Saturday, September 5, 2026

उत्तम क्षमा धर्म

 


यह वीडियो डॉ. संजीव गोधा द्वारा दसलक्षण महापर्व के पहले दिन "उत्तम क्षमा धर्म" पर दिया गया प्रवचन है (YouTube Video Link)।

प्रवचन के मुख्य बिंदुओं को एक आम व्यक्ति की समझ के अनुसार नीचे क्रमवार (one by one) समझाया गया है:

1. जैन पर्वों का असली स्वरूप

 आम त्योहार बनाम जैन पर्व:  दुनिया भर के सामान्य पर्वों में खाना-पीना, नए वस्त्र पहनना, पार्टियां करना और बाहरी मौज-मस्ती शामिल होती है।


 त्याग और साधना का पर्व: इसके विपरीत, जैन धर्म के दसलक्षण पर्व भोग के नहीं बल्कि वैराग्य, त्याग और आत्म-साधना के पर्व हैं। इसमें खाने-पीने का त्याग कर आत्मा के स्वभाव को जानने और समझने का प्रयास किया जाता है।


2. पर्व मनाने का सही तरीका

 केवल सोशल मीडिया तक सीमित न रहें: आज लोग केवल व्हाट्सएप, फेसबुक पर 'शुभकामनाएं' भेजकर या फोन पर बात करके औपचारिकता पूरी कर लेते हैं।


 जीवन में उतारना जरूरी: पर्व केवल मैसेज भेजने का नाम नहीं है, बल्कि धर्म के वास्तविक भाव को समझकर अपने आचरण में उतारने का नाम है।


3. वर्ष में दसलक्षण पर्व का आगमन

 साल में तीन बार: दसलक्षण पर्व वर्ष में तीन बार (चैत्र, माघ और भाद्रपद मास में) आते हैं । भाद्रपद (भादों) का पर्व सबसे प्रमुखता से और व्यापक रूप से मनाया जाता है।


4. 'उत्तम क्षमा' का सरल अर्थ

 क्रोध का त्याग: उत्तम क्षमा का पहला कदम अपने भीतर के क्रोध (गुस्से) को खत्म करना है।

 सच्ची क्षमा क्या है? केवल बाहर से 'क्षमा' कह देना या मजबूरी में चुप रह जाना क्षमा नहीं है। जब मन के भीतर किसी के प्रति कोई द्वेष, वैर या बदले की भावना न रहे और आत्मा में पूर्ण शांति हो, वही सच्ची उत्तम क्षमा है।


5. आम आदमी इसे अपने जीवन में कैसे उतारे?

1. प्रतिक्रिया (Reaction) से बचें: यदि कोई आपको अपशब्द कहे या आपके प्रतिकूल कार्य करे, तो तुरंत क्रोधित न होकर धैर्य रखें।


2. वैर-भाव न पालें: पुरानी कड़वी बातों और गलतियों को दिल से मिटाकर दूसरों को मन से क्षमा करें।


3. आत्म-निरीक्षण करें: दूसरों की कमियों पर ध्यान देने के बजाय अपने अंदर झांकें और अपने आत्म-स्वभाव में शांत रहने का अभ्यास करें।


चार कषाय का अभाव 

क्रोध           उत्तम क्षमा

मान            उत्तम मार्जाव 

माया।         उत्तम आर्जव 

लोभ           उत्तम शौच


पंच पाप का अभाव


हिंसा          उत्तम संयम

झूठ            उत्तम सत्य

चोरी          उत्तम त्याग

कुशील      उत्तम ब्रह्मचर्य

परिग्रह       उत्तम अकिंचन

                   उत्तम ताप

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