Saturday, July 4, 2026

रोगों से मुक्ति, रसोई के बीज

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अंक - 2:  रोगों से मुक्ति, उपयोग की विधियां

 रसोई के बीज: असाध्य रोगों से सुरक्षा की प्राचीन विरासत"}


अंक - 1 मैं हमने शीतलता एवं पाचन के बीज* एवं *रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता और ऊर्जा* के लिए उपयोगी बीजों के बारे मैं जाना। आज समझते हैं।

हृदय और हड्डियों की मजबूती (अस्थि पोषक बीज - आधुनिक लाइफस्टाइल के लिए जरूरी)*

अलसी (Tisi):

 डेस्क जॉब करने वालों में बढ़ते हाई कोलेस्ट्रॉल और वात रोगों की उत्तम दवा। हल्का भूनकर पीस लें। रोज सुबह एक चम्मच चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लें। यह नसों की ब्लॉकेज खोलने और ओमेगा-3 की कमी पूरी करने के लिए सर्वश्रेष्ठ है। आपको याद होगा जब बहुधा घर के बड़े बूढ़े अपनी सब्जी अथवा दाल मैं उसकी प्रकृति के अनुसार अलसी या सोंठ ऊपर से छिड़क कर खाते थे। विचार करे, ऐसा क्यों?

तिल:

आज हर दूसरे व्यक्ति में विटामिन-डी और कैल्शियम की कमी है। आयुर्वेद में तिल को हड्डियों के लिए 'अमृत' कहा गया है। सर्दियों में लड्डू के रूप में और गर्मियों में सीमित मात्रा में लें।

सूरजमुखी:

 यह विटामिन-ई से भरपूर है। स्क्रीन से होने वाले स्किन डैमेज को रोकने और त्वचा की चमक बनाए रखने के लिए इन्हें सलाद या स्मूदी में ऊपर से डालकर खाएं।


विशिष्ट उपचार और डीटॉक्स (शोधन करने वाले बीज)

मेथी:

 यह वात और कफ को शांत करती है। आधुनिक समय की सबसे बड़ी समस्या—डायबिटीज (शुगर) और जोड़ों के दर्द के लिए अचूक है। रात को एक चम्मच मेथी दाना भिगोएं, सुबह खाली पेट चबाकर खाएं और उसका पानी पिएं।

अजवाइन:

 यह पेट के कीड़ों और गैस के दर्द को नष्ट करती है। जंक फूड खाने के बाद होने वाले पेट दर्द या भारीपन में इसे गुनगुने पानी और नमक के साथ लें।

नीम के बीज (निंबोली):

 परम प्राकृतिक ब्लड पुरिफायर (रक्त शोधक)। वसंत और ग्रीष्म ऋतु में इनका सेवन रक्त को शुद्ध करता है और प्रदूषण के कारण होने वाले फोड़े-फुंसियों से बचाता है।

मूली के बीज:

 आयुर्वेद में इन्हें 'मूत्रल' (यूरिन साफ करने वाला) माना गया है। फैटी लिवर और लिवर की सफाई (Detox) के लिए इनका काढ़ा उपयोगी है।

अमरूद के बीज:

 आज की सुस्त जीवनशैली के कारण होने वाली पुरानी कब्ज (Constipation) में इन्हें फल के साथ चबाकर खाने से आंतों की सक्रियता बढ़ती है।

करेले के बीज:

 तिक्त (कड़वे) रस से भरपूर होने के कारण यह इंसुलिन को एक्टिव करते हैं और ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में बेहद प्रभावी हैं।

तुलसी के बीज:

इन्हें 'मनःशांति दायक' माना गया है। आज के कॉर्पोरेट और मानसिक तनाव, घबराहट तथा अनिद्रा (Insomnia) को कम करने के लिए इन्हें दूध या गुनगुने पानी में डालकर लें।

बीजों के उपयोग के आयुर्वेदिक नियम :

हमारे ऋषियों ने बिना सोचे-समझे कुछ भी खाने से मना किया है। मौसम के अनुसार बीजों का चयन करें; जैसे गर्मियों में सौंफ, धनिया, सब्जा और सर्दियों में तिल व अलसी। इन बीजों का पूर्ण लाभ तब मिलता है जब इन्हें *कांच या मिट्टी के बर्तन में रात भर भिगोकर सुबह उपयोग किया जाए*, क्योंकि भिगोने से इनके भीतर के पोषक तत्व जाग्रत (Activate) हो जाते हैं और इनकी तासीर सामान्य हो जाती है।

विभिन्न प्रकार के बीजों (जैसे कद्दू, तरबूज, अलसी, सूरजमुखी आदि) को एक साथ मिलाकर *नमकीन या रोस्टेड स्नैक* के रूप में उपयोग करना *बिल्कुल उचित और स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है।

 आज की आधुनिक और व्यस्त जीवनशैली में यह बाजार के अनहेल्दी, मैदे और प्रिजर्वेटिव्स वाले चिप्स-नमकीन का एक बेहतरीन, प्राकृतिक और पौष्टिक विकल्प (Alternative) है।

हालांकि, आयुर्वेद और पोषण विज्ञान (Nutrition Science) के अनुसार इसे तैयार करते और खाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है, ताकि इसका पूरा लाभ मिले और कोई नुकसान न हो:

मिक्स बीज स्नैक के लाभ

 पोषक तत्वों का पावरहाउस_ (Nutrient Dense): 

जब आप कई बीजों को मिलाते हैं, तो आपको एक साथ ओमेगा-3 फैटी एसिड, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, जिंक और भरपूर फाइबर मिल जाता है।

लंबे समय तक ऊर्जा:

 यह स्नैक प्रोटीन और गुड फैट्स से भरपूर होता है, जिससे थोड़ी मात्रा में खाने पर भी पेट भरा रहता है और ऑफिस या काम के बीच होने वाली 'क्रैविंग्स' (भूख) शांत होती है।

लो-कार्ब स्नैक:

 यह वजन घटाने और ब्लड शुगर (डायबिटीज) को नियंत्रित रखने वाले लोगों के लिए सबसे सुरक्षित स्नैक है।

मिक्स बीज नमकीन बनाते समय इन 4 बातों का रखें ध्यान:*

1. तासीर का संतुलन (Balancing the Nature):

सभी बीजों की तासीर एक जैसी नहीं होती। जैसे कद्दू, तरबूज और खरबूजे के बीज (मगज) थोड़े ठंडे या सामान्य होते हैं, जबकि अलसी और तिल की तासीर गर्म होती है। इसलिए:

गर्मियों में:

 मगज (तरबूज, खरबूजा, कद्दू) और सूरजमुखी के बीजों की मात्रा ज्यादा रखें। अलसी और तिल बहुत कम डालें।

 सर्दियों में:

आप अलसी और तिल की मात्रा बढ़ा सकते हैं।

2. हल्का भूनना (Dry Roasting) है जरूरी:

बीजों को हमेशा  धीमी आंच पर सूखा (Dry Roast) भूनें। भूनने से उनके भीतर के एंटी-पोषक तत्व (Phytic Acid) नष्ट हो जाते हैं, जिससे शरीर इन्हें आसानी से पचा पाता है। साथ ही, वे कुरकुरे और स्वादिष्ट हो जाते हैं।

3. तेल और नमक की मात्रा:

बाजार जैसी नमकीन बनाने के लिए इन्हें बहुत ज्यादा तेल में न तलें और न ही अत्यधिक सफेद नमक का प्रयोग करें। भूनते समय केवल कुछ बूंदें गाय का घी या सेंधा नमक/काला नमक और काली मिर्च का उपयोग करें। यह इसके औषधीय गुणों को बनाए रखता है।

4. कौन से बीज साथ न मिलाएं?

कुछ बीजों को इस सूखे स्नैक मिक्चर में *नहीं* मिलाना चाहिए, जैसे— *सब्जा (तुलसी के बीज) और चिया बीज*। इन बीजों को हमेशा पानी में भिगोकर ही खाया जाता है; इन्हें सूखा भूनकर या चबाकर खाने से ये पेट में जाकर पानी सोख लेते हैं और पाचन खराब कर सकते हैं।

उपभोग का सही तरीका:


चूंकि बीज भारी (Heavy to digest) होते हैं और इनमें तेल (Good Fats) की मात्रा अधिक होती है, इसलिए *दिनभर में 1 से 2 चम्मच (लगभग 15-20 ग्राम)* मिक्स बीज का स्नैक खाना पर्याप्त है। इसे आप शाम की चाय के साथ या सुबह के नाश्ते में ले सकते हैं।

पश्चिमी देशों की देखा-देखी महँगे फैशनेबल डिब्बाबंद 'सीड्स' खरीदने के बजाय यदि हम अपनी ही रसोई में झांकें, तो हमारे पास सेहत का एक पूरा खजाना मौजूद है। हमारे पूर्वजों ने इन बीजों को मसालों के रूप में हमारी थाली में ऐसे ही शामिल नहीं किया था, उसके पीछे गहरा विज्ञान था। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम विज्ञापनों के भ्रम से बाहर निकलें, महँगे रसायनों वाली दवाइयों के बजाय इन प्राकृतिक सुपरफूड्स को अपनाएं और अपनी गौरवशाली विरासत व स्वास्थ्य दोनों की रक्षा करें।

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