कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन, नेताओं की न्यायिक स्थिति और विपक्षी दलों के रुख से जुड़ी विस्तृत जानकारी:
1. CJP का ताज़ा घटनाक्रम और ज़मीनी स्थिति
- ज़मानत सुनवाई स्थगित और मजिस्ट्रेट का अलग होना: CJP के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका की पाँच दिनों की न्यायिक हिरासत समाप्त होने के बाद भी उनकी रिहाई नहीं हो सकी। सुनवाई केदौरान सहायक पुलिस आयुक्त (विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट) ने जान के खतरे और दबाव बनाने के आरोपोंका हवाला देते हुए खुद को सुनवाई से अलग (recuse) कर लिया।
- दिल्ली पुलिस द्वारा नया मामला दर्ज: मजिस्ट्रेट के हटने के बाद दिल्ली पुलिस ने सरकारी कर्मचारी कोधमकाने और आपराधिक धमकी (Criminal Intimidation) से जुड़ी धाराओं के तहत एक नया मामलादर्ज किया है।
- रिहाई में देरी पर विवाद: CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह और वरिष्ठ अधिवक्ता Kapil Sibal से परामर्श केबाद पार्टी ने आरोप लगाया कि प्रशासन जानबूझकर कानूनी अड़चनें पैदा कर रहा है और जमानतदारों कोअनुचित आधार पर खारिज कर नेताओं को अवैध हिरासत में रख रहा है।
- अभिजीत दीपके और नेहा बोरा की स्थिति: CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके को शांति बांड (peace bond) भरने के बाद विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत से सशर्त ज़मानत मिल चुकी है। आइसा (AISA) अध्यक्ष नेहा बोरा को भी औपचारिक प्रक्रियाओं के बाद रिहा कर दिया गया है।
- मुख्य माँगें: CJP मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) में कथित गड़बड़ियों को लेकर मुख्य चुनावआयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन स्थल के रूप में फिर से बहालकरने की माँग पर अड़ी है।
2. प्रमुख राजनेताओं और विपक्षी दलों का रुख
- अभिजीत दीपके (संस्थापक, CJP):
ज़मानत पर बाहर आने के बाद दीपके ने कहा कि आंदोलनकारी डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगायाकि सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और तिरंगा फहराने वाले युवाओं को दबाने के लिए कार्यकारीमजिस्ट्रेटों और प्रशासनिक शक्तियों का दुरुपयोग कर रही है।
- राहुल गांधी (विपक्ष के नेता, कांग्रेस):
राहुल गांधी ने आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि "तिरंगा लहराना कोई अपराध नहीं है"। उन्होंनेप्रशासन द्वारा जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल से डिनोटिफाई करने का विरोध करते हुए कहा कि विपक्षलोकतांत्रिक अधिकारों को वापस दिलाएगा। छात्रों और युवाओं पर कथित पुलिसिया कार्रवाई की निंदाकरते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस सत्याग्रह को नहीं तोड़ सकती और इसके खिलाफ कानूनी रास्ते अपनाएजाएंगे।
- अरविंद केजरीवाल (आम आदमी पार्टी):
केजरीवाल ने छात्र नेताओं की हिरासत और पुलिसिया कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला करारदिया। आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कनॉट प्लेस और सेंट्रल पार्क के आसपास प्रदर्शनकारियों कासाथ दिया। उन्होंने केंद्र सरकार से युवाओं की आवाज़ दबाने के बजाय चुनाव आयोग से जुड़ी चिंताओं परजवाबदेही तय करने की माँग की।
- ममता बनर्जी (तृणमूल कांग्रेस):
ममता बनर्जी ने CJP नेताओं की धरपकड़ और निषेधाज्ञा को "अघोषित आपातकाल" बताया। उन्होंने कहाकि युवाओं के शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध को कुचलना देश के संघीय ढाँचे और संवैधानिक संस्थाओं कीगरिमा के खिलाफ है।
- अखिलेश यादव (समाजवादी पार्टी):
अखिलेश यादव ने कहा कि हाथों में तिरंगा लिए शांतिपूर्ण युवाओं पर प्रशासनिक हिरासत और मुकदमों काइस्तेमाल यह दिखाता है कि सत्ता देश के युवाओं और निष्पक्ष चुनावी प्रक्रियाओं से डर रही है। उन्होंनेनिष्पक्ष मतदाता सूची और संस्थागत पारदर्शिता की माँग का पूरा समर्थन किया।
हाथ में लेकर राष्ट्रध्वज, निकले हैं कुछ वीर,
शहर की शांति भंग कर, बदलने चले तकदीर।
नियम-कायदे ताक पर, हर कोने में शोर,
कहते हैं हम सच्चे हैं, बाकी सब हैं चोर।
दुकानदार बैठा रहे, ग्राहक आए न पास,
त्योहारों के सीजन में, व्यापारी है उदास।
शटर गिरे हैं डर के मारे, सड़कें सारी जाम,
क्रांति के इन ठेकेदारों का, बस यही है काम।
जुर्म छुपाने को बनाया, तिरंगे को एक ढाल,
ताकि पुलिस भी छू न पाए, बचे रहे हर हाल।
नेताओं की शह मिली, तो बढ़ गया उत्साह,
कारोबार जो डूब रहा, उसकी किसे परवाह?
सियासत के मंच पर, सज रहे नए खेल,
मजिस्ट्रेट को मिल रही, धमकियाँ और जेल।
मक्कारी के इस ड्रामे को, जनता रही है देख,
देशभक्ति के नाम पर, जो सेक रहे अपनी सेक।
शांति और अमन का जो, करते हैं नुकसान,
तिरंगे का वो आदर नहीं, कर रहे अपमान।
भोली जनता समझ चुकी, अब इन चालों का सच,
खोखले नारों से अब, बचेगा न कोई मंच।

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