इंडिया अगेंस्ट करप्शन (IAC) और जन लोकपाल आंदोलन (2011) से जुड़े प्रमुख नेता और संस्थापक सदस्य, जिन्होंने समय के साथ अरविंद केजरीवाल से मतभेदों के कारण पार्टी छोड़ दी या जिन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया:
1. आंदोलन के दौर में ही अलग हुए प्रमुख चेहरे (2012)
अन्ना हजारे (नवंबर 2012):
अलगाव का कारण: अन्ना हजारे का मानना था कि भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को पूरी तरह गैर-राजनीतिक रहना चाहिए। जब केजरीवाल ने राजनीतिक पार्टी (AAP) बनाने का फैसला किया, तो अन्ना उनसे अलग हो गए और स्पष्ट किया कि वे किसी राजनीतिक दल में शामिल नहीं होंगे।
किरण बेदी (2012):
अलगाव का कारण: IAC आंदोलन की मुख्य सदस्य रहीं किरण बेदी ने भी केजरीवाल के राजनीति में प्रवेश करने के फैसले से असहमति जताई। बाद में वह 2015 के दिल्ली चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार बनीं।
न्यायमूर्ति एन. संतोष हेगड़े (2012):
अलगाव का कारण: जन लोकपाल बिल के ड्राफ्टिंग पैनल के सदस्य रहे पूर्व लोकायुक्त संतोष हेगड़े ने आंदोलन के राजनीतिकरण पर आपत्ति जताते हुए केजरीवाल का साथ छोड़ दिया।
2. AAP के गठन और शुरुआती वर्षों में बाहर हुए नेता (2014–2015)
शाजिया इल्मी (मई 2014):
अलगाव का कारण: IAC की प्रमुख वक्ता और AAP की संस्थापक सदस्य शाजिया इल्मी ने मई 2014 में पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र खत्म हो चुका है और कुछ गिने-चुने लोगों की मंडली ही सारे निर्णय लेती है। बाद में वह बीजेपी में शामिल हो गईं।
प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव (अप्रैल 2015):
अलगाव का कारण: AAP के मुख्य संस्थापकों में शामिल वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण और विचारक योगेंद्र यादव ने 2015 में केजरीवाल के काम करने के तरीके, निर्णय लेने की प्रक्रिया और 'आंतरिक लोकतंत्र की कमी' पर गंभीर सवाल उठाए।
कार्रवाई: 4 मार्च 2015 को दोनों को पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी (PAC) से हटाया गया और 20 अप्रैल 2015 को अनुशासनहीनता का आरोप लगाकर पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। बाद में उन्होंने 'स्वराज अभियान' नामक संगठन बनाया।
शांति भूषण (2015):
अलगाव का कारण: पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री और AAP के संस्थापक सदस्य (जिन्होंने पार्टी की नींव के लिए 1 करोड़ रुपये का शुरुआती चंदा दिया था) अपने बेटे प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव के निष्कासन के बाद पार्टी से पूरी तरह निष्क्रिय और दूर हो गए।
प्रो. आनंद कुमार और अजीत झा (अप्रैल 2015):
अलगाव का कारण: JNU के पूर्व प्रोफेसर आनंद कुमार और अजीत झा को भी प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव का समर्थन करने के कारण अप्रैल 2015 में पार्टी से बाहर निकाल दिया गया।
3. दिल्ली सरकार और संगठन विस्तार के दौरान बाहर हुए प्रमुख नेता (2017–2020)
कपिल मिश्रा (मई 2017):
अलगाव का कारण: दिल्ली सरकार में जल मंत्री रहे कपिल मिश्रा ने केजरीवाल पर सीधे वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। मई 2017 में उन्हें मंत्री पद से हटाया गया और बाद में पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। वह 2019 में बीजेपी में शामिल हो गए।
आशुतोष (अगस्त 2018):
अलगाव का कारण: वरिष्ठ पत्रकार से नेता बने आशुतोष, जो पार्टी के प्रमुख चेहरों में से एक थे, उन्होंने अगस्त 2018 में निजी कारणों का हवाला देकर इस्तीफा दे दिया। हालांकि, रिपोर्ट्स के अनुसार वे राज्यसभा टिकटों के बंटवारे और आंतरिक कार्यप्रणाली से नाराज थे।
कुमार विश्वास (2018–2022 के बीच निष्क्रिय/अलग):
अलगाव का कारण: IAC आंदोलन के सबसे लोकप्रिय चेहरों में से एक और AAP के संस्थापक सदस्य कुमार विश्वास का नेतृत्व से तीखा मतभेद हुआ। 2018 में राज्यसभा टिकट न दिए जाने के बाद उनका टकराव बढ़ गया। उन्होंने औपचारिक इस्तीफा नहीं दिया, लेकिन धीरे-धीरे पार्टी से पूरी तरह दूर हो गए।
एच.एस. फुल्का (जनवरी 2019):
अलगाव का कारण: वरिष्ठ वकील और पंजाब में AAP के प्रमुख नेता फुल्का ने यह कहते हुए इस्तीफा दिया कि जन आंदोलन को राजनीतिक दल में बदलना एक बड़ी गलती थी।
अलका लांबा (सितंबर 2019):
अलगाव का कारण: पूर्व विधायक अलका लांबा के नेतृत्व के साथ गंभीर मतभेद रहे। सितंबर 2019 में उन्होंने AAP से इस्तीफा देकर पुनः कांग्रेस पार्टी का दामन थाम लिया।
4. हालिया दौर और प्रमुख निष्कासन/अलगाव (2024–2026)
स्वाति मालीवाल (2024 से मतभेद):
अलगाव का कारण: दिल्ली महिला आयोग (DCW) की पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल का केजरीवाल के निजी स्टाफ (विभव कुमार) के साथ हुए विवाद के बाद पार्टी नेतृत्व से तीखा टकराव हुआ। वह आधिकारिक रूप से पार्टी में रहते हुए भी पार्टी की नीतियों के खिलाफ मुखर हैं।
कैलाश गहलोत (नवंबर 2024):
अलगाव का कारण: दिल्ली सरकार में वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री रहे कैलाश गहलोत ने पार्टी के आंतरिक संकटों और केंद्र सरकार के साथ लगातार टकराव की राजनीति का हवाला देते हुए AAP से इस्तीफा दे दिया और बीजेपी में शामिल हो गए।
राघव चड्ढा (अप्रैल 2026):
अलगाव का कारण: राज्यसभा में AAP के उप-नेता रहे राघव चड्ढा को पद से हटाए जाने के बाद पार्टी से मतभेद उभरे। इसके बाद उन्होंने पार्टी छोड़कर अन्य सांसदों के साथ भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया।
मुख्य बिंदु
2011 के इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन की मुख्य 'कोर टीम' (अन्ना हजारे, अरविंद केजरीवाल, प्रशांत भूषण, किरण बेदी, शांति भूषण, कुमार विश्वास, योगेंद्र यादव, संतोष हेगड़े, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह) में से केवल अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह ही AAP में बचे रह गए, जबकि आंदोलन का बौद्धिक और वैचारिक आधार माने जाने वाले अधिकतर साथी या तो खुद दूर हो गए या पार्टी से निकाल दिए गए।
इंडिया अगेंस्ट करप्शन (IAC) आंदोलन और आम आदमी पार्टी (AAP) की शुरुआत से जुड़े कई प्रमुख नेताओं ने समय-समय पर अरविंद केजरीवाल का साथ छोड़ दिया और दूसरी राजनीतिक पार्टियों का रुख किया।
उन प्रमुख नेताओं की सूची, उन्होंने किस पार्टी का दामन थामा और वर्तमान में उनकी क्या स्थिति है:
1. भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने वाले प्रमुख नेता
किरण बेदी (Kiran Bedi)
शामिल पार्टी: भारतीय जनता पार्टी (BJP) — 2015 में शामिल हुईं।
तत्कालीन स्थिति: 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में BJP ने उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतारा था, लेकिन वे चुनाव हार गईं।
वर्तमान स्थिति: बाद में केंद्र सरकार ने उन्हें पुडुचेरी का उपराज्यपाल (Lieutenant Governor) नियुक्त किया, जहाँ वे 2016 से 2021 तक पद पर रहीं। वर्तमान में वे सक्रिय राजनीति से दूरी बनाकर सामाजिक कार्यों और लेखन से जुड़ी हुई हैं।
कैलाश गहलोत (Kailash Gahlot)
शामिल पार्टी: भारतीय जनता पार्टी (BJP) — नवंबर 2024 में शामिल हुए।
तत्कालीन स्थिति: केजरीवाल सरकार में परिवहन और गृह जैसे महत्वपूर्ण विभागों के कैबिनेट मंत्री थे। पार्टी के अंदरूनी संकटों का हवाला देकर इस्तीफा दिया।
वर्तमान स्थिति: वर्तमान में BJP में एक प्रमुख नेता के रूप में सक्रिय हैं और दिल्ली के राजनीतिक मामलों में पार्टी का प्रतिनिधित्व करते हैं।
राघव चड्ढा (Raghav Chadha)
शामिल पार्टी: भारतीय जनता पार्टी (BJP) — अप्रैल 2026 में शामिल हुए।
तत्कालीन स्थिति: AAP के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पंजाब से राज्यसभा सांसद थे।
वर्तमान स्थिति: BJP में शामिल होने के बाद वे राज्यसभा सांसद के रूप में कार्य कर रहे हैं और उन्हें राज्यसभा की याचिका समिति (Committee on Petitions) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
कपिल मिश्रा (Kapil Mishra)
शामिल पार्टी: भारतीय जनता पार्टी (BJP) — 2019 में शामिल हुए।
तत्कालीन स्थिति: दिल्ली सरकार में जल मंत्री थे। केजरीवाल पर आरोप लगाने के बाद उन्हें हटाया गया था।
वर्तमान स्थिति: वर्तमान में दिल्ली BJP के प्रदेश उपाध्यक्ष के रूप में कार्य कर रहे हैं और पार्टी के एक मुखर प्रवक्ता हैं।
शाजिया इल्मी (Shazia Ilmi)
शामिल पार्टी: भारतीय जनता पार्टी (BJP) — 2015 में शामिल हुईं।
तत्कालीन स्थिति: AAP की संस्थापक सदस्य और मुख्य मीडिया चेहरा थीं।
वर्तमान स्थिति: वर्तमान में BJP की आधिकारिक राष्ट्रीय प्रवक्ता (National Spokesperson) हैं और टीवी बहसों में प्रमुखता से पार्टी का पक्ष रखती हैं।
विनोद कुमार बिन्नी (Vinod Kumar Binny)
शामिल पार्टी: भारतीय जनता पार्टी (BJP) — 2015 में शामिल हुए।
तत्कालीन स्थिति: 2013 में लक्ष्मी नगर से AAP के टिकट पर विधायक बने थे।
वर्तमान स्थिति: 2015 का चुनाव हारने के बाद से वे मुख्यधारा की सक्रिय राजनीति में काफी हद तक नेपथ्य में चले गए हैं।
2. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) में शामिल होने वाले नेता
अलका लांबा (Alka Lamba)
शामिल पार्टी: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) — सितंबर 2019 में वापसी की।
तत्कालीन स्थिति: चांदनी चौक से AAP की विधायक थीं।
वर्तमान स्थिति: वर्तमान में ऑल इंडिया महिला कांग्रेस (All India Mahila Congress) की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और कांग्रेस पार्टी की प्रमुख राष्ट्रीय वक्ता हैं।
देवेंद्र सहरावत (Devinder Sehrawat)
शामिल पार्टी: पहले BJP और फिर स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के तहत कांग्रेस/अन्य गतिविधियों से जुड़े।
तत्कालीन स्थिति: बिजवासन से AAP के विधायक थे।
वर्तमान स्थिति: इस समय किसी प्रमुख पद पर नहीं हैं और चुनावी राजनीति में ज्यादा सक्रिय नहीं दिखते।
3. अन्य दलों या स्वतंत्र रहने वाले प्रमुख संस्थापक सदस्य
योगेंद्र यादव (Yogendra Yadav)
बनाई पार्टी/संगठन: 'स्वराज अभियान' और 'जय किसान आंदोलन'।
वर्तमान स्थिति: उन्होंने कोई पारंपरिक राजनीतिक दल ज्वाइन नहीं किया। वे एक प्रमुख राजनीतिक विश्लेषक, सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक समाज आंदोलनों (जैसे किसान आंदोलन) में मुख्य रणनीतिकार के रूप में काम कर रहे हैं।
प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan)
वर्तमान स्थिति: किसी राजनीतिक दल में शामिल नहीं हुए। वे सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में जनहित याचिकाओं (PIL) और न्यायिक सुधारों के लिए काम कर रहे हैं।
कुमार विश्वास (Kumar Vishwas)
वर्तमान स्थिति: किसी औपचारिक राजनीतिक दल में शामिल नहीं हुए। वर्तमान में वे भारत और विदेशों में प्रसिद्ध मंच कवि, प्रखर वक्ता और रामकथा वाचक के रूप में बेहद सफल और सक्रिय हैं।
आशुतोष (Ashutosh)
वर्तमान स्थिति: राजनीति छोड़ दी। अब वे 'सत्य हिंदी' (Satya Hindi) नामक अपना डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म चलाते हैं और एक वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक के रूप में सक्रिय हैं।
निष्कर्ष
अरविंद केजरीवाल का साथ छोड़कर जाने वाले नेताओं में से बड़ी संख्या BJP में शामिल हुई (किरण बेदी, कैलाश गहलोत, राघव चड्ढा, कपिल मिश्रा, शाजिया इल्मी), जबकि कुछ ने कांग्रेस (अलका लांबा) चुनी। इसके अलावा, बौद्धिक वर्ग (योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, आशुतोष, कुमार विश्वास) ने चुनावी राजनीति से किनारा कर पत्रकारिता, वकालत और सामाजिक सक्रियता का रास्ता अपनाया।
आम आदमी पार्टी (AAP) के उन प्रमुख नेताओं की सूची, जो कानूनी मुकदमों, जेल, जमानत या गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे हैं:
1. प्रमुख नेता जो जेल में रहने के बाद जमानत पर बाहर हैं (Pending Trial)
ये वे शीर्ष नेता हैं जिन्हें केंद्रीय जांच एजेंसियों (ED/CBI) ने गिरफ्तार किया था और लंबा समय जेल में बिताने के बाद सुप्रीम कोर्ट या निचली अदालत से जमानत मिली है:
अरविंद केजरीवाल (AAP के राष्ट्रीय संयोजक व पूर्व मुख्यमंत्री, दिल्ली)
मामला: दिल्ली आबकारी नीति (शराब नीति) 2021-22 में कथित वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप।
वर्तमान स्थिति: ED द्वारा मार्च 2024 और CBI द्वारा जून 2024 में गिरफ्तारी के बाद तिहाड़ जेल में रहे। सुप्रीम कोर्ट द्वारा शर्तों के साथ नियमित जमानत मंजूर किए जाने के बाद वर्तमान में जमानत पर बाहर हैं।
मनीष सिसोदिया (पूर्व उप-मुख्यमंत्री, दिल्ली)
मामला: आबकारी नीति का मुख्य प्रारूप तैयार करने और निजी शराब कारोबारियों को फायदा पहुंचाने के आरोप।
वर्तमान स्थिति: CBI द्वारा फरवरी 2023 और ED द्वारा मार्च 2023 में गिरफ्तार किए गए थे। लगभग 17 महीने जेल में बिताने के बाद अगस्त 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दी।
संजय सिंह (राज्यसभा सांसद)
मामला: आबकारी नीति मामले में मुख्य आरोपियों और नेताओं के बीच बिचौलिए की भूमिका निभाने के आरोप।
वर्तमान स्थिति: अक्टूबर 2023 में ED द्वारा गिरफ्तार किए गए थे। अप्रैल 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने ED द्वारा आपत्ति न जताए जाने के बाद जमानत दे दी।
सत्येंद्र जैन (पूर्व स्वास्थ्य व PWD मंत्री, दिल्ली)
मामला: 2015-16 के दौरान फर्जी (शेल) कंपनियों के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग करने का आरोप (PMLA एक्ट के तहत)।
वर्तमान स्थिति: मई 2022 में गिरफ्तार किए गए थे। 2 साल से अधिक समय तिहाड़ जेल में बिताने के बाद अक्टूबर 2024 में दिल्ली की अदालत ने सुनवाई में देरी के आधार पर जमानत दी।
विजय नायर (पूर्व मीडिया/संचार प्रभारी)
मामला: शराब नीति मामले में AAP नेताओं और 'साउथ ग्रुप' के बीच मुख्य संपर्ककर्ता होने का आरोप।
वर्तमान स्थिति: सितंबर 2022 में गिरफ्तार हुए थे और लगभग 2 साल जेल में रहने के बाद सितंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली।
2. दोषी ठहराए गए (Convicted) या गंभीर स्थानीय आरोपों का सामना कर रहे नेता
सोमनाथ भारती (AAP विधायक व पूर्व कानून मंत्री)
मामला: 2016 में AIIMS अस्पताल परिसर में एम्स सुरक्षाकर्मियों के साथ हाथापाई और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का मामला।
वर्तमान स्थिति: 2021 में दिल्ली की अदालत ने दोषी ठहराते हुए 2 साल की सजा सुनाई थी। उच्च अदालत से सजा पर रोक/जमानत मिलने के कारण अपील लंबित है। इसके अलावा 2015 के घरेलू हिंसा के मामले में भी उन पर कानूनी प्रक्रिया चल चुकी है।
अमानतुल्लाह खान (ओखला से विधायक)
मामला: दिल्ली वक्फ बोर्ड का अध्यक्ष रहते हुए वित्तीय अनियमितताओं, अवैध भर्तियों और संपत्तियों के दुरुपयोग के आरोप।
वर्तमान स्थिति: सितंबर 2024 में ED द्वारा वक्फ बोर्ड मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए थे। इन पर समय-समय पर कई स्थानीय मामले दर्ज रहे हैं।
3. अन्य चर्चित कानूनी मामले व पूर्व सहयोगी
विभव कुमार (अरविंद केजरीवाल के पूर्व निजी सहायक)
मामला: मई 2024 में मुख्यमंत्री आवास के भीतर AAP की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के साथ कथित मारपीट और अभद्रता का आरोप।
वर्तमान स्थिति: दिल्ली पुलिस द्वारा मई 2024 में गिरफ्तार किए जाने के बाद 100 से अधिक दिन जेल में रहे। सितंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने जमानत मंजूर की।
ताहिर हुसैन (पूर्व AAP पार्षद)
मामला: फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों को भड़काने, फंडिंग करने और IB अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप (UAPA और IPC की गंभीर धाराएं)।
वर्तमान स्थिति: मार्च 2020 में गिरफ्तारी के बाद से जेल में बंद हैं। हिंसा में नाम आने के तुरंत बाद AAP ने उन्हें पार्टी से निलंबित/निष्कासित कर दिया था।
निष्कर्ष
आबकारी नीति (Liquor Policy) मामले ने आम आदमी पार्टी के लगभग पूरे शीर्ष नेतृत्व को कानूनी मामलों में उलझा दिया। हालांकि, कानून के अनुसार जमानत मिलना किसी को निर्दोष साबित नहीं करता, लेकिन इन सभी मामलों में मुकदमों की सुनवाई (Trial) अभी अदालतों में लंबित है।

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