Listen or watch on TV Lalit Prabhu Maharaj
यह वीडियो पूज्य संत श्री ललितप्रभ जी द्वारा रायपुर में दिए गए चातुर्मास प्रवचन का है। इसका मुख्य विषय है—
"घर में सुख, शांति और समृद्धि कैसे बढ़ाएं तथा घर को स्वर्ग कैसे बनाएं"।
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क्या करें कि घर में सुख शांति समृद्धि बढ़ जाए
वीडियो का प्रमुख सारांश एवं मुख्य बातें
1. लक्ष्मी जी और सेठ की कथा (प्रेम की सबसे बड़ी दौलत)
महाराज जी एक कथा सुनाते हैं कि एक सेठ के सामने लक्ष्मी जी प्रकट होकर कहती हैं कि 100 साल पूरा होने पर वे घर छोड़कर जा रही हैं, लेकिन जाने से पहले एक वरदान मांग लो।
परिवार के सदस्य धन, सोना-चांदी या मकान मांगने की सलाह देते हैं, लेकिन घर की छोटी बहू सेठ को सलाह देती है कि वे केवल परिवार में एकता और प्रेम मांगें।
सेठ लक्ष्मी जी से मांगता है कि उसके सातों बेटे और बहुएं हमेशा एक साथ रहें और आपस में प्रेम बना रहे।
इस पर लक्ष्मी जी प्रसन्न होकर कहती हैं कि इस वरदान के कारण उन्हें अगले 100 वर्षों तक इसी घर में रुकना पड़ेगा।
1. घर को 'स्वर्ग' बनाने की कुंजी - पारिवारिक प्रेम
प्रेम ही वास्तविक धन है: जैसे बिना पैसे का पर्स या बिना पानी की नदी व्यर्थ है, वैसे ही बिना प्रेम का परिवार श्मशान या कब्रिस्तान की तरह है।
कमरों और कब्रों में अंतर: जिस घर में लोग एक छत के नीचे रहकर भी एक-दूसरे से बात नहीं करते, वह घर कमरों का नहीं, बल्कि कब्रों का रूप ले लेता है।
1. वास्तविक स्वर्ग और नरक
जिस घर में कई बेटे-बहुओं के होते हुए भी बूढ़े माता-पिता को अकेले और उपेक्षित होकर खाना बनाना पड़े, वह स्थिति नरक के समान है।
जिस घर में बुजुर्गों को सिर-आंखों पर बिठाया जाता है और सभी मिल-जुलकर एक थाली में खाना खाते हैं, वही स्वर्ग है।
1. माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा का महत्त्व
पत्नी ईश्वर का दिया उपहार है, लेकिन माता-पिता उपहार में आए हुए साक्षात ईश्वर हैं।
श्री ललितप्रभ जी बताते हैं कि उन्होंने और उनके भाई श्री चंद्रप्रभु जी ने वैराग्य से अधिक अपने माता-पिता की सेवा के लिए संन्यास (दीक्षा) स्वीकार किया था।
घर के बड़े-बुजुर्ग भले फल न दें, लेकिन वे शीतल छाया ज़रूर देते हैं। उनकी सेवा और आशीर्वाद से ही जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
1. टूटे रिश्तों को जोड़ने की सीख (सकारात्मक सोच)
महाराज जी मुंबई-गुवाहाटी के एक दंपति की सच्ची घटना सुनाते हैं, जिनका 9 साल पहले तलाक हो चुका था।
टीवी पर प्रवचन सुनकर और अपनी गलतियों का अहसास करके पति ने अपनी पूर्व पत्नी को फोन कर माफी मांगी। सकारात्मक सोच अपनाने के कारण दोनों फिर से एक हुए और पुनर्विवाहित हुए।
अहंकार (Ego) छोड़कर रिश्तों में मिठास घोलने और माफी मांगने की सीख दी गई है।
1. संस्कारी बहू का प्रेरक उदाहरण
एक डॉक्टर बहू की कहानी साझा की गई है, जिसने अपनी अकेली सास का अकेलापन दूर करने के लिए अपनी सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया ताकि वह घर पर सास की सेवा और देखभाल कर सके।
जीवन में उतारने योग्य मुख्य नियम:
1. रोज प्रातःकाल प्रणाम: प्रतिदिन सुबह अपने माता-पिता और बुजुर्गों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।
2. रात में समय दें: सोने से पहले 5–10 मिनट बुजुर्गों के पास बैठें, उनका हाल-चाल पूछें और उनकी सेवा करें।
3. अहंकार छोड़ें: संपत्ति या ज़मीन के छोटे-मोटे टुकड़ों के लिए भाइयों या परिवार में दरार न पड़ने दें; प्रेम को बचाकर रखें।
Here is a thought-provoking and soulful Bhajan in Hindi structured in traditional devotional style.
It directly addresses working couples, reminding them that while financial wealth is important, emotional presence, serving elders, and nurturing their own children with true values are the ultimate treasures of life.
"जाग ओ राही, जाग ज़रा"
(Jaag O Raahi, Jaag Zara)
जाग ओ राही, जाग ज़रा, तू किस पथ पर चलता है?
कांच समेटने की चाहत में, हीरा हाथ से छूटता है॥
धन-दौलत की अंधी दौड़ में, कैसा यह मोहांग बना?
रिश्ते-नाते छूट रहे हैं, कैसा यह इंसान बना॥
॥ अंतरा १: माता-पिता और बुज़ुर्गों का त्याग
(Aged Parents & Grandparents) ॥
जिन हाथों ने चलना सीखाया, आज वो हाथ कांपते हैं,
तेरी एक झलक पाने को, बूढ़े नैन तरसते हैं।
पैसे तो तूने बहुत कमाए, पर समय न उनको दे पाया,
जिनके दम पर तू बढ़ा आगे, उनको ही तू भूल आया।
छत तो दी पर छांव न दी, यह कैसा तेरा धर्म बना?
जाग ओ राही, जाग ज़रा, तू किस पथ पर चलता है॥
॥ अंतरा २: दांपत्य जीवन और दूरी
(Married Life & Two Destinations) ॥
दो दिशाओं में दो राही, एक घर में भी दूरी है,I
काम, तरक्की, नाम के पीछे, कैसी यह मजबूरी है?
साथ बैठकर दो पल हस लें, इतना भी अवकाश नहीं,
पैसों के इस ऊंचे महल में, मन में कोई उल्लास नहीं।
दिलों के तार टूट रहे हैं, कैसा यह संसार बना?
जाग ओ राही, जाग ज़रा, तू किस पथ पर चलता है॥
॥ अंतरा ३: बचपन और शिशु गृह
(Child Care & Life Values) ॥
आया शिशु तो खुशियां आईं, पर गोदी में न समय मिला,
आया मसीहा (Maid) पालन करने, मां का आंचल न मिला।
जिस बचपन को संस्कार चाहिए, वो क्रेच (Creche) के आंगन में बढ़ा,
रिश्तों का पावन अर्थ न सीखा, दीवारों की छांव बढ़ा।
संस्कार बिन कैसी पीढ़ी? यह कैसा भावी भारत बना?
जाग ओ राही, जाग ज़रा, तू किस पथ पर चलता है॥
॥ अंतरा ४: चेतना और जागृति
(Call to Awakening & Action) ॥
चेत ओ युवा! तू राष्ट्र-निर्माता, तुझसे ही यह देश बना,
घर को पहले स्वर्ग बना तू, यही सनातन धर्म बना।
मात-पिता की सेवा कर ले, बच्चों को संस्कार दे तू,
धन के संग-संग अपनों को भी, थोड़ा-सा प्यार दे तू।
आज संभालेगा घर अपना, तभी यह जग सुंदर बना!
जाग ओ राही, जाग ज़रा, तू किस पथ पर चलता है॥
A Message to the New-Age Professionals
To the hardworking generation shaping today’s world:
Your dedication, ambition, and career achievements are truly commendable. You strive every day to build a secure future, provide comfort, and rise higher.
However, amidst the relentless hustle for wealth and growth, remember what truly sustains us: love, presence, and connection.
Money can buy a luxurious house, but only shared moments, warmth, and laughter build a home.
Professional success can buy top-tier daycare, but it can never replace the values, security, and warmth that come from a parent's touch and an elder's blessing.
Take a moment to pause and reflect:
* Your parents and grandparents don't need your financial savings as much as they need your time, attention, and a warm conversation.
* Your spouse needs your undivided presence and shared joy, not just shared expenses or separate paths.
* Your children need your time, stories, and sanskaars (core values) to grow into compassionate human beings—something no maid or daycare can truly instill.
Career milestones are replaceable; lost time with family is not.
Reclaim your balance today. Invest in relationships, serve your elders, nurture your children directly, and make your home a living heaven.
"Baa, Baa, Working Couple, Have You Any Time?"
(Tune: Baa Baa Black Sheep)
Check out this song! https://suno.com/s/KnLcIi9FNhugd5kk
Baa, baa, working couple, have you any time?
"No sir, no sir, we are in our prime!
One job for husband, one for the wife,
Running in a race just to earn a better life."
Baa, baa, working couple, where is your home?
"One flies to East, and one lives in Rome!
High-paying packages, money in the bank,
Yet we're so busy that our spirits have sank."
Baa, baa, working couple, where is the child?
"Off to the daycare center, quiet and mild!
One maid for morning, one maid for night,
Teaching all the lessons while we’re out of sight."
Baa, baa, working couple, where are the old?
"Sitting in the corner, feeling left and cold.
Hoping for a minute, waiting for a smile,
Wishing we would sit and talk a little while."
Baa, baa, working couple, pause for a day!
"Put down the laptops, set the phones away!
Love for the elders, time for the small,
That's the true fortune that enriches us all!"
Listen song by clicking following Link
https://suno.com/s/UyKp2DNucDrv9jNu
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