यहाँ विभिन्न राजनीतिक नेताओं और सार्वजनिक हस्तियों द्वारा समय-समय पर हिंदू धर्म, सनातन धर्म, देवी-देवताओं और अयोध्या राम मंदिर से जुड़े मुद्दों पर दिए गए प्रमुख विवादित बयानों का एक विस्तृत विवरण दिया गया है:
1. सनातन धर्म और हिंदू मान्यताओं पर विवादित बयान
* उदयनिधि स्टालिन (DMK नेता एवं मंत्री, तमिलनाडु):
* तिथि: 2 सितंबर 2023
* बयान: चेन्नई में आयोजित 'सनातन उन्मूलन सम्मेलन' में उन्होंने कहा, "सनातन धर्म मलेरिया, डेंगू और कोरोना जैसी बीमारियों की तरह है। इसका केवल विरोध नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इसे पूरी तरह समाप्त कर दिया जाना चाहिए।"
ए. राजा (DMK सांसद):
* तिथि: 6 सितंबर 2023
* बयान: उदयनिधि के बयान के समर्थन में ए. राजा ने कहा कि "सनातन धर्म की तुलना एड्स और कुष्ठ रोग जैसे सामाजिक कलंकों से की जानी चाहिए," क्योंकि यह जातिगत असमानता को बढ़ावा देता है।
पेरियार ई. वी. रामासामी (द्रविड़ कड़गम के संस्थापक):
* तिथि: 1950 के दशक के दौरान
* बयान: पेरियार ने हिंदू देवी-देवताओं और कर्मकांडों की तीखी आलोचना की। उन्होंने सार्वजनिक रूप से भगवान गणेश की मूर्तियों को तोड़ने और रामायण के पारंपरिक आख्यानों का विरोध करने का आह्वान किया था।
डॉ. बी. आर. आंबेडकर:
* तिथि: 25 दिसंबर 1927 / 1956
* बयान: जातिगत असमानता और छुआछूत का विरोध करते हुए उन्होंने मनुस्मृति का दहन किया था। 1956 में बौद्ध धर्म अपनाते समय ली गई 22 प्रतिज्ञाओं में उन्होंने हिंदू देवी-देवताओं की पूजा न करने और पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं को त्यागने की बात कही थी।
2. पवित्र ग्रंथों और देवी-देवताओं पर टिप्पणी
स्वामी प्रसाद मौर्य (तत्कालीन सपा नेता):
तिथि: जनवरी 2023
बयान: रामचरितमानस की कुछ चौपाइयों पर आपत्ति जताते हुए उन्होंने कहा कि "तुलसीदास द्वारा रचित यह ग्रंथ दलितों, पिछड़ों और महिलाओं का अपमान करता है।" उन्होंने इस पर प्रतिबंध लगाने या विवादित अंशों को हटाने की मांग की।
चंद्रशेखर (तत्कालीन शिक्षा मंत्री, बिहार):
तिथि: 11 जनवरी 2023
बयान: नालंदा मुक्त विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में उन्होंने कहा कि "रामचरितमानस, मनुस्मृति और बंच ऑफ थॉट्स जैसे ग्रंथ समाज में प्यार के बजाय नफरत और विभाजन फैलाते हैं।"
3. अयोध्या और राम मंदिर मामले के दौरान दिए गए बयान
राम सेतु एवं भगवान राम के अस्तित्व पर केंद्र सरकार का हलफनामा (UPA शासनकाल):
तिथि: सितंबर 2007
बयान/विषय: सेतुसमुद्रम परियोजना के मामले में सुप्रीम कोर्ट में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा दाखिल हलफनामे में कहा गया था कि "भगवान राम के ऐतिहासिक या वैज्ञानिक अस्तित्व का कोई सीधा प्रमाण उपलब्ध नहीं है।" भारी सार्वजनिक विरोध के बाद सरकार ने यह हलफनामा वापस ले लिया था।
मणिशंकर अय्यर (कांग्रेस नेता):
तिथि: जनवरी 2019
बयान: अयोध्या विवाद पर बोलते हुए उन्होंने कहा, "राजा दशरथ के महल में 10,000 कमरे थे। कोई यह कैसे दावा कर सकता है कि भगवान राम का जन्म ठीक उसी कमरे में हुआ था जहाँ मंदिर बनाने की मांग की जा रही है?"
कपिल सिब्बल (वरिष्ठ वकील एवं नेता):
तिथि: 5 दिसंबर 2017
बयान: सुप्रीम कोर्ट में सुन्नी वक्फ बोर्ड का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने अदालत से आग्रह किया था कि "अयोध्या मामले की सुनवाई 2019 के आम चुनावों के बाद तक टाल दी जाए," ताकि इसका राजनीतिक लाभ न उठाया जा सके।
अखिलेश यादव (अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी):
तिथि: 18 मई 2022
बयान: ज्ञानवापी और अयोध्या विवाद के संदर्भ में उन्होंने कहा, "हमारे हिंदू धर्म में तो कहीं भी पत्थर रख दो, पीपल के पेड़ के नीचे लाल झंडा लगा दो, तो वह मंदिर बन जाता है।" इसके अलावा उन्होंने 1949 में अयोध्या में मूर्तियाँ रखे जाने की घटना पर भी विवादित टिप्पणी की थी।
जयराम रमेश (कांग्रेस नेता):
तिथि: 2012
बयान: देश में स्वच्छता अभियान के संदर्भ में बोलते हुए उन्होंने कहा था कि "हमारे देश में मंदिरों से ज्यादा शौचालय जरूरी हैं।" हालांकि यह बयान स्वच्छता के प्रति जागरूकता के लिए था, लेकिन धार्मिक स्थलों की तुलना के कारण इसका काफी विरोध हुआ था।
शशि थरूर (कांग्रेस सांसद):
तिथि: अक्टूबर 2018
बयान: उन्होंने कहा था कि "कोई भी अच्छा हिंदू किसी ढहाए गए धार्मिक स्थल के स्थान पर राम मंदिर का निर्माण नहीं चाहेगा।"
मुलायम सिंह यादव (पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश):
तिथि: 1990 के आदेशों पर 2016-2017 में दिए गए बयान
बयान: 1990 में अयोध्या में कारसेवकों पर पुलिस गोलीबारी के आदेश को सही ठहराते हुए उन्होंने कहा था कि "संविधान, कानून की रक्षा और धर्मनिरपेक्षता को बचाए रखने के लिए कारसेवकों पर गोली चलवाना अनिवार्य था।"
यहाँ जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राहुल गांधी के हिंदू धर्म, अनुष्ठानों और राजनीतिक विचारधारा से जुड़े बयानों का हिंदी अनुवाद और विस्तृत विवरण दिया गया है:
1. पंडित जवाहरलाल नेहरू
मुख्य विचारधारा: तर्कवादी, धर्मनिरपेक्ष और गैर-कर्मकांडी। वे उपनिषदों या भगवद्गीता के दार्शनिक पहलुओं का सम्मान करते थे, लेकिन संगठित धर्म, रूढ़िवादिता और कर्मकांडों के आलोचक थे।
संगठित धर्म और कर्मकांडों पर बयान:
अपनी पुस्तक 'द डिस्कवरी ऑफ इंडिया' (भारत की खोज) में उन्होंने लिखा:
"धर्म, या विशेष रूप से संगठित धर्म का जो रूप भारत और अन्य जगहों पर देखा जाता है, उसने मुझे भय से भर दिया है। मैंने अक्सर इसकी निंदा की है और इसे पूरी तरह से साफ कर देने की इच्छा रखी है। यह लगभग हमेशा अंधविश्वास, प्रतिक्रिया, कट्टरता, शोषण और निहित स्वार्थों की रक्षा के पक्ष में खड़ा दिखाई दिया है।"
'हिंदू' शब्द और संस्कृति पर टिप्पणी:
नेहरू का मानना था कि 'हिंदू' शब्द मूल रूप से एक भौगोलिक पहचान (सिंधु नदी से जुड़ा) था, न कि केवल एक धार्मिक शब्द। उन्होंने लिखा:
"एक आस्था के रूप में हिंदू धर्म अस्पष्ट, अमूर्त, बहुआयामी और हर व्यक्ति के लिए अलग अर्थ रखने वाला है..."
उन्होंने चेतावनी दी थी कि व्यापक भारतीय संस्कृति को केवल "हिंदू संस्कृति" के बराबर मानना गलत है, क्योंकि भारतीय संस्कृति सदियों से विभिन्न धर्मों और प्रभावों का एक संयुक्त मिश्रण (साझा संस्कृति) रही है।
पारंपरिक धार्मिक व्यवस्था पर विचार:
1951 में लखनऊ विश्वविद्यालय में दिए गए एक भाषण में उन्होंने कहा था कि पारंपरिक हिंदू धर्म की रूढ़िवादी विचारधारा आधुनिक युग के अनुकूल नहीं है और यदि इसे राजनीतिक व्यवस्था का आधार बनाया गया, तो यह राष्ट्र के विभाजन का कारण बन सकती है।
2. इंदिरा गांधी
मुख्य विचारधारा: सार्वजनिक शासन में धर्मनिरपेक्षता का पालन करती थीं और संस्थागत धर्म को सरकारी कामकाज से अलग रखती थीं (हालांकि अपने जीवन के उत्तरार्ध में वे विभिन्न प्रमुख मंदिरों के दर्शन के लिए जाती थीं)।
व्यक्तिगत पूजा और मंदिरों पर बयान:
1970 और 1980 के दशक में अंतर्राष्ट्रीय मीडिया को दिए गए साक्षात्कारों में, जब उनसे उनकी व्यक्तिगत धार्मिक मान्यताओं और पूजा-पाठ के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा था:
"यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप 'धर्म' शब्द का क्या अर्थ निकालते हैं। निश्चित रूप से, मैं मंदिरों में जाकर देवताओं से प्रार्थना करने जैसी चीजें नहीं करती हूँ।"
3. राहुल गांधी
मुख्य विचारधारा: वे 'हिंदू धर्म' (जिसे वे एक खुला, शांतिपूर्ण और आध्यात्मिक विचार मानते हैं) और 'हिंदुत्व' (जिसे वे एक राजनीतिक विचारधारा मानते हैं) के बीच स्पष्ट अंतर रेखा खींचते हैं।
हिंदू धर्म बनाम हिंदुत्व (12 नवंबर 2021):
वर्धा (महाराष्ट्र) में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था:
"हिंदू धर्म और हिंदुत्व में क्या अंतर है? क्या ये दोनों एक ही चीज़ हैं? अगर ये एक ही हैं, तो इनका नाम एक जैसा क्यों नहीं है? ... क्या हिंदू धर्म किसी सिख या मुस्लिम को पीटना सिखाता है? नहीं। लेकिन हिंदुत्व ऐसा करता है... हिंदू धर्म नफरत या हिंसा का रास्ता नहीं दिखाता, जबकि हिंदुत्व डर और नफरत का इस्तेमाल करता है।"
लोकसभा में वक्तव्य (1 जुलाई 2024):
संसद में बोलते हुए उन्होंने सत्तारूढ़ दल की ओर इशारा करते हुए कहा था:
"जो लोग 24 घंटे खुद को हिंदू कहते हैं, वे हिंसा, नफरत और असत्य में लिप्त हैं।"
स्पष्टीकरण: इस बयान पर लोकसभा में भारी हंगामा हुआ था। बाद में राहुल गांधी ने सदन में स्पष्ट किया कि उनका यह बयान पूरे हिंदू समुदाय के लिए नहीं, बल्कि केवल भाजपा और आरएसएस की राजनीतिक कार्यशैली और विचारधारा के संदर्भ में था।
No comments:
Post a Comment