विवादास्पद विज्ञापन एवं बॉलीवुड सितारों पर की गई कानूनी व विनियामक कार्रवाइयां
1. सरोगेट पान मसाला एवं तंबाकू विज्ञापन (विमल, कमला पसंद, पान बहार)
- विवाद: इलायची और माउथ फ्रेशनर के नाम पर तंबाकू एवं पान मसाला उत्पादों का परोक्ष (surrogate) प्रचार करना।
- शामिल सितारे: अमिताभ बच्चन, अजय देवगन, शाहरुख खान, अक्षय कुमार।
- की गई कार्रवाई:
- अमिताभ बच्चन: स्वास्थ्य संगठनों की आपत्ति और सरकारी नोटिसों के बाद उन्होंने अनुबंध रद्द किया, प्रचार राशि लौटाई और अनुबंध खत्म होने के बावजूद विज्ञापन दिखाने पर कंपनी को कानूनी नोटिसभेजा।
- अक्षय कुमार: जनता और विनियामकों की तीखी प्रतिक्रिया के बाद सार्वजनिक रूप से माफी मांगीऔर ब्रांड एंबेसडर पद से हटने की घोषणा की।
- सरकारी हस्तक्षेप: केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) और स्वास्थ्य मंत्रालय ने सिगरेट एवंअन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA) के तहत नोटिस जारी कर सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट पर कड़ेदिशानिर्देश लागू किए।
2. ऑनलाइन सट्टेबाजी एवं गेमिंग ऐप्स (Fairplay, 1xBet, Mahadev App)
- विवाद: अवैध वित्तीय सट्टेबाजी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े प्लेटफॉर्म्स का प्रचार।
- शामिल सितारे: रणबीर कपूर, श्रद्धा कपूर, हुमा कुरैशी, नवाजुद्दीन सिद्दीकी।
- की गई कार्रवाई:
- प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इन सितारों को समन भेजकर वित्तीय लेनदेन और प्रचार शुल्क को लेकरपूछताछ की।
- सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने सभी टीवी चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर इन विज्ञापनों केप्रसारण पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की एडवाइजरी जारी की।
3. भ्रामक स्वास्थ्य एवं इम्युनिटी दावे (पतंजलि कोरोनिल / भ्रामक वेलनेस उत्पाद)
- विवाद: महामारी और गंभीर बीमारियों के असत्यापित इलाज का दावा करना।
- की गई कार्रवाई:
- सुप्रीम कोर्ट और CCPA ने भ्रामक विज्ञापनों पर कड़ी फटकार लगाई और 'ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीजएक्ट' के तहत विज्ञापनों को तत्काल हटाने के आदेश दिए।
- सेलिब्रिटीज को चेतावनी दी गई कि वैज्ञानिक प्रमाण के बिना स्वास्थ्य दावों का प्रचार करने पर वे सीधेकानूनी रूप से उत्तरदायी होंगे।
4. रियल एस्टेट भ्रामक वादे (आम्रपाली ग्रुप)
- विवाद: घर खरीदारों से अधूरे और गैर-कानूनी प्रोजेक्ट्स में निवेश कराने के लिए भ्रामक प्रचार।
- शामिल सितारे: एमएस धोनी (इस मामले ने संपूर्ण सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट कानून को बदला)।
- की गई कार्रवाई:
- सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद सेलिब्रिटीज की ब्रांड विश्वसनीयता की जांच को अनिवार्य बनायागया।
- उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत भ्रामक विज्ञापन करने वाले सितारों पर ₹10 लाख से₹50 लाख तक का जुर्माना और 1 से 3 साल तक के विज्ञापन प्रतिबंध का कानूनी प्रावधान लागूहुआ।
5. सांस्कृतिक एवं धार्मिक संवेदनशीलता से जुड़े विज्ञापन (कृति सेनन - GIVA ज्वेलरी एवं अन्य)
- विवाद: रक्षाबंधन जैसे पारिवारिक और पारंपरिक त्योहार के विज्ञापन में अनुचित आधुनिक परिधान औरपरंपराओं के चित्रण को लेकर विवाद। इसी प्रकार मान्यवर के 'कन्यामान' (आलिया भट्ट) और तनिष्क केविज्ञापनों पर सामाजिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप लगे।
- की गई कार्रवाई:
- एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया (ASCI) की समीक्षा और भारी जनविरोध के बाद कईब्रांड्स को अपने विज्ञापन वापस लेने पड़े या उनमें संशोधन करना पड़ा।
- कानून व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका पर संबंधित राज्य सरकारों औरविनियामकों ने कंपनियों को नोटिस जारी किए।
विज्ञापन निर्माताओं एवं रचनाकारों के नाम संदेश
कला और रचनात्मकता का उद्देश्य समाज को जोड़ना, प्रेरित करना और मानवीय संवेदनाओं को समृद्ध करनाहोना चाहिए। किसी भी उत्पाद को बेचने या केवल विवाद पैदा करके ध्यान आकर्षित (sensation) करने के लिए सांस्कृतिक मर्यादाओं, धार्मिक भावनाओं और सामाजिक समरसता को दरकिनार करना किसी भी दृष्टि सेउचित नहीं है।
प्रत्येक विज्ञापन निर्माता, निर्देशक और ब्रांड को यह समझना चाहिए कि भारत की विविधता, उसकी धार्मिकआस्थाएं और पारिवारिक मूल्य हमारे सामाजिक ताने-बाने की नींव हैं। नवाचार और आधुनिकता अवश्य अपनाएं, लेकिन उसमें हर वर्ग के सम्मान, परंपराओं की पवित्रता और समाज के आपसी भाईचारे का पूरा ध्यान रखें। सच्चीरचनात्मकता वही है जो मर्यादा के दायरे में रहकर हर वर्ग के दिल को छू सके और देश में सामाजिक सौहार्द कोमजबूत बनाए।
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