Tuesday, August 11, 2026

समाज में पनपती कुरीतियाँ और समस्याएँ

 पारिवारिक मूल्यों का क्षरण: आधुनिक समाज में घटता अपनापन और बढ़ता असंतोष

आधुनिक युग में अकेलापन और असंतोष का संकट

बीते कुछ दशकों में हमारे सामाजिक ढाँचे में एक गहरा बदलाव आया है। हम उस दौर से निकलकर आज के दौर में आ पहुँचे हैं जहाँ कभी दादा-दादी, चाचा-चाची, ताऊ-ताई और भाई-बहन एक ही छत के नीचे प्रेम और तालमेल के साथ रहा करते थे। आज संयुक्त परिवार सिमटकर एकल परिवार और फिर अकेले रहने वाले व्यक्तियों तक सीमित हो गए हैं। यद्यपि भौतिक सुख-सुविधाएँ और आर्थिक तरक्की अपने चरम पर हैं, लेकिन मानसिक शांति, भावनात्मक संबल और सामाजिक सौहार्द में भारी गिरावट आई है।

पारंपरिक पारिवारिक सहयोग तंत्र के बिखरने से जो शून्यता पैदा हुई है, उसे अवसाद, चिंता और असंतोष ने भर दिया है। अतीत में जब परिवार का कोई सदस्य बीमार पड़ता था या किसी संकट में होता था, तो पूरा कुनबा उसका सहारा बनता था। आज व्यक्ति हर छोटी-बड़ी चुनौती से अकेले जूझने को मजबूर है।


 * एकांकी वृद्ध माता-पिता: किसी बड़े शहर में अकेले रह रहे बुजुर्ग दंपत्ति का उदाहरण लीजिए। विदेश या दूर शहरों में उच्च पैकेज पर काम कर रहे बच्चे आर्थिक सहायता तो भेज देते हैं, लेकिन संवाद के लिए तरसते हैं। आर्थिक संपन्नता के बावजूद, ऐसे माता-पिता अपना वृद्धावस्था का जीवन बेहद अकेलेपन में बिता रहे हैं।

 * बिखरते एकल परिवार: पति-पत्नी दोनों नौकरी पेशा हैं और उनका एक बच्चा है। किसी बीमारी या कार्यस्थल के तनाव के समय जब कोई बड़ा-बुजुर्ग संभालने वाला नहीं होता, तो घर में कलह और मानसिक थकान बढ़ जाती है। छोटी-छोटी बातें विकराल रूप ले लेती हैं और नौबत अलगाव तक पहुँच जाती है।

समाज में पनपती कुरीतियाँ और समस्याएँ

भौतिक मानकों को भावनात्मक सामंजस्य से ऊपर रखने के कारण समाज में कई विकृतियाँ आ चुकी हैं:

1. विवाह में देरी और भौतिकवादी दृष्टिकोण

पहले विवाह दो परिवारों का मिलन और एक-दूसरे के साथ सामंजस्य बिठाकर आगे बढ़ने का नाम था। आज विवाह को एक वित्तीय सौदे की तरह देखा जाने लगा है। 

जीवनसाथी का चुनाव करते समय पैकेज, प्रॉपर्टी और स्वतंत्र (माता-पिता से अलग) रहने की शर्त को प्राथमिकता दी जाती है। 

इस सोच ने नए जोड़ों की सामंजस्य बिठाने की क्षमता को कम कर दिया है। परिणामस्वरूप, युवक-युवतियाँ 35 से 40 वर्ष की आयु तक बिना विवाह के रह जाते हैं क्योंकि वे आदर्श भौतिक पैमानों की खोज में ही उलझे रहते हैं।

लिव-इन संबंध और अस्थाई रिश्तों का दौर

प्रतिबद्धता से भागने और समझौते की भावना में कमी के कारण लिव-इन संबंधों का प्रचलन बढ़ा है। स्वतंत्रता के नाम पर अपनाई जाने वाली ये व्यवस्थाएँ अक्सर दीर्घकालिक स्थायित्व देने में विफल रहती हैं। चुनौतियाँ आते ही रिश्ते तोड़ देना आसान माना जाने लगा है। 

आधुनिक सिनेमा और मीडिया भी तलाक और अलगाव को अति-आधुनिक और सहज बताकर पेश करते हैं, जिससे वैवाहिक जीवन की गंभीरता समाप्त हो रही है।

युवाओं में बढ़ता नशा और भटकाव

दादा-दादी के संस्कारों, कहानियों और नैतिक मार्गदर्शन से वंचित बच्चे बचपन से ही भावनात्मक अकेलापन महसूस करते हैं। घर में बड़ों की अनुपस्थिति और अनुशासन के अभाव में युवा वर्ग डिजिटल लत, शराब और विभिन्न प्रकार के नशीले पदार्थों की चपेट में आ रहा है। 

संयुक्त परिवार का जो सुरक्षा कवच उन्हें भटकने से रोकता था, वह अब गायब हो चुका है।


समाधान: पारिवारिक सामंजस्य और परंपराओं की पुनर्स्थापना

यदि हमें अपने समाज और भावी पीढ़ियों को सुरक्षित रखना है, तो हमें अपनी प्राथमिकताओं को पुनर्गठित करना होगा:

 * बैंक बैलेंस से ऊपर रिश्तों को महत्व देना: वास्तविक संपत्ति पारिवारिक सुरक्षा, साथ बैठकर किया गया भोजन और स्वस्थ रिश्ते हैं। समाज को आर्थिक पैकेज के बजाय संवेदनशीलता और आपसी प्रेम का सम्मान करना सीखना होगा।

 * गृहिणी के योगदान को सम्मान: घर को संभालना, बच्चों में संस्कार सींचना और बड़ों की सेवा करना एक अत्यंत कौशलपूर्ण कार्य है। इस भूमिका को नीचा देखने के बजाय इसे समाज की रीढ़ के रूप में सम्मान देना चाहिए।

* सामंजस्य और क्षमा की भावना: सुखी वैवाहिक जीवन का आधार धैर्य और थोड़ा झुकने की कला में है। भावी पीढ़ी को यह सिखाना आवश्यक है कि सामंजस्य बिठाना आत्म-सम्मान खोना नहीं, बल्कि रिश्ते को बचाना है।

* बुजुर्गों की छत्रछाया: बुजुर्ग परिवार पर बोझ नहीं, बल्कि संस्कृति के संवाहक और बच्चों के लिए भावनात्मक संबल होते हैं। उन्हें घर के केंद्र में रखने से परिवार में अनुशासन और प्रेम बना रहता है।

 * ग्रुप और संयुक्त परिवार की ओर वापसी: जहाँ रोजगार के कारण एक साथ रहना संभव न हो, वहाँ भी आसपास रहने या प्रतिदिन संवाद बनाए रखने की संस्कृति को जीवित रखना चाहिए।

कविता प्रस्तुत है नीचे 

वो आंगन और बरगद की छांव'

छूट गया वो बड़ा सा आँगन, 

छूट गई वो बातें,

कहाँ गईं वो दादी माँ की मीठी-मीठी रातें?

चाचा, ताऊ, भाई-बहन सब एक ही छत के नीचे,

खुशियाँ दौड़ी आती थीं सब एक-दूजे के पीछे।

आज बने हैं ऊँचे मकान, पर दिल छोटे हो गए,

पैकेज और प्रॉपर्टी के चक्कर में, अपने ही खो गए।

काँच के महलों में अब तो बस सन्नाटा रहता है,

पैसों के इस दौर में अब हर एक अकेला बहता है।

लौट चलो उस मिट्टी में जहाँ प्रेम ही सबसे धन था,

जहाँ बड़ों का आशीर्वाद ही जीवन का आभूषण था।

साथ बैठना, साथ हँसना, दुख में हाथ थाम लेना,

सीखें हम फिर से अपनों को थोड़ा सा वक्त देना।

शायरी

बैंक के खातों में चाहे जितनी भी रक़म रख लो,

अगर घर में अपने नहीं, तो हर खुशी अधूरी है।

तलाक और अलगाव से कभी घर नहीं बसा करते,

जो झुकना सीख ले, वही रिश्ता ताउम्र निभाता है।

ज़िंदगी की सच्ची दौलत गाड़ी या बंगला नहीं होती,

शाम को हँसते हुए अपनों का साथ ही असली ज़मीन होती है।


यहाँ प्रसिद्ध गीत "मेरे देश की धरती सोना उगले" की लय (Tune) पर एक गीत तैयार किया गया वो हिंदी गीत प्रस्तुत है:

Song tune Mere Desh ki Dharti


https://suno.com/s/H7fnULWogbUSLjl7

🎵 गीत: "मेरे घर का आँगन प्रेम उगले"

(तर्ज: मेरे देश की धरती सोना उगले...)


(मुखड़ा)

मेरे घर का आँगन, प्रेम उगले, उगले संस्कार मोती...

मेरे घर का आँगन!

अपनों का ये डेरा, जहाँ हो मिलन का सवेरा

मेरे घर का आँगन, प्रेम उगले, उगले संस्कार मोती...

मेरे घर का आँगन!

(अंतरा 1)

एक समय था जब दादा-दादी, चाचा-ताऊ संग रहते थे,

दुख-सुख में सब हाथ बँटाकर, हँसते-गाते दिन कटते थे!

बीमार पड़े जब घर में कोई, सब सेवा में लग जाते थे...

आज अकेले पड़े हैं बुज़ुर्ग, आँखें अपनों को तरसें!

पैकेज और प्रॉपर्टी के पीछे, छूट गए क्यों रिश्ते?

मेरे घर का आँगन...

(अंतरा 2)

35 और 40 की उम्र हुई, फिर भी ना जोड़े मिलते हैं,

बैंक बैलेंस तो बड़े बन गए, पर दिल छोटे पड़ जाते हैं!

सहनशीलता, त्याग, समर्पण... अब तो गुमनाम हुए,

अहम और अभिमान के कारण, घर-घर में अलगाव हुए!

लिव-इन और तलाक की बातें, समाज को क्यों भटकाएँ?

मेरे घर का आँगन...

(अंतरा 3)

गृहिणी का सम्मान बढ़ाएँ, जो घर को स्वर्ग बनाती है,

संस्कार सींचकर बच्चों में, सुंदर समाज रचाती है!

छोड़ के नशा और भटकाव को, लौटें अपनों की छाँव में,

स्वर्ग बसा है अपनों के संग, ना कि काँच के मकानों में!

पैसों से ऊपर रिश्तों को रखो, यही सच्ची पूँजी!

मेरे घर का आँगन, प्रेम उगले, उगले संस्कार मोती...

मेरे घर का आँगन!


Reclaiming the हेल्थ: Protecting Our Families and Restoring Harmony in Modern Society

Background: The Crisis of Isolation and Discontent in the Modern Era

Over the past few decades, human society has undergone a profound structural transformation. We have transitioned from thriving, intergenerational joint families—where grandparents, parents, uncles, aunts, and cousins lived under one roof—to shrinking nuclear units, and increasingly, single-person households. While material wealth and career opportunities have reached historical highs, psychological well-being, emotional stability, and social harmony have sharply declined.

The erosion of the traditional family support system has created a void filled by chronic unhappiness, discontent, anxiety, and depression. In the past, when a family member fell ill or faced a crisis, a network of loved ones immediately stepped in to share the burden and provide care. 


Today, individuals face life’s trials in isolation.

* The Loneliness of Aging Parents: 

Consider an elderly couple living in a urban apartment. Their children, earning high packages in distant cities or foreign countries, send monthly transfers but rarely call or visit. Despite financial security, the parents experience profound emotional neglect, spending their golden years with no one to converse with.

* The Vulnerability of Nuclear Units: 

Consider a working couple with a young child. When sickness strikes or professional stress peaks, the lack of an extended family cushion leads to severe burnout, anxiety disorders, and lifestyle diseases. Without elders to offer wisdom or relatives to share daily chores, small conflicts escalate rapidly, contributing to unprecedented rates of marital breakdown.

Emerging Social Irregularities

As material benchmarks take precedence over emotional compatibility and family integration, several social distortions have taken root:


1. Delayed Marriages and the Search for "Ideal" Contracts

In earlier times, marriage was viewed as a union of families aimed at shared growth and mutual adaptation. Today, marriage is frequently approached as a financial transaction or a lifestyle match. Prospective partners evaluate prospective spouses primarily through package comparisons, property assets, and independent living arrangements. The preference for partners isolated from their parents and siblings has eroded the innate capacity to compromise and adjust. 

Consequently, men and women remain unmarried well into their late thirties or forties , struggling to find a partner who meets an ever-expanding checklist of material criteria.

1. The Rise of Transient Relationships

The fear of commitment and diminished tolerance for adjustment have fueled the growth of live-in relationships. While framed as modern flexibility, these arrangements often lack the legal, social, and emotional accountability required for long-term stability. When challenges arise, ending the relationship is often chosen over working through difficulties, reinforcing a culture of disposable bonds. 

Media and contemporary entertainment frequently glorify marital separation, superficial romance, and quick divorces, presenting fleeing from responsibilities as liberation rather than addressing root causes.

1. Substance Addiction Among the Youth

Children raised in hyper-individualistic or emotionally distant environments frequently lack the grounding once provided by grandparents and extended family storytelling. Deprived of emotional warmth and constant supervision, young people increasingly turn to digital addiction, alcohol, and drug abuse as coping mechanisms for underlying anxiety and emptiness. The collective moral anchor of the traditional family unit has been replaced by peer influence and unstructured online consumption.

Restoring Harmony: 

Reclaiming Traditional Family Values

To reverse this trend and protect the social fabric, society must recalibrate its priorities, placing collective well-being and human connection above purely economic metrics.

 * Reevaluating Success Beyond Bank Balances: True wealth lies in emotional security, shared meals, healthy children, and peaceful homes. Society must celebrate emotional intelligence, empathy, and caregiving with the same vigor reserved for professional promotions and property acquisitions.

 * Honoring the Role of the Homemaker: The dedication required to manage a household, raise emotionally resilient children, and nurture aging parents requires immense skill, patience, and emotional maturity. Recognizing homemaking as a foundational pillar of societal stability restores dignity and respect to family life.

 * Fostering a Culture of Adjustment and Forgiveness: Marital stability relies on mutual respect, patience, and a willingness to compromise. Teaching young men and women that flexibility is a strength—not a compromise of self-worth—will rebuild resilient marriages and significantly reduce preventable divorces.

* Reintegrating Elders into Daily Life: Grandparents are not financial burdens; they are custodians of culture, storytellers, and emotional anchors for growing children. Involving elders in household decisions and daily life restores dignity to aging while providing young parents with trusted support.

 * Encouraging Group and Joint Family Structures: Where physical co-residence in joint families is not feasible due to employment, living in close geographical proximity or maintaining active, daily extended family networks can recreate the warmth and safety net of traditional joint families.

Building a stable, fulfilled society requires returning to the understanding that human beings thrive on authentic connection, mutual service, and unconditional love. 

Rebuilding our families is the single most effective step toward healing our communities.

I submit below a poem 

The Tapestry of Sanskar https://share.gemini.google/oLZo4eyXjjFr

In a world that chases the flashing light,

Where shadows dance in the modern night,

We build high towers of glass and stone,

Yet feel so hollow, so lost, alone.

For gold may shimmer and wealth may grow,

But values make the spirit aglow.

The roots of a tree, though hidden deep,

Are the quiet promise the branches keep;

And so are the values, the sacred grace,

That give a human their rightful place.

Sanskar is the compass when storms draw near,

The gentle whisper that banishes fear.

It is the bow of a humble head,

The soft compassion in words we’ve said,

The touch of feet where wisdom lies,

The tear of empathy in our eyes.

It teaches that truth is a timeless shield,

That ego must learn to soften and yield,

That reverence for elders and love for the home

Keep us grounded wherever we roam.

Let us not trade our ancestral roots

For temporary, hollow fruits.

For a house is built with timber and chart,

But a home is sustained by the warmth of the heart.

माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा का महत्त्व

 

Listen or watch on TV Lalit Prabhu Maharaj

यह वीडियो पूज्य संत श्री ललितप्रभ जी द्वारा रायपुर में दिए गए चातुर्मास प्रवचन का है। इसका मुख्य विषय है— 

"घर में सुख, शांति और समृद्धि कैसे बढ़ाएं तथा घर को स्वर्ग कैसे बनाएं"।

वीडियो देखने के लिए लिंक: Listen or watch on TV Lalit Prabhu Maharaj

क्या करें कि घर में सुख शांति समृद्धि बढ़ जाए

वीडियो का प्रमुख सारांश एवं मुख्य बातें

1. लक्ष्मी जी और सेठ की कथा (प्रेम की सबसे बड़ी दौलत) 

महाराज जी एक कथा सुनाते हैं कि एक सेठ के सामने लक्ष्मी जी प्रकट होकर कहती हैं कि 100 साल पूरा होने पर वे घर छोड़कर जा रही हैं, लेकिन जाने से पहले एक वरदान मांग लो।

परिवार के सदस्य धन, सोना-चांदी या मकान मांगने की सलाह देते हैं, लेकिन घर की छोटी बहू सेठ को सलाह देती है कि वे केवल परिवार में एकता और प्रेम मांगें।

सेठ लक्ष्मी जी से मांगता है कि उसके सातों बेटे और बहुएं हमेशा एक साथ रहें और आपस में प्रेम बना रहे।

इस पर लक्ष्मी जी प्रसन्न होकर कहती हैं कि इस वरदान के कारण उन्हें अगले 100 वर्षों तक इसी घर में रुकना पड़ेगा।

1. घर को 'स्वर्ग' बनाने की कुंजी - पारिवारिक प्रेम 

 प्रेम ही वास्तविक धन है: जैसे बिना पैसे का पर्स या बिना पानी की नदी व्यर्थ है, वैसे ही बिना प्रेम का परिवार श्मशान या कब्रिस्तान की तरह है।

कमरों और कब्रों में अंतर: जिस घर में लोग एक छत के नीचे रहकर भी एक-दूसरे से बात नहीं करते, वह घर कमरों का नहीं, बल्कि कब्रों का रूप ले लेता है।

1. वास्तविक स्वर्ग और नरक ⁠

 जिस घर में कई बेटे-बहुओं के होते हुए भी बूढ़े माता-पिता को अकेले और उपेक्षित होकर खाना बनाना पड़े, वह स्थिति नरक के समान है।

 जिस घर में बुजुर्गों को सिर-आंखों पर बिठाया जाता है और सभी मिल-जुलकर एक थाली में खाना खाते हैं, वही स्वर्ग है।

1. माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा का महत्त्व

 पत्नी ईश्वर का दिया उपहार है, लेकिन माता-पिता उपहार में आए हुए साक्षात ईश्वर हैं।

 श्री ललितप्रभ जी बताते हैं कि उन्होंने और उनके भाई श्री चंद्रप्रभु जी ने वैराग्य से अधिक अपने माता-पिता की सेवा के लिए संन्यास (दीक्षा) स्वीकार किया था।

घर के बड़े-बुजुर्ग भले फल न दें, लेकिन वे शीतल छाया ज़रूर देते हैं। उनकी सेवा और आशीर्वाद से ही जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

1. टूटे रिश्तों को जोड़ने की सीख (सकारात्मक सोच) 

 महाराज जी मुंबई-गुवाहाटी के एक दंपति की सच्ची घटना सुनाते हैं, जिनका 9 साल पहले तलाक हो चुका था।

टीवी पर प्रवचन सुनकर और अपनी गलतियों का अहसास करके पति ने अपनी पूर्व पत्नी को फोन कर माफी मांगी। सकारात्मक सोच अपनाने के कारण दोनों फिर से एक हुए और पुनर्विवाहित हुए।

अहंकार (Ego) छोड़कर रिश्तों में मिठास घोलने और माफी मांगने की सीख दी गई है।

1. संस्कारी बहू का प्रेरक उदाहरण 

 एक डॉक्टर बहू की कहानी साझा की गई है, जिसने अपनी अकेली सास का अकेलापन दूर करने के लिए अपनी सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया ताकि वह घर पर सास की सेवा और देखभाल कर सके।

जीवन में उतारने योग्य मुख्य नियम:

1. रोज प्रातःकाल प्रणाम: प्रतिदिन सुबह अपने माता-पिता और बुजुर्गों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।

2. रात में समय दें: सोने से पहले 5–10 मिनट बुजुर्गों के पास बैठें, उनका हाल-चाल पूछें और उनकी सेवा करें।

3. अहंकार छोड़ें: संपत्ति या ज़मीन के छोटे-मोटे टुकड़ों के लिए भाइयों या परिवार में दरार न पड़ने दें; प्रेम को बचाकर रखें।

Here is a thought-provoking and soulful Bhajan in Hindi structured in traditional devotional style.

It directly addresses working couples, reminding them that while financial wealth is important, emotional presence, serving elders, and nurturing their own children with true values are the ultimate treasures of life.


Sunday, August 9, 2026

असम बाढ़ राहत कोष के लिए दान की अपील

 Details of People Affected by the Assam Floods

The monsoon floods in Assam have impacted over 10 lakh (1 million) people across more than 15 districts.  

 Worst-Hit Districts: Sivasagar, Charaideo, Dhemaji, Lakhimpur, Jorhat, Dibrugarh, Majuli, and Tinsukia. Sivasagar and Charaideo alone accounted for hundreds of thousands of displaced residents.  

 Casualties: The death toll reached 85, with several people reported injured or missing during peak inundation waves.  

 Displacement & Damage: Over 330+ villages were submerged, destroying more than 2,200 houses (fully or partially). Tens of thousands of displaced families were forced to take shelter in government-run relief camps, on elevated embankments, or along roadsides.  

 Agricultural & Infrastructure Loss: Over 24,000 hectares of cropland were submerged, and extensive damage was caused to roads, bridges, and power grids, cutting off electricity to more than 60,000 households at peak disruption.  

विभिन्न संगठनों द्वारा प्रदान की गई सेवाएं (Services Extended in Hindi)

1. स्थानीय ग्रामीण एवं स्वयंसेवक (Local Volunteers & Villagers)

 रेस्क्यू ऑपरेशन: बिना किसी सरकारी सहायता के इंतजार किए, स्थानीय युवाओं और मजदूरों ने अपनी देसी नावों (country boats) और बांस के बेड़ों से उफनती नदियों के बीच फंसे बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित निकाला।

 तुरंत भोजन और पानी: जलमग्न इलाकों में कट चुके पड़ोसी परिवारों तक सूखा राशन, मोमबत्तियां और पीने का पानी पहुंचाया।

2. सिख समुदाय एवं गुरुद्वारा समितियां (Sikh Community & Khalsa Aid)

 लंगर सेवा: स्थानीय गुरुद्वारों (जैसे शिवसागर गुरुद्वारा और धुबरी साहिब) तथा 'खालसा एड' ने 24 घंटे निरंतर लंगर चलाकर हजारों बाढ़ पीड़ितों को गरम भोजन कराया।

 आश्रय एवं बिजली सहायता: बिजली गुल होने के दौरान गुरुद्वारों में जनरेटर चलाकर लोगों को मुफ्त मोबाइल चार्जिंग, रोशनी और पीने का पानी उपलब्ध कराया।

 राहत सामग्री: नावों और ट्रैक्टरों के माध्यम से दूर-दराज़ के बाढ़ प्रभावित गांवों में सूखे राशन की किट, तिरपाल (tarpaulins), और पानी साफ करने की गोलियां बांटीं।

3. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) / सेवा भारती (Seva Bharati)

 राहत कार्य: 1,900 से अधिक स्वयंसेवकों ने नावों के ज़रिए 380 से अधिक गांवों के 40,000 से अधिक परिवारों तक सहायता पहुंचाई।

 स्वास्थ्य सेवा: नेशनल मेडिकोस ऑर्गनाइजेशन (NMO) के सहयोग से 50 से अधिक नि:शुल्क चिकित्सा शिविर (Medical Camps) लगाए, जहां जलजनित बीमारियों का इलाज और मुफ्त दवाइयां दी गईं।

 आजीविका पुनरुद्धार: भारतीय किसान संघ के सहयोग से बाढ़ में नष्ट हुई फसलों की भरपाई के लिए किसानों को धान के पौधे (saplings) वितरित किए।

4. सरकारी एजेंसियां एवं रक्षा बल (ASDMA, BRO & Emergency Teams)

 राहत शिविर: असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) और SDRF/NDRF की टीमों ने दर्जनों राहत शिविर (Relief Camps) और सामग्री वितरण केंद्र चलाए.

 वित्तीय सहायता: असम सरकार ने प्रभावित परिवारों को पुनर्वास और तात्कालिक सहायता के लिए सीधे बैंक खातों में सहायता राशि ट्रांसफर की।

 बीआरओ (BRO): बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन के कर्मियों और उनके परिवारों ने स्वेच्छा से धन और आवश्यक राहत सामग्री एकत्र कर पीड़ितों में बांटी।

5. गैर-सरकारी संगठन (NGOs & Civil Society)

 अर्चना बोरठाकुर एजुकेशन ट्रस्ट, प्रियोबंधु और कैरिटास इंडिया: जैसी संस्थाओं ने महिलाओं और बच्चों के लिए सैनिटरी किट, हाइजीन किट, तिरपाल, और बच्चों के लिए अध्ययन सामग्री बांटी।

Appreciation and Gratitude of Rescued Victims

The survivors and rescued residents expressed profound gratitude towards the rescuers and volunteers who stepped up during their most desperate moments:

 Unsung Local Heroes: Villagers in Sivasagar and Charaideo tearfully thanked local boatmen and young volunteers who risked their lives in dark, turbulent currents to rescue families stuck on rooftops and high shelves before official teams could reach them.

 A Lifeline in Dark Hours: Families stranded on roadsides and in makeshift relief camps expressed immense relief for the round-the-clock langar and dry rations provided by Sikh groups and RSS volunteers, noting that without these hot meals and clean drinking water, children and the elderly would have suffered severe malnutrition and illness.

 Gratitude for Medical Camps: Mothers and senior citizens praised the mobile health camps organized by medical volunteers and NGOs, highlighting that timely access to medicines for skin infections and fever saved vulnerable infants during post-flood disease outbreaks.


असम बाढ़ राहत कोष के लिए दान की अपील

"आपकी एक छोटी सी सहायता, किसी का जीवन बचा सकती है"

असम में आई विनाशकारी बाढ़ से लाखों लोग गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं। हजारों परिवार बेघर हो चुके हैं और उनके घर, फसलें तथा जीवन भर की जमा पूंजी जलमग्न हो गई है। इस कठिन समय में प्रभावित लोगों को भोजन, स्वच्छ पानी, दवाइयों और सुरक्षित आश्रय की तत्काल आवश्यकता है।

आपकी ओर से दिया गया योगदान बाढ़ पीड़ितों तक राहत पहुंचाने और उन्हें पुनर्वास में मदद करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

आपके दान का उपयोग कैसे होगा?

 आपातकालीन भोजन व पेयजल: बेघर परिवारों तक सूखा राशन, पका हुआ भोजन और पीने का पानी पहुंचाना।

 चिकित्सा एवं स्वच्छता किट: जलजनित बीमारियों को रोकने के लिए आवश्यक दवाइयां, फर्स्ट-एड किट और सैनिटरी सामग्री।

 अस्थायी आश्रय: प्रभावितों के लिए तिरपाल (tarpaulins), कंबल, मोमबत्तियां और मच्छरदानियां।

 पुनर्वास व सहायता: जलस्तर घटने के बाद घरों की मरम्मत, किसानों को फसल बीज और बच्चों को अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराना।


दान देने के तरीके (How to Donate)

आप निम्नलिखित आधिकारिक और सत्यापित माध्यमों से सीधे योगदान दे सकते हैं:


असम बाढ़ राहत: मदद के लिए आगे आएं! 

असम में आई भीषण बाढ़ से लाखों लोग बेघर हो गए हैं। हजारों परिवार इस वक्त भोजन, स्वच्छ पानी, दवाइयों और सिर छुपाने की जगह के लिए तरस रहे हैं।

आपकी छोटी सी मदद किसी का जीवन बचा सकती है।

आप इस प्रकार सहायता कर सकते हैं:

1. मुख्यमंत्री राहत कोष (CM Relief Fund - Assam)

 Account Name: Chief Minister's Relief Fund, Assam

 Account No: ⁠35969660230⁠

 IFSC Code: ⁠SBIN0010755⁠

 Bank: State Bank of India, Secretariat Branch, Dispur

 PAN (Tax Exemption 80G): ⁠AAATC4667K⁠


2. ऑनलाइन पोर्टल द्वारा दान करें:

cm.assam.gov.in पर जाकर सीधे UPI (GPay/PhonePe/Paytm), नेट बैंकिंग या कार्ड से योगदान दें।


हमारा लक्ष्य:

 बेघर परिवारों तक पका हुआ भोजन व राशन पहुंचाना

 बच्चों व महिलाओं के लिए चिकित्सा व स्वच्छता किट देना

 जलभराव वाले क्षेत्रों में साफ पीने का पानी और तिरपाल प्रदान करना


कृपया इस संदेश को अपने मित्रों और ग्रुप्स में शेयर करें। आपका एक शेयर भी राहत कार्य में बहुत बड़ा योगदान दे सकता है! 🙏


(सुरक्षा नोट: दान केवल आधिकारिक और सत्यापित बैंक विवरण या क्यूआर कोड के माध्यम से ही करें।)


सहायता का हाथ बढ़ाएं

राशि छोटी हो या बड़ी, आपका हर योगदान बाढ़ पीड़ितों के लिए उम्मीद की एक नई किरण है। यदि आप वित्तीय योगदान करने में असमर्थ हैं, तो इस संदेश को अपने मित्रों और परिवार के साथ साझा करके भी राहत प्रयासों में मदद कर सकते हैं।

Saturday, August 8, 2026

बुजुर्गों के लिए सूखे मेवों और बीजों के सही उपयोग

नमस्ते। 70 वर्ष के बुजुर्गों के लिए सूखे मेवों और बीजों के सही उपयोग पर आधारित संदेश नीचे दिया गया है:

70 वर्ष के बुजुर्गों के लिए सर्वोत्तम नुस्खा और सावधानियां

1. सबसे बेहतरीन और सुरक्षित रेसिपी

सामग्री (प्रति व्यक्ति):

 * बादाम (Badam): 4 से 5 (रातभर भिगोए हुए और छिले हुए)

 * अखरोट (Akhrot): 1 से 2 टुकड़े (रातभर भिगोए हुए)

 * कद्दू के बीज (Pumpkin Seeds): 1 छोटा चम्मच (रातभर भिगोए हुए)

 * अलसी या चिया बीज (Flax/Chia Seeds): 1 छोटा चम्मच (रातभर भिगोए हुए)

 * छोटी इलायची पाउडर (Elaichi): 1 चुटकी (पाचन के लिए)

 * तरल आधार: 150-200 मिलीलीटर हल्का गुनगुना पानी या हल्का उबला हुआ गाय का दूध

बनाने की विधि:

 * रात को बादाम, अखरोट, कद्दू के बीज और अलसी/चिया बीज को पानी में भिगो दें।

 * सुबह पानी फेंक दें और बादाम का छिलका उतार लें।

 * इन सभी को 150-200 मिलीलीटर गुनगुने पानी या दूध और एक चुटकी इलायची पाउडर के साथ मिक्सर में बिल्कुल बारीक पीस लें ताकि कोई मोटा टुकड़ा न रहे।

2. इस नुस्खे के फायदे (Benefits)

 * मस्तिष्क और याददाश्त: बादाम और अखरोट में मौजूद ओमेगा-3 दिमाग को सक्रिय रखने में मदद करते हैं।

 * जोड़ों और हड्डियों का स्वास्थ्य: कद्दू के बीजों में मौजूद मैग्नीशियम और जिंक हड्डियों और जोड़ों की मजबूती के लिए फायदेमंद हैं।

 * पाचन में आसानी: बीजों और मेवों को भिगोने से उनकी तासीर सामान्य हो जाती है और वे पचने में आसान हो जाते हैं।

 * हृदय स्वास्थ्य: स्वस्थ वसा (Healthy Fats) कोलेस्ट्रॉल को संतुलित रखने और हृदय को स्वस्थ रखने में सहायक हैं।

3. संभावित जोखिम (Risks)

 * भारीपन या गैस: बिना भिगोए या अधिक मात्रा में सेवन करने से पेट में भारीपन, गैस या अपच हो सकती है।

 * गले में अटकना: यदि बीजों को ठीक से न पीसा जाए, तो बुजुर्गों के गले या भोजन नली में खिंचाव आ सकता है।

4. सेवन का सही समय: भोजन से पहले या बाद?

 * सर्वोत्तम समय (Best Time): सुबह का नाश्ता करने के 1 to 1.5 घंटे बाद (लगभग 10:00 AM से 11:00 AM के बीच)।

 * कारण: खाली पेट बहुत गाढ़ा या भारी शेक पीने से एसिडिटी या पेट में भारीपन हो सकता है। नाश्ते के बाद जब पाचन क्रिया सक्रिय होती है, तब इसका सेवन करना सबसे अच्छा और पचने में आसान रहता है।

 * विकल्प: आप इसे शाम को चाय के समय (5:00 PM) भी ले सकते हैं।

5. 70 वर्ष के बुजुर्गों के लिए विशेष सावधानियां (Precautions)

 * काजू और मूंगफली से बचें: काजू और मूंगफली पचने में भारी होते हैं और यूरिक एसिड बढ़ा सकते हैं, इसलिए इन्हें इस मिश्रण में न मिलाएं।

 * छिलका जरूर उतारें: बादाम का छिलका हटाना जरूरी है, क्योंकि छिलका पचने में कठिनाई पैदा करता है।

 * चीनी या खजूर का प्रयोग सीमित रखें: यदि शुगर (डायबिटीज) की समस्या है, तो इसमें चीनी, खजूर या अंजीर न मिलाएं।

 * मात्रा पर नियंत्रण रखें: मेवों की मात्रा सीमित रखें (जैसे 4-5 बादाम और 1 अखरोट), अधिक मात्रा से पाचन बिगड़ सकता है।

 * बारीक पीसना अनिवार्य है: निगलने में आसानी के लिए मिश्रण पूरी तरह चिकना और बारीक होना चाहिए।

(नोट: यदि किसी व्यक्ति को गुर्दे की बीमारी (Kidney Disease), उच्च यूरिक एसिड या गंभीर पाचन संबंधी समस्या है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही मात्रा तय करें।)


बुजुर्गों के लिए सुबह के सर्वोत्तम और सुरक्षित पेय (Healthy Morning Drinks for Seniors)

1. सौंफ और अजवाइन का पानी (Saunf-Ajwain Water)

 किसके लिए फायदेमंद: पेट की गैस, भारीपन, अपच और खट्टी डकारों से राहत दिलाने में।

 बनाने का तरीका: रात को आधा चम्मच सौंफ और आधा चम्मच अजवाइन 1 गिलास पानी में भिगो दें। सुबह इसे छानकर हल्का गुनगुना करके पिएं।

 विशेषता: यह पेट को ठंडा और शांत रखता है तथा पाचन अग्नि को सुचारू करता है।

2. जीरा और धनिया का पानी (Jeera-Dhania Water)

 किसके लिए फायदेमंद: पाचन क्रिया में सुधार, बीपी नियंत्रण और शरीर की अंदरूनी सफाई (Detox) के लिए।

 बनाने का तरीका: आधा चम्मच जीरा और आधा चम्मच साबुत धनिया रातभर 1 गिलास पानी में भिगोएं। सुबह छानकर सामान्य तापमान (Room Temperature) पर पिएं।

 विशेषता: यह बहुत ही हल्का होता है और पेट की जलन को दूर करता है।

3. हल्दी और काली मिर्च का गुनगुना पानी (Turmeric & Black Pepper Water)

 किसके लिए फायदेमंद: जोड़ों के दर्द, गठिया (Arthritis) और शरीर की सूजन कम करने के लिए।

 बनाने का तरीका: 1 गिलास हल्के गुनगुने पानी में एक चौथाई (\bm{\frac{1}{4}}) चम्मच शुद्ध हल्दी और एक चुटकी ताजी पिसी काली मिर्च मिलाएं।

 विशेषता: काली मिर्च हल्दी के असर (Curcumin) को शरीर में तेजी से अवशोषित होने में मदद करती है।

4. हल्का नींबू और सेंधा नमक का पानी (Warm Lemon & Rock Salt Water)

 किसके लिए फायदेमंद: कब्ज से राहत, शरीर को हाइड्रेट रखने और सुबह पेट साफ करने के लिए।

 बनाने का तरीका: 1 गिलास गुनगुने पानी में आधा नींबू निचोड़ें और एक चुटकी सेंधा नमक (Saindhava Lavana) मिलाएं।

 विशेषता: यह आंतों की सफाई में मदद करता है।

(नोट: यदि हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो तो नमक न मिलाएं।)

5. चने का सत्तू का पानी (Chana Sattu Drink)

 किसके लिए फायदेमंद: मांसपेशियों की मजबूती, प्राकृतिक प्रोटीन और दिनभर ऊर्जा बनाए रखने के लिए।

 बनाने का तरीका: 1 गिलास सामान्य पानी में 1 से 2 चम्मच भुने चने का सत्तू, चुटकी भर भुना जीरा पाउडर और चुटकी भर सेंधा नमक मिलाकर अच्छी तरह घोल लें।

 विशेषता: यह सुपाच्य प्रोटीन का बहुत अच्छा स्रोत है जो शुगर को अचानक नहीं बढ़ाता।

6. ताज़ा लौकी या खीरे का रस (Fresh Lauki or Cucumber Juice)

 किसके लिए फायदेमंद: हृदय स्वास्थ्य, एसिडिटी कम करने और शरीर को ठंडक देने के लिए।

 बनाने का तरीका: लौकी या खीरे को थोड़ा पानी और पुदीने की पत्तियों के साथ पीसकर अच्छी तरह छान लें।

 सावधानी: लौकी का जूस बनाने से पहले उसे चखकर देख लें। यदि लौकी कड़वी हो, तो उसका प्रयोग बिल्कुल न करें।

सेवन के लिए मुख्य निर्देश:

1. समय: इन पेयों को सुबह उठकर बैठने की स्थिति में धीरे-धीरे (घूंट-घूंट करके) पिएं। ठोस नाश्ता करने से 20-30 मिनट पहले लेना सबसे उपयुक्त रहता है।

2. तापमान: बुजुर्गों को बहुत ठंडा या बर्फ का पानी नहीं पीना चाहिए। पेय हमेशा गुनगुना या सामान्य तापमान पर होना चाहिए।

Friday, August 7, 2026

WhatsApp Message and Social Sites Uses

Majority of whatsapp members and group members share and forward flowers, good morning messages and pictures of various God and Godess. There is nothing bad in it. It gives us divine message.


A few send informative and motivating messages but ninety percent of members do not read them and simply forward to others. 


This is why ill minded devil persons have started making fake false and deep fake videos which immediately reaches in the hands of lacs of people. 


News containing negative messages run with accelerating speed whereas positive information laden messages has almost no movement and no followers. 


India has become victim of fake messages and rumours several times in this age of social sites and this has become a powerful bomb stronger than atom bomb. 


We have therefore to understand ground realities and do what is good for us , for our families , for our society and for our country.


ज़्यादातर WhatsApp और ग्रुप मेंबर्स फूल, 'गुड मॉर्निंगमैसेज और देवी-देवताओं की तस्वीरें 

शेयर और फ़ॉरवर्ड करते हैं। इसमें कुछ भी बुरा नहीं है। यह हमें ईश्वरीय संदेश देता है।


कुछ लोग जानकारी देने वाले और मोटिवेट करने वाले मैसेज भी भेजते हैंलेकिन 90% मेंबर्स उन्हें पढ़ते नहीं हैं और बस दूसरों को फ़ॉरवर्ड कर देते हैं। 


इसीलिए बुरे इरादे वाले लोगों ने फ़ेक और डीप-फ़ेक वीडियो बनाना शुरू कर दिया हैजो तुरंत लाखों लोगों तक पहुँच जाते हैं। नेगेटिव मैसेज वाली खबरें तेज़ी से फैलती हैंजबकि अच्छी जानकारी वाले मैसेज  के बराबर आगे बढ़ते हैं और उन्हें ज़्यादा लोग नहीं देखते। 


भारत कई बार फ़ेक मैसेज और अफ़वाहों का शिकार हो चुका है और सोशल मीडिया के इस दौर में यह एटम बम से भी ज़्यादा खतरनाक हथियार बन गया है।


इसलिएहमें ज़मीनी हकीकत को समझना होगा और वही करना होगा जो हमारेहमारे परिवारसमाज और देशके लिए अच्छा हो।

Let us pledge to stop spreading negativity and start sharing only knowledge and positivity laden informations.

आइए, हम नकारात्मकता फैलाने से बचने और केवल ज्ञान व सकारात्मकता से भरी जानकारी साझा करने का संकल्प लें।

Stop Forwarding, Start Verifying: Let’s Clean Up Our Digital Space! 📱⚡

Did you know that nearly 90% of messages are forwarded without being read or verified?


Every time we blindly share viral videos, sensational claims, or deepfake content, we are not just sharing a message—we are spreading digital pollution. Fake news and manipulated videos move faster than the truth because they trigger anger and panic. Unchecked rumors pose a direct threat to our families, our peace, and our nation.


Your 3-Step Digital Safety Pledge:

  • Pause Before You Press: Ask yourself—Is this verified? Is this helpful?
  • Check the Source: Do not trust sensational videos or unverified voice notes. Verify facts using established news outlets before believing them.
  • Break the Chain: Stop forwarding unread messages. Be the filter that stops rumors, not the amplifier that spreads them.

Your thumb holds real power. Use it to protect your community, not mislead it.

Forward Truth, Not Rumors. 🇮🇳


फॉरवर्ड करने से पहले सोचें: आइए अपने डिजिटल स्पेस को सुरक्षित बनाएं! 📱⚡

क्या आप जानते हैं कि व्हाट्सएप पर भेजे जाने वाले लगभग 90% मैसेज लोग बिना पढ़े और बिना जांचे ही आगे बढ़ा देते हैं?


जब हम बिना सोचे-समझे भड़काऊ वीडियोफर्जी खबरें या 'डीपफेककंटेंट शेयर करते हैंतो हम केवल एक मैसेज नहीं भेज रहे होतेहम समाज में डिजिटल प्रदूषण फैला रहे होते हैं। 


झूठी खबरें और अफवाहें सच से भी तेजी से फैलती हैं क्योंकि वे डर और गुस्से को भड़काती हैं। बिना जांच की गई अफवाहें हमारे परिवारसमाज और देश की सुरक्षा के लिए खतरा हैं।


एक जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए 3 संकल्प:

  • रुकें और सोचें: फॉरवर्ड बटन दबाने से पहले खुद से पूछेंक्या यह खबर सच हैक्या इसे आगे भेजना देशया समाज के हित में है?

  • सच्चाई की जांच करें: बिना किसी विश्वसनीय स्रोत के भड़काऊ मैसेज या वीडियो पर भरोसा  करें। पहले सही माध्यमों से पुष्टि करें।

  • भ्रम की कड़ी तोड़ें: बिना पढ़े और बिना जांचे मैसेज आगे भेजना बंद करें। अफवाहों को रोकने का माध्यम बनेंउन्हें फैलाने का नहीं।

आपकी एक उंगली में बहुत ताकत है। इसका उपयोग जागरूकता फैलाने के लिए करेंभ्रम फैलाने के लिए नहीं।

सच्चाई को आगे बढ़ाएं, अफवाहों को नहीं। 🇮🇳


 
चाहे हम परिवार में होंशादी-ब्याह मेंहोटल में या किसी दावत मेंजब हमें कुछ खाना होता हैतो हम सैकड़ों तरह के खाने में से वही चुनते हैं जो हमारी सेहत के लिए अच्छा हो। हम जैसा खाते हैंवैसे ही बन जाते हैंअगर हम सिर्फ़ हेल्दी खाना खाएंतो हमारा शरीर भी फिट रहता है।


इसी तरहहमारा दिमाग़ अलग-अलग जगहों से जानकारी लेता है और उसी से हमारी किस्मत बनती है। हमें अलग-अलग लोगों और बाहरी स्रोतों से कई तरह की जानकारी मिलती है। 


हम जो पढ़तेसुनते और देखते हैंवह हमारे दिमाग़ में गहराई तक बैठ जाता है और हमारी सोच को आकार देता है। अगर हम अच्छी जानकारी चुनेंतो यह हमारे दिमाग़ को मज़बूत बनाती है। वहींबुरी जानकारी एक बार पढ़नेसुनने या देखने पर दिमाग़ में गहराई तक चली जाती है और हमारी ज़िंदगी खराब कर सकती है।


जब हमें सोशल मीडिया पर कोई मैसेज या वीडियो मिलता हैतो वह तुरंत हमारे दिमाग़ को संकेत देता है कि कंटेंट अच्छा है या बुरा। हमें बुरे मैसेज तुरंत डिलीट कर देने चाहिए और उन्हें देखने या पढ़ने का जोखिम कभी नहीं उठाना चाहिए। क्योंकि एक बार बुरा मैसेज देख या पढ़ लेने पर उसे दिमाग़ से मिटाना मुश्किल होता है। 


इसलिएबुरे मैसेज को बिना पढ़े या देखे तुरंत डिलीट करने की आदत डालें।


स्वस्थ शरीर के लिए स्वस्थ दिमाग़ ज़रूरी है।

सिर्फ़ स्वस्थ शरीर ही अच्छा काम कर सकता है।


एक पुरानी कहावत है, 

"जब धन खोता है तो कुछ नहीं खोता; जब सेहत खोती है तो कुछ खोता है; लेकिन जब चरित्र खोता है तो विनाश निश्चित है "


If we have to eat something in our family or in marriage ceremony or in hotel or in any feast, we select food out of hundreds of available varieties only those which are healthy for us. What we eat we become and our food makes our body fit into if we consume only healthy food.


Similarly mind gets information from various sources and it creates our destiny. We receive various information from various people and other outside sources. 


What we read, listen and watch they goes deep into our mind and they are creator of our thought process and ultimately these information empowers our mind if we choose only good information. Bad information once read or listened or watch go deep into our mind and can spoil our life.


When we receive any message or video on our society platform , they immediately send signals to our mind whether the content is good or bad. We must delete bad messages immediately and should never take the risk of tasting it. Because once bad messages immediately is consumed they cannot be erased from our mind. 


Therefore inculcate a habit of deleting bad message immediately without reading or watching them.


Mind is the key to healthy body.


Only healthy body can perform well.


There is an old proverb, 

When wealth is lost, nothing is lost; when health is lost, something is lost; when character is lost”.