Saturday, August 29, 2026

Tips For Healthy Body



विश्व के शीर्ष 10 सबसे अधिक आबादी वाले देश: 

औसत उम्र (Median Age) और जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy)

जनसांख्यिकी (Demographics) में दो आंकड़े     महत्वपूर्ण होते हैं:

औसत आयु (Median Age): देश की मौजूदा आबादी की उम्र (आधी आबादी इससे छोटी और आधी बड़ीहोती है)।
जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy): एक नवजात शिशु के औसतन कितने वर्ष जीवित रहने की उम्मीदहै।

भारत (India) — आबादी: ~1.48 अरब | औसत उम्र: 29.2 वर्ष | जीवन प्रत्याशा: ~72.0 वर्ष

चीन (China) — आबादी: ~1.41 अरब | औसत उम्र: 40.6 वर्ष | जीवन प्रत्याशा: ~78.2 वर्ष

अमेरिका (USA) — आबादी: ~34.9 करोड़ | औसत उम्र: 38.7 वर्ष | जीवन प्रत्याशा: ~79.3 वर्ष

इंडोनेशिया (Indonesia) — आबादी: ~28.8 करोड़ | औसत उम्र: 30.7 वर्ष | जीवन प्रत्याशा: ~71.8 वर्ष

पाकिस्तान (Pakistan) — आबादी: ~25.9 करोड़ | औसत उम्र: 20.8 वर्ष | जीवन प्रत्याशा: ~66.4 वर्ष

नाइजीरिया (Nigeria) — आबादी: ~24.2 करोड़ | औसत उम्र: 18.3 वर्ष | जीवन प्रत्याशा: ~54.0 वर्ष

ब्राजील (Brazil) — आबादी: ~21.4 करोड़ | औसत उम्र: 35.3 वर्ष | जीवन प्रत्याशा: ~76.2 वर्ष

बांग्लादेश (Bangladesh) — आबादी: ~17.8 करोड़ | औसत उम्र: 26.3 वर्ष | जीवन प्रत्याशा: ~74.3 वर्ष

रूस (Russia) — आबादी: ~14.3 करोड़ | औसत उम्र: 40.7 वर्ष | जीवन प्रत्याशा: ~73.4 वर्ष

इथियोपिया (Ethiopia) — आबादी: ~13.9 करोड़ | औसत उम्र: 19.3 वर्ष | जीवन प्रत्याशा: ~66.5 वर्ष

जीवन प्रत्याशा तय करने वाले तीन मुख्य बुनियादी कारक

शिशु एवं बाल मृत्यु दर (Child & Infant Mortality): जिन देशों (जैसे नाइजीरिया) में 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में मृत्यु दर अधिक होती है, वहां राष्ट्रीय औसत आयु तेजी से नीचे गिर जाती है।

स्वच्छ जल, स्वच्छता और टीकाकरण: संक्रामक और जलजनित बीमारियों की रोकथाम से शुरुआती उम्र में होने वाली मौतों   पर रोक लगती है।

स्वास्थ्य सुविधाएं और जीवनशैली जनित रोग (NCDs): कैंसर, हृदय रोग और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों के समय पर इलाज और रोकथाम से वयस्कों की उम्र बढ़ती है।

भारतीयों की उम्र 70+ कैसे पहुंची और जापानी लोग 84+ वर्ष क्यों जीते हैं?

1. भारत में जीवन प्रत्याशा 70+ तक कैसे पहुंची?

1950 के दशक में भारत की जीवन प्रत्याशा केवल ~37 वर्ष थी।
व्यापक टीकाकरण अभियानों, संस्थागत प्रसव (अस्पतालों में डिलीवरी), एंटीबायोटिक्स की सुलभता और स्वच्छता अभियानों के कारण बाल मृत्यु दर और संक्रामक रोगों (चेचक, पोलियो, हैजा) में भारी कमी आई, जिससे औसत आयु 72 वर्ष तक पहुंच गई।

2. जापानी लोग 84+ वर्ष तक सक्रिय और स्वस्थ क्यों जीते हैं?

दैनिक शारीरिक सक्रियता: जापान में बुजुर्ग कभी अचानक "आराम" की स्थिति में नहीं जाते। वे सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करते हैं,     सीढ़ियां चढ़ते हैं, गार्डनिंग करते हैं और रोज़ाना    पैदल चलते हैं।

संतुलित आहार:  पारंपरिक जापानी आहार में हरी सब्जियां, फर्मेंटेड फूड (जैसे मिसो), समुद्री भोजन(ओमेगा-3) शामिल हैं और वे पेट का 80% भरने पर खाना रोक देते हैं (हरा हाची बु नियम)।

निवारक स्वास्थ्य जांच (Preventive Healthcare): वहां 40 वर्ष के बाद सरकार की तरफ से नियमित मेटाबॉलिक जांच अनिवार्य स्तर पर की जाती है।

3. भारत और कुछ अन्य देशों में बीमारियां क्यों बढ़ रही हैं और शारीरिक गतिविधि क्यों जरूरी है?

शारीरिक श्रम में कमी बनाम भारी आहार: पहले भारी और वसायुक्त खाना खेत के कड़े श्रम को ऊर्जा देताथा।

आज डेस्क जॉब और गतिहीन (Sedentary) जीवनशैली के कारण वही कैलोरी फैट में बदलकर डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और दिल के दौरों का कारण बन रही है।

मांसपेशियों का नुकसान (Sarcopenia): केवल टहलना काफी नहीं है। जब तक शरीर पर हल्का वजनया रेजिस्टेंस नहीं पड़ता, मांसपेशियां कमजोर होती जाती हैं।

"Use it or lose it" का नियम: शरीर के जिस अंग या जोड़ का उपयोग बंद कर दिया जाता है, वह धीरे-धीरे काम करना छोड़ देता है। बुढ़ापे में लंबे समय तक बिना सहारे के चलने के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, संतुलित प्रोटीन, विटामिन D और दैनिक सक्रियता अनिवार्य है।

नीचे कुछ टिप्स प्रस्तुत कर रहे है इनका पालन का आप स्वस्थ रह सकते है 

नियमित स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें: हफ्ते में 2–3 बार हल्का वजन उठाना, रेजिस्टेंस बैंड का उपयोग या बॉडीवेट एक्सरसाइज (जैसे उठक-बैठक) करें, जिससे उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों का क्षय (सार्कोपेनिया) रुकेऔर हड्डियां मजबूत रहें।

रोजाना पर्याप्त प्रोटीन लें: शरीर के वजन के अनुसार प्रति किलोग्राम लगभग 0.8 से 1.2 ग्राम प्रोटीन लें।इसके लिए दालें, चना, पनीर, दूध, दही, सोयाबीन  को दैनिक आहार में शामिल करें।

लगातार बैठने की आदत तोड़ें: हर 45–60 मिनट में उठकर थोड़ा चलें। रोजाना 7,000 से 10,000 कदमचलने का लक्ष्य रखें या हफ्ते में कम से कम 150 मिनट मध्यम एरोबिक गतिविधि करें।

विटामिन D और धूप का ध्यान रखें: सुबह 15–20 मिनट धूप में समय बिताएं और जरूरत पड़ने पर जांचकरवाएं, ताकि हड्डियों के लिए कैल्शियम का अवशोषण ठीक से हो सके।

80% पेट भरने का नियम (हारा हाची बु): पेट को पूरा ठूंसने के बजाय 80% भरते ही खाना बंद कर दें, जिससे मेटाबॉलिज्म सही रहे और पेट के आसपास की चर्बी न बढ़े।

रिफाइंड चीनी और प्रोसेस्ड खाने से बचें: पैकेज्ड स्नैक्स, मीठे ड्रिंक्स और ज्यादा रिफाइंड तेल का सेवन कमकरें; इनकी जगह साबुत अनाज, फल, हरी सब्जियां और मेवे खाएं।

7–8 घंटे की पूरी नींद लें: एक निश्चित समय पर सोने और उठने का नियम बनाएं, जिससे शरीर की कोशिकाओं की मरम्मत हो और रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बनी रहे।

पर्याप्त पानी पिएं: दिनभर में 2.5 से 3.5 लीटर पानी जरूर पिएं। मीठे पेय और अत्यधिक कैफीन से बचें।

जोड़ों के लचीलेपन और संतुलन पर ध्यान दें: रोजाना हल्का स्ट्रेचिंग, योग या एक पैर पर खड़े होकर संतुलन बनाने का अभ्यास करें, ताकि उम्र बढ़ने पर जोड़ों में जकड़न न आए और गिरने का खतरा कम हो।

सालाना प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप कराएं: 30–35 की उम्र के बाद साल में एक बार ब्लड प्रेशर, शुगर(HbA1c), लिपिड प्रोफाइल और बुनियादी टेस्ट जरूर करवाएं ताकि बीमारियों का शुरुआती दौर में ही पताचल सके।

Include regular strength training: 
Lift light weights, use resistance bands, or do bodyweight exercises (like squats and push-ups) 2–3 times a week to prevent age-related muscle loss (sarcopenia) and preserve bone density.

Hit daily protein targets: Consume roughly 0.8–1.2 grams of protein per kilogram of body weight each day through lentils, beans, dairy, eggs, paneer, tofu, or lean meats to support muscle repair.

Prioritize daily movement over just sitting: Break up long periods of sitting every 45–60 minutes. Aim for 7,000–10,000 steps daily or 150 minutes of moderate aerobic activity per week.

Optimize Vitamin D and sunlight exposure: Get 15–20 minutes of direct morning sunlight or test your Vitamin D levels regularly to ensure adequate calcium absorption and bone health.

Adopt the 80% fullness rule (Hara Hachi Bu): Stop eating when you feel about 80% full rather than stuffed to maintain a healthy metabolism and avoid excessive visceral fat accumulation.

Cut refined sugars and ultra-processed foods: Minimize packaged snacks, sugary beverages, and excess refined oils, replacing them with whole grains, seeds, nuts, and fiber-rich vegetables.

Protect 7–8 hours of quality sleep: Maintain a consistent sleep schedule to support immune function, regulate hunger hormones (ghrelin and leptin), and allow cellular repair.

Stay hydrated with water first: Drink 2.5–3.5 liters of water daily depending on activity level, limiting calorie-dense sodas, high-sugar juices, and excess caffeine.

Practice joint mobility and balance daily: Incorporate basic stretching, yoga, or single-leg balance drills to maintain joint lubricity, flexibility, and fall prevention as you age.

Schedule annual preventive health check-ups: Monitor blood pressure, fasting blood glucose, lipid profile, and HbA1c annually after age 30 to catch and manage metabolic issues early.

जापानी संस्कृति में जीवन शैली, स्वास्थ्य, आपसी सहयोग और एक-दूसरे के प्रति सम्मान से जुड़ी प्रमुख आदतें और सिद्धांत:

1. ओ-सोजी (O-Souji) — स्वच्छता और श्रम का सम्मान

 प्राथमिक विद्यालय से ही बच्चे रोज़ाना शिक्षकों के साथ मिलकर अपनी कक्षा, गलियारे और शौचालय की सफाई करते हैं।

 प्रभाव: कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं समझा जाता। इससे बच्चों में विनम्रता, सार्वजनिक संपत्ति की जिम्मेदारी और सफाईकर्मियों के प्रति गहरा सम्मान पैदा होता है।

2. हारा हाची बु (Hara Hachi Bu) — 80% पेट भरने का नियम

 ओकिनावा का यह पारंपरिक नियम सिखाता है कि पेट को पूरी तरह भरने के बजाय 80% भरते ही खाना बंद कर देना चाहिए।
प्रभाव: पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता, मोटापा नियंत्रित रहता है और जीवन लंबा व स्वस्थ बनता है।

3. रेडियो तैसो (Rajio Taiso) — सामूहिक सुबह का व्यायाम
पूरे जापान में सुबह रेडियो पर 3 मिनट का एक सरल स्ट्रेचिंग व्यायाम प्रसारित होता है, जिसे स्कूलों, दफ्तरों, निर्माण स्थलों और पार्कों में सब मिलकर करते हैं।
प्रभाव: जोड़ों का लचीलापन और रक्त संचार बना रहता है, साथ ही समाज में एकजुटता की भावना बढ़ती है।

4. मेईवाकु ओ काकेनाई (Meiwaku o Kakenai) — दूसरों को असुविधा न पहुंचाना

 यह सामाजिक नियम सिखाता है कि ऐसा कोई काम न करें जिससे दूसरों को परेशानी हो—जैसे मेट्रो में फोन पर बात न करना, ईयरफोन के बिना संगीत न बजाना और रास्ता न रोकना।

 प्रभाव: सार्वजनिक स्थानों पर शांति, सुरक्षा और एक-दूसरे के प्रति संवेदनशीलता बनी रहती है।

5. मोत्ताइनाई (Mottainai) — संसाधनों का आदर और बर्बादी से बचाव

 भोजन, पानी या किसी भी वस्तु को व्यर्थ करने पर आत्मग्लानि और उसके प्रति आदर की भावना। इसी से किंतसुगी (टूटे बर्तनों को सोने से जोड़कर नया रूप देना) जैसी कलाएं जन्मी हैं।

 प्रभाव: पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और सीमित संसाधनों के सही उपयोग की आदत विकसित होती है।

6. ओजिगी (Ojigi) — झुककर सम्मान प्रकट करना

 मिलने पर, धन्यवाद देते समय या माफी मांगते समय हाथ मिलाने के बजाय झुककर अभिवादन करने की परंपरा।

 प्रभाव: विनम्रता बनी रहती है और आपसी बातचीत में अहंकार व तनाव दूर होता है।

7. मोआई (Moai) — जीवनभर का सामाजिक सहारा समूह

 ओकिनावा में 5-6 लोगों का एक ऐसा समूह बनता है जो जीवनभर एक-दूसरे की भावनात्मक, सामाजिक और कभी-कभी आर्थिक मदद करता है।

 प्रभाव: बुजुर्गों में अकेलापन और मानसिक तनाव खत्म होता है, जिससे वे 80-90 की उम्र में भी मानसिक रूप से सक्रिय रहते हैं।

8. पैदल चलने और सार्वजनिक परिवहन की संस्कृति

 रोज़मर्रा के कामों, बाज़ार जाने और ऑफिस पहुंचने के लिए निजी गाड़ियों की जगह मेट्रो, बस, साइकिल और पैदल चलने को प्राथमिकता दी जाती है।

 प्रभाव: अलग से जिम जाए बिना भी शरीर में रोज़ाना पर्याप्त एरोबिक गतिविधि अपने आप हो जाती है।

Reality of Bank Write off

बैंक पेंशनर्स और कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण संदेश

विषय: सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की स्थिति, एनपीए और वित्तीय अनियमितताओं के संदर्भ में सही तथ्य

आर्थिक भगोड़ों और प्रमुख डिफ़ॉल्टर्स 

भारतीय बैंकों से धोखाधड़ी और गबन कर विदेश भागने या कार्रवाई का सामना करने वाले प्रमुख मामलों के सही नाम:

  1. विजय माल्या (किंगफिशर एयरलाइंस)
  2. नीरव मोदी (पीएनबी धोखाधड़ी)
  3. मेहुल चोकसी (गीतांजलि जेम्स)
  4. निशाल मोदी
  5. जतिन मेहता (विनसम डायमंड्स)
  6. नितिन जयंतीलाल संदेसरा (स्टर्लिंग बायोटेक)
  7. चेतन जयंतीलाल संदेसरा (स्टर्लिंग बायोटेक)
  8. दीप्ति संदेसरा
  9. आशीष जोबनपुत्र (एबीसी कॉटस्पिन)
  10. सन्नी कालरा
  11. संजय कालरा
  12. वर्षा कालरा
  13. सुधीर कालरा
  14. आरती कालरा
  15. विनय मित्तल
  16. राजीव गोयल
  17. अलका गोयल
  18. हितेश नरेंद्रभाई पटेल
  19. मयूरीबेन पटेल
  20. आशीष सुरेशभाई


वित्तीय राशि और लोन का वास्तविक विश्लेषण


  • राशि का तथ्य: इन प्रमुख भगोड़ों से जुड़े मामलों की कुल राशि लगभग ₹40,0000 करोड़ से₹60,0000करोड़ के दायरे में दर्ज की गई है।
  • लोन की समय-सीमा: 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद आक्रामक लोन वितरण (Aggressive Lending) के दौर में कई बड़े कर्जों की नींव पड़ी। 2014 के बाद भी कई लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) और लोन नवीनीकरण जारी रहेजो 2017–2018 में जांच के दौरान पूरी तरह उजागर हुए।
  • राजनीतिक संलग्नता: बैंक धोखाधड़ी के मामलों में शामिल लोग आर्थिक अपराधी हैं। इन मामलों की जांचकेंद्रीय जांच एजेंसियों (CBI, ED, SFIO) द्वारा कानून के तहत की जा रही है।


सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सुधार और वर्तमान स्थिति

  • सख्त ऑडिट और एनपीए प्रकटीकरण: वर्ष 2015 में आरबीआई द्वारा शुरू किए गए एसेट क्वालिटी रिव्यू (AQR) के माध्यम से बैंकों की बैलेंस शीट को साफ करने की प्रक्रिया शुरू हुईजिससे छिपे हुए गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) के आंकड़े खुलकर सामने आए।
  • कड़े कानूनी कदम: आर्थिक अपराधियों की संपत्तियों को तेजी से जब्त करने के लिए फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट (FEOA), 2018 और फंसे हुए कर्जों के समाधान हेतु इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC), 2016 लागू किया गया।
  • पुनर्पूंजीकरण और रिकवरी: सरकार द्वारा बैंकों में ₹3 लाख करोड़ से अधिक की नई पूंजी(Recapitalization) डाली गई। साथ हीजब्त संपत्तियों की नीलामी से हजारों करोड़ रुपये बैंकों को वापस दिलाए गए।
  • वर्तमान स्थिति: आज सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ऐतिहासिक रूप से मजबूत हैं। अधिकांश बैंकों का शुद्ध एनपीए (Net NPA) 1% के स्तर के आसपास या उससे नीचे  चुका है और बैंक रिकॉर्ड लाभ दर्ज कर रहेहैं।


बैंक कर्मियों और पेंशनरों का योगदान:

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) को संकट से उबारने और राष्ट्र निर्माण में बैंक कर्मियों  पेंशनरों का योगदान अतुलनीय रहा है। राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों की साख बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि हम केवल प्रमाणित और आधिकारिक तथ्यों पर ही विश्वास करें। 


I am submitting below an article Written By Sri JN Shukla and collected from WhatsApp 

न त्वहं कामये राज्यं  न स्वर्गं नापुनर्भवम्। 

कामये दुःखतप्तानां प्रणिनामार्तिनाशनम्।।

DON'T BE VICTIM OF

VICIOUS PROPAGANDA

DO FACT CHECK-YOURSELVES:

HAVE THEY NOT ANY POLITICAL CONNECT & IF ANY, THEN WITH WHOM ....???

This is a list of people who robbed Indian banks and fled the country:


  1. Vijay Mallya

  2. Mehul Choksi

  3. Nirav Modi

  4. Nishant Modi

  5. Pushpesh Padya

  6. Ashish Jobanputra

  7. Sunny Kalra

  8. Arti Cholera

  9. Sanjay Kalra

  10. Varsha Kalra

  11. Sudhir Kalra

  12. Jadin Mehta

  13. Umesh Thinly

  14. Kamlesh Thinness

  15. Nilesh Pariho

  16. Vinay Mittal

  17. Singular forged

  18. Chetan Jayantilal Dara

  19. Nitin Jayantilal Dara

  20. Deeptiban Chetan

  21. Savia Setha

  22. Rajiv Goyal

  23. Alka Goyal

  24. Lalit Modi

  25. Ritesh Jaini

  26. Hitesh Nagendrabai Patel

  27. Mayuribehan Patel

  28. Ashish Sureshbai

       

MONEY INVOLVED: 

10,000,000,000,000/- (Ten Trillion Rupees)

When & under whose influence above people got huge loans from Banks? 

Who backed them?

NONE OF ABOVE ARE FROM RSS...

No one belongs to Bajrang Dal.

No one belongs to Shri Ram Sena.

No one belongs to the Hindu Vigilance Forum.

 None of these are from BJP.

 None of these belong to Vishwa Hindu Parishad.

NOTE:

One more thing, none of them have taken loan from any bank since 1st May 2014, means after NDA government come to power.


PSBs' doors were opened for BANK ROBBERY during 2004-2014, when the Antonio Congress was in power, PM Manmohan Singh was under control of extra-constitutional NAC- National Advisory Committee- headed by Sonia Gandhi alias Antonio Maino. NAC was packed by men and women of dubious character suited to NAC Chairperson. Look to their credentials over Google.


And, today a propaganda is let loose that PSBs are plundered in this Government. People's memory is short, so realities are shadowed by falsehoods over a time.

NAC was disbanded once UPA Govt gone in 2014.

All players in UPA govt, NAC or in public domain stopped their play, once  this govt came into power.

RBI advised all PSBs to cleanse their Balance sheets. In cleansing processes, dead loans (NPAs) started unearthing. Study reveals that when Western economy was collapsing, popularly known as "subprime crisis" Western Banks were crumbling, Lehmann Bros like institutions collapsing Indian Prime Minister and great economist Man Mohan Singh opened the gate of PSBs for loot in the name to insulate Indian Economy from West world economic catastrophe. Phone Banking presided over by then FM became the handle. During 2008-2012 worth 20 lakh crores' new loans were sanctioned by these PSBs to unscrupulous elements having proximity with power at Centre.


Of these over 16 lakh crores had to be written or waived off and from 2016-2020 almost all PSBs plunged in losses. PSBs lost their capital and government reached to choose one option either to sale these Banks or recapitalise them to bring back on track.

Government preferred recapitalization and infused about 3.19 lakh crore fresh capital in these Banks to redeem them for businesses.

People, particularly Bankmen and Banking people shouldn't forget that looking to precarious financial conditions of PSBs RBI imposed PCA on most of PSBs. PCA mean, no further business.

In 2nd Gyan Sangam held in Pune, PM assured no government intervention in Banks administrations and financial decisions. Banks were made free to seek Government help in matters they deem necessary.

Today Banks with NPAs below 1% is a rare record of PSBs function. Same PSBs are today minting enormous profit, who were received by this Government at the brink of collapsed.

To tarnish the image of government political forces opposed to this Government drags PSBs into controversy. PSBs are well run, stronger than any time in Banking history.


Bankmen, despite all problems, rendered yeoman services to Nation and people, created world class Banking - a most profitable and people friendly enterprises.

Share this post as much as possible...in the interest of Nation and people. If the country is to be saved, national institutions are to be defended and saved from maligning in the eyes of people of this country. PSBs are best run institutions today. Bankmen may have some their grievances, that they will settle, but surely not at the cost of nation. Bankmen grievances are much more, because their Unions have left the path of Unite and Fight,  failed to represent issues forcefully and succumbed to wrong settlements with the Management. 

Why to blame else when your own currency is fake.*

😡😡😡