Monday, October 5, 2026

Trump and American Share Market



Why stock market in USA is going up and where popularity of Trump stands now. Whether American citizens are really happy?

1. शेयर बाजार और क्रिप्टो बाजार में तेजी के मुख्य कारण

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और टेक कंपनियों का दबदबा: अमेरिकी शेयर बाजार (विशेषकर S&P 500 और Nasdaq) की बढ़त का एक बड़ा हिस्सा दिग्गज टेक कंपनियों की मजबूत कमाई और AI इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश से संचालित है।

ब्याज दरों में कटौती: जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती करता है, तो कंपनियों के लिए कर्ज सस्ता होता है और भविष्य के मुनाफे का वर्तमान मूल्य बढ़ता है, जिससे शेयरों के मूल्यांकन में उछाल आता है।

क्रिप्टो पर अनुकूल नीतियां और संस्थागत निवेश: बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टो संपत्तियों में तेजी के पीछे मुख्य वजह संस्थागत निवेश (Bitcoin ETFs) और अमेरिका में क्रिप्टो-समर्थक नीतियों, आसान नियमों व वैध वित्तीय संपत्ति के रूप में स्वीकार्यता की उम्मीदें हैं।

शेयर बायबैक और ऑटोमैटिक 401(k) निवेश: अमेरिकी कंपनियां हर साल सैकड़ों अरब डॉलर के अपने शेयर खुद खरीदती हैं (बायबैक), जिससे प्रति शेयर आय (EPS) बढ़ती है। इसके अलावा, आम कर्मचारियों के रिटायरमेंट फंड (401k) से हर महीने शेयर बाजार में निरंतर पूंजी का प्रवाह बना रहता है।


2. डोनाल्ड ट्रंप का लोकप्रियता ग्राफ और आगामी मिडटर्म चुनाव

वर्तमान लोकप्रियता ग्राफ (Approval Rating): राष्ट्रीय पोलिंग एग्रीगेटर्स (जैसे RealClearPolitics, Ballotpedia) के अनुसार, ट्रंप की अनुमोदन रेटिंग (Job Approval) लगभग 36% से 38% के निचले स्तर के आसपास बनी हुई है, जबकि अस्वीकृति (Disapproval) दर लगभग 60% के करीब है। शेयर और क्रिप्टो में तेजी से अमीर निवेशकों और उद्योगपतियों में उनका समर्थन जरूर मजबूत हुआ है, लेकिन रोजमर्रा की महंगाई और ऊंचे जीवन-यापन खर्च (Cost of Living) के चलते आम मतदाताओं में उनकी शुद्ध लोकप्रियता में गिरावट दर्ज की गई है।

नवंबर मिडटर्म चुनाव के अपेक्षित परिणाम:

हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (House of Representatives): ऐतिहासिक रूप से सत्ताधारी दल को पहले मिडटर्म में भारी नुकसान झेलना पड़ता है ("Midterm Penalty")। पोलिंग और जेनेरिक बैलेट में डेमोक्रेट्स बढ़त बनाए हुए हैं, जिससे प्रतिनिधि सभा (House) पर डेमोक्रेट्स के कब्जे की प्रबल संभावना जताई जा रही है।

सीनेट (Senate): सीनेट में मुकाबला कड़ा है, लेकिन प्रमुख स्विंग राज्यों (जैसे मिशिगन, टेक्सास, मेन आदि) में कांटे की टक्कर के कारण रिपब्लिकन पार्टी के मामूली बहुमत पर गंभीर दबाव है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि आर्थिक नाराजगी जारी रही, तो कांग्रेस के दोनों सदनों में सत्ता संतुलन बदल सकता है।


3. महंगाई, बॉन्ड यील्ड और शेयर बाजार का आपसी तालमेल

महंगाई (Inflation): यदि वस्तुओं और सेवाओं के दाम तेजी से बढ़ते हैं, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाने या ऊंची रखने पर मजबूर होता है। इससे आम जनता का घरेलू बजट बिगड़ता है और उपभोक्ता मांग सुस्त पड़ती है।

बॉन्ड यील्ड (Bond Yield): जब सरकारी बॉन्ड की यील्ड (प्रतिफल दर) बढ़ती है, तो इसका अर्थ है कि पूरी अर्थव्यवस्था में उधारी की लागत बढ़ रही है।

इसके चलते होम लोन (Mortgage) और कार लोन महंगे हो जाते हैं।

उच्च यील्ड शेयर बाजार के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा बन जाती है, क्योंकि बड़े निवेशकों को जोखिम रहित सरकारी बॉन्ड में ही अच्छा रिटर्न मिलने लगता है।

शेयरों में तेजी (Stock Hike) का विरोधाभास: जब तक बॉन्ड यील्ड एक सीमित दायरे में रहती है, तब तक शेयर बाजार में तेजी जारी रह सकती है। हालांकि, यदि बॉन्ड यील्ड अनियंत्रित रूप से बढ़ती रही और महंगाई दोबारा भड़क गई, तो यह वर्तमान में चल रही शेयर बाजार की तेजी पर ब्रेक लगा सकती है।


1. क्या अमेरिका को टैरिफ वॉर से कोई वास्तविक फायदा हुआ?

राजस्व और रणनीतिक लाभ सीमित: हालांकि आयात शुल्क (customs duties) से अमेरिकी सरकार को अतिरिक्त राजस्व मिला और कुछ चुनिंदा घरेलू क्षेत्रों (जैसे घरेलू स्टील व एल्युमीनियम मिलों) को तात्कालिक सुरक्षा मिली, लेकिन व्यापक अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है।

व्यापार घाटा जस का तस: टैरिफ का प्राथमिक उद्देश्य व्यापार घाटे (Trade Deficit) को खत्म करना और मैन्युफैक्चरिंग को वापस लाना था, लेकिन व्यापारिक साझेदारों के जवाबी कदमों और वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखलाओं के चलते अमेरिकी व्यापार घाटे में कोई ठोस या टिकाऊ कमी नहीं आई।


2. क्या अमेरिकी नागरिक और उद्योग इन अप्रत्याशित टैरिफों से खुश हैं?

अमेरिकी उद्योग (Industry Discontent):

इनपुट लागत में भारी उछाल: ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और कंस्ट्रक्शन जैसे बड़े उद्योग बेहद असंतुष्ट हैं क्योंकि उन्हें स्टील, पुर्जों और कच्चे माल पर भारी शुल्क चुकाना पड़ रहा है, जिससे उनकी उत्पादन लागत बढ़ गई है और वैश्विक स्तर पर उनकी प्रतिस्पर्धा कमजोर हुई है।

कृषि क्षेत्र पर जवाबी मार: चीन, कनाडा और यूरोपीय संघ जैसे देशों ने अमेरिकी कृषि उत्पादों (सोयाबीन, मक्का, डेयरी, पोर्क) पर जवाबी शुल्क (retaliatory tariffs) लगा दिए, जिससे अमेरिकी किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा।

नीतिगत अनिश्चितता: बार-बार बदलते, अचानक थोपे जाने वाले टैरिफ और कानूनी विवादों (जैसे कई टैरिफों का अदालतों में उलझना) के कारण कंपनियां लंबी अवधि के पूंजीगत निवेश करने से कतरा रही हैं।

आम नागरिक और उपभोक्ता (Consumer Backlash):

उपभोक्ताओं पर अप्रत्यक्ष टैक्स: अर्थशास्त्रियों और थिंक-टैंकों के अध्ययनों के अनुसार, टैरिफ का बोझ विदेशी कंपनियों ने नहीं, बल्कि आयातकों ने कीमतों में वृद्धि करके सीधे अमेरिकी उपभोक्ताओं पर डाला है।

 इससे औसत अमेरिकी परिवार पर प्रतिवर्ष सैकड़ों डॉलर का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ा है। इलेक्ट्रॉनिक्स, घरेलू उपकरण, कपड़े और किराना सामान महंगे होने के कारण आम जनता में इन टैरिफों के प्रति नाराजगी है, जो सीधे तौर पर ट्रंप की गिरती अनुमोदन रेटिंग (Approval Ratings) में भी झलकती है।

No comments:

Post a Comment