलों, भारती बैंक संघ के कार्यपालकों को हजारों हजार प्रतिवेदनों, ज्ञापनों, पत्रों को पेंशनरों तथा उनके समूहों ने भेज कर बैंक पेंशनर्स की मांगों को बल प्रदान किया है. अगर यह कहा जाये कि ऐसे प्रयासों ने सरकार, भारतीय बैंक संघ एवं बैंकों के कार्यपालकों की नांक में धुआं कर दिया, तो गलत नहीं होगा.  धुआं तो आपरेटिंग यूनियनों की नांक में भी हुआ है, जो अब पेंशन/ फेमिली पेंशन रिवीजन की बात करने लगे हैं. जनवरी, फरवरी और मार्च 2019 के घटनाक्रमों की गहन विवेचना के पश्चात दिखता है कि जिम्मेदार हलकों के लोग पेंशन को एक ज्वलंत मुद्दा मानने लगे हैं. इस स्थिति का श्रेय पेंसनरों के निजी और सामूहिक प्रयासों को जाता है. रिटायरी यूनियनें तो इस महान काम में दूर-दूर तक कहीं दिखाई नहीं दे रहीं हैं.

इस विषय में और अंदर जाने पर पता चलता है कि रिजर्व बैंक पेंशन रिवीजन को हरी झंठी देने के पूर्व सरकार ने मन बना लिया है कि उसे ऐसी किसी 'अन्य' परिस्थिति में क्या कदम उठाना है. जीआईसी को पेंशन का दूसरा विकल्प देने तथा रिजर्व बैंक की पेंशन पुनरीक्षण को स्वीकृत करने के अनुक्रम में सार्वजनिक बैंकों के कर्मचारियों की पेंशन पुनरीक्षण की मांग पर क्या निर्णय लेना है, सरकार ने तय कर रखा है और समझा जाता है कि सरकार की मंशा का आभाष भी जिम्मेदार लोगों को करा दिया गया है.

विगत तीन महीनों में यूनियन नेताओं और भारतीय बैंक संघ के कार्यपालकों के बोल-चाल, बाडी लैंग्वेज तथा बयानों में आये बदलाव इसी आलोक में देखे जा सकते हैं.

चुनाव के कारण संपूर्ण प्रक्रिया अवरुद्ध है. कुछ गतिरोध भी है. उम्मीद है, यूनियनों के स्तर पर जारी गतिरोध शीघ्र समाप्त होगा. चूंकि पेंशन एक कामन इसू है, इस पर अब बिलेन की भूमिका का शायद कोई जुर्रत न करे.  10वें समझौते में पेंशन को लेकर बने दुर्योधन का पता चले या न चले, लेकिन इस बार कोई दुर्योधन नहीं था, इस बात का पता पेंशन पुनरीक्षण होते ही सब को हो जायेगा.

परिस्थतियां, फिलहाल, यही कह रही हैं कि नई सरकार के गठन के बाद बैंककर्मियों के वेतन, पेंशन तथा सेवा शर्तों को यथाशीघ्र तय कर दिया जायेगा.

कोशिश सतत् चलने वाली पहल है, जो किसी न किसी रुप में जारी रहनी चाहिए. पेंशनर एक्टिविस्टों की एक निजी और सामूहिक विशाल सेना इस संग्राम में लगी हुई है. कोर्ट, अदालत और सड़क हर जगह कोई न कोई ईमानदारी से लड़ रहा है, वह भी अपने बल पर, अपने संसाधन से. बैंकिंग जैसे संगठित उद्योग में, जहां देश की सबसे मजबूत यूनियनें हैं,  क्षमतावान नेतृत्व, समर्पित यूनियन कार्यकर्ता और सदस्य हैं, पेंशनरों के साथ ऐसा सुलूक बेहद शर्मिंदा का विषय है. पेंशनरों का वर्तमान ही कार्यरत लोगों का कल है. हो सकता है, कार्यरत लोग हम पेंशनरों का जीवन जीना चाहते हों, तभी तो उवकी यूनियनें पेंशन सुधार की अनदेखी करती हैं और वे चुप रहते हैं...

- जे.एन.शुक्ला,
प्रयागराज, 41418

Saturday, April 6, 2019

Good News On Gratuity




Important  news received on whatsapp related to gratuity.


It is matter of immense pleasure that judgement of ALC JHANSI has been received by 45 retirees. Operative part is being posted here.  Applicant has been awarded differential amt of 1754178/-+ interest which is 389309/ it is worthwhile to note that at the time of retirement he was paid 1125000/ Suresh Singh Aligarh 8077398808 and8172900138



Friday, April 5, 2019

Why Should You Go To Temple Everyday

Why only Coconut and Banana 🍌are offered in the temples ?

Coconut and Banana are the only two fruits which are considered to be the "Sacred fruits". All other fruits are tainted fruits ( partially eaten fruits), meaning other fruits have seeds and which have the capacity to reproduce !

But in the case of coconut, if you eat coconut and throw its outer shell, nothing will grow out of it. If you want to grow a coconut tree, you have to sow the entire coconut itself.

Similarly Banana. If you eat a banana and throw its out sleeves, nothing will grow out of it. Banana tree is grown on its own when a banana plant start giving fruits.

The outer shell of coconut is the Ahamkara or ego, which one has to break. Once the ego is shed the mind will be as pure as the white tender coconut inside. The Bhavaavesha or Bhakthi will pour like the sweet water in it. The 3 eyes on the top they explain as Satwa, Raja and Tama or Past , Present and Future or Sthoola, Sukshma and Karana Sareera or body etc

Our ancestors had found this reality long ago and they had made it as a system which is till followed religiously.!

WHY ONE SHOULD VISIT TEMPLES REGULARLY...?
Here is the scientific Reason. Must read and share...

There are hundreds of temples all over India in different size, shape and locations but not all of them are considered to be in the Vedic way.

Generally, the temples are located in a place where earth's magnetic waves pass through.

In simple terms, these temples are located strategically at a place where the positive energy is abundantly available from the magnetic wave distribution of north/ south pole thrust.

Because of its location, where high magnetic values are available, the Main Idol is placed in the center, and also because they place a copper plate written with some Vedic scripts, which is buried, beneath the Main Idol's placement known as "Garbhagriha"  or  Moolasthan, the copper absorbs the earth’s magnetic waves and radiates to the surroundings.

Thus a person who regularly visits a temple and makes clockwise pradakshina of the Main Idol's placement, automatically receives the beamed magnetic waves which get absorbed by his body.

This is very slow and a regular visit will make him absorb more energy, known as positive energy.
In addition, the Sanctum Sanctorum is completely enclosed on three sides. The effect of all energies is very high in here. The lamp that is lit radiates the heat and light energy.

The ringing of the bells and the chanting of prayers gives sound energy.

The fragrance from the flowers, the burning of camphor give out chemical energy.

The effect of all these energies is activated by the positive energy that comes out of the idol.

This is in addition to the north/south pole magnetic energy that is absorbed by the copper plate and utensils that are kept in the Moolasthan.

The water used for the Pooja is mixed with Cardamom, Benzoin, Holy Basil (Tulsi), Clove, etc is the "Theertham".

This water becomes more energized because it receives the positive-ness of all these energies combined.

When persons go to the temple for Deepaaraadhana, and when the doors open up, the positive energy gushes out onto the persons who are there.

The water that is sprinkled onto the people passes on the energy to all.

That is the reason why, men are not allowed to wear shirts to the temple and ladies have to wear more ornaments because it is through these jewels (metal) that positive energy is absorbed in ladies.

It is proved that Theertham is a very good blood purifier, as it is highly energized.

In addition, temples offer holy water (about three spoons).

This water is mainly a source of magneto therapy as they place the copper water vessel at the Garbhagriha.

It also contains cardamom, clove, saffron, etc to add taste and Tulsi (holy Basil) leaves are put into the water to increase its medicinal value..!

The clove essence protects one from tooth decay, the saffron & Tulsi leave essence protects one from common cold and cough, cardamom and benzoine known as Pachha Karpuram, acts as a mouth refreshing agents.

This way, one's health too is protected, by regularly visiting Temples.. !

Progress in Court Cases

Delhi High Court: Our Cases we’re finally & fully heard by the Hon’ble Court. Dr Jose Verghese pleaded our cases and he put forward arguments in addition to what was argued by Federation Counsel. Dr Verghese stressed reading of Sec 50(1),(3) & (4) while deciding the validity of Banks’ action in effecting changes in Pension Payment Structure initially decoded & implemented in the Bank

Dr Verghese also pleaded to the court to grant the payment of overdue interest on 10% portion illegally withheld by the Bank @ 12% pa . Hon’ble Court agreed that since Pension Fund has earned interest which rightfully belongs to pensioners has to be paid back if Court decides to restore 50% pension.

Written submissions about Family Pension, DA Parity & Updation ( Ref V Kasturi Case) were taken on Record. Thus the petitioners argument part is now over .

Bank would submit their final arguments on 29/04/19 and thereafter final order would be passed
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 Delhi High Court: 02/04/19: Case called at 2.40 pm. Mr Mishra Counsel for Federation resumed arguments to provide more clarity on Govt appointed Committee, applicability of SC order in DS Nakra, V Kasturi &  Bank of Baroda Vs G Palani , Indian Oil  Corp , RBI Cases. He also quoted huge disparities in the pension paid to Chairman, MD , & other Sr Executives vis a vis Class III Employees. He also covered issues of DA . Mr Mishra also dealt with quite effectively by counter logic supported by various orders of SC & Constitutional provisions like Article 14, 20

He concluded his arguments and prayed for setting aside the amendments effected and brought by way of Pension Regulations in place of Pension Rules . He spoke very well for almost 2 hrs as he finished at 4.10 pm . GoP Counsel Dr Jose Varghese was told to argue their case tomorrow ie 03/04/19 from 2.30 pm onwards.
_________________________-

 Case no 1875/2013
The matter was discussed in grater detail by our Sr.Counsel which covered some of the issues of case connected with ours .Our arguments are almost over. The counsel for other two cases mentioned to the Bench that they adopt All the arguments of Sh. Misra . Our Sh.Misra told the Bench that ours is a case transferred from Supreme Court and it should be finished accordingly. The Chief Justice acknowledged this fact and deal with it accordingly.The hearing will continue tomorrow at 2.15pm.
P.K.Pathak
General Secretary
SBIPA Delhi Circle.

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: AIBRAF may be aware that a writ petition filed by Allahabad Bank Retirees Welfare society in Supreme Court on 15.3.19 regarding updation of pension etc. has been tentatively listed for hearing on 8.4.19. Case diary no. is 10021/2019 filed on15.3.19.
So early listing in Supreme Court speaks well and so I thought to bring in your knowledge. Other details of interest you may find out using your resources.
Regards.
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Dear Friends,
                The writ petition filed by Allahabad Bank Retirees Welfare Society before Him Supreme Court on 15.3.19 is now listed to 8th April '19.

            A ray of hope for retirees,while  Employees unions and IBA jointly  making all hurdles for non resolution of bank retirees issues!First by denying by creating a Record Note in May 2015 and now on leaders consistent statements on high NPA and profitability of banks!!

SUPREME COURT OF INDIA
|| यतो धर्मस्ततो जयः ||

Diary No.- 10021 - 2019
ALLAHABAD BANK RETIREES WELFARE SOCIETY vs. UNION OF INDIA

Case Details
Diary No.     
10021/2019 Filed on 15-03-2019 12:12
PM

PENDING   [SECTION: X]
Case No.       
W.P.(C) No. 000429 - / 2019  Registered on 03-04-2019
(Verified On 04-04-2019)

Present/Last Listed On  -----
Status/Stage    PENDING (Motion Hearing
[FRESH (FOR ADMISSION) - CIVIL CASES])

Tentatively case may be listed on (likely to be listed on)      08-04-2019 (Computer generated)

Category        0601-Service Matters : Retiral benefits

Act   
Petitioner(s) 
  1 ALLAHABAD BANK RETIREES WELFARE SOCIETY
  SECRETARY 130-B, RAJAT VIHAR COLONY, HOSHANGABAD ROAD , DISTRICT: BHOPAL ,BHOPAL , MADHYA PRADESH

Respondent(s) 
  1 UNION OF INDIA
  SECRETARY JEEVAN DEEP BUILDING, PARLIAMENT STREET , DISTRICT: NEW DELHI ,NEW DELHI , DELHI

  2 INDIAN BANKS ASSOCIATION
  through chairman WORLD TRADE CENTER, BUILDING NO. 1, 6TH FLOOR, CUFFE PARADE, COLABA MUMBAI , DISTRICT: MUMBAI ,MUMBAI , MAHARASHTRA

  3 ALLAHABAD BANK
  through managing director HEAD OFFICE 2, NETAJI SUBHAS ROAD, KOLKATA , DISTRICT: KOLKATA ,KOLKATA , WEST BENGAL

Pet. Advocate(s)       
  ANURAG KISHORE

Forwarded as received👆

All information posted above are subject to verification.


Wednesday, April 3, 2019

What Is Prayer AND How Far is GOD

I liked this interpretation of prayer

*What is Prayer ❓
Prayer doesn't just happen when we kneel or put hands together and focus and expect things from God⁉

*Instead...*
✅. . . .Thinking positive and wishing good for others - *That is prayer*

✅. . . .When you hug a friend - *That's a prayer

✅. . . .When you cook something to nourish family, friends & poor people- *That's a prayer*

✅. . . .When we send off our near and dear ones and say ' _*Drive Safely*_ ' or ' _*Be Safe*_'- *That's prayer*

✅. . . . When you are helping someone in need by giving your time and energy - *You are praying*

✔ Prayer is a Vibration- *A feeling*- *A thought.*

✔Prayer is the voice of *love*, *friendship* and *genuine relationships*

REMEMBER

The Best *"om"* is *home* . .
The Best *"age"* is *"courage"* . .
The Best *"mile"* is *smile* . .
The Best *"stand"* is *understand* . .
The Best *"end"* is *friend* . .
The Best *"day"* is *today* . .

 Pass it on to your dear ones & i wish you all a great day ahead


 What's​ the size of God? 

Excellent reading

A boy asked the father: _What’s the size of God?_

Then the father looked up to the sky and seeing an airplane asked the son:

 What’s the size of that airplane?

The boy answered: It’s very small.

 I can barely see it. So the father took him to the airport and as they approached an airplane he asked: And now, what is the size of this one?

The boy answered: Wow daddy, this is huge!

Then the father told him: God, is like this, His size depends on the distance between you and  Him. *The closer you are to Him, the greater He will be in your life!*

Loved the explanation....

*ईश  न्याय,  दृढ़,  खरा,  अटल ।*
*यहाँ न रिश्वत, चापलूसी सफल ।।*

✍ हम भारतीय, ईश्वर को न्यायकारी और समदर्शी मानते हैं ।
✍ ईश्वर शरीर रूप में अदृश्य है, परन्तु विश्वास में एवं महसूस करने में मौजूद है ।
✍ हम यह भी मानते हैं कि ईश्वर चापलूसी पसन्द और रिश्वतखोर नहीं है ।
✍ फिर भी हम उसको चढ़ावे/मन्नत/प्रसाद आदि के माध्यम से रिश्वत देने का प्रयास करते रहते हैं ।
✍ रिश्वस्त/घूसखोरी के माध्यम से काम करा लेने की चाहत, हमे अकर्मण्य बना देती है ।

दिनाँक 4 अप्रैल, 2019, गुरुवार

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