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Sunday, December 17, 2017

Victory Of BJP In Gujarat And Himachal Pradesh

MODI LED BJP is going to win elections both in Gujarat & Himachal Pradesh. This victory of BJP has once again established the fact  that campaign through  fake news and spreading of  misinformation on social sites and TV  have failed to change the minds of voters to the extent it was desired to award congress  party with victory. 

It is more important to stress here that BJP not only won HP taking advantage of anti incumbency against ruling Congress Party in HP but also won Gujarat even under the atmosphere of fear of loosing due to anti incumbency of 22 years .

Till yesterday Modi opponents were expecting victory because they formed their  opinion by seeing biased debate on TV channels and by reading misinterpreted information and misinformation running on social sites by well wishers of Congress Party or by a gang of haters against Modi or BJP or RSS. Today they will realise the ground reality.

Voters were not as much unhappy and annoyed  with GST and demonetisation  as Rahul Gandhi was crying against it. Rahul Gandhi had made GST and demonetisation as core issue in the election campaign and tried his best to win sympathy of voters there in favour of Congress Party . But he and his party miserably failed in converting  untruth to truth. It is worthwhile to mention here that BJP never used GST and demonetisation as agenda of election in Gujarat and HP.

Some people have deep rooted  hatredness towards BJP and Modi  and hence they are mostly prejudiced. Their evil coloured spec laded on eyes could not assess the growth taken place during 22 years rule of BJP and pitiably failed to read the pulse of voters. They considered GST and Demonetisation as their  Brahamastra to fight out BJP in ALL  elections  held in last 12 months.

Obviously  current victory of BJP in Gujarat  and HP  is enough to prove that voters are comfortable  not only with  Modi  and BJP but also with GST and demonetisation. 

It is important  to say that as soon as congress party went ahead of BJP during counting process , shared market fell drastically  by more than 800 points and as soon as market realised that victory of BJP was certain, the same market went up by more than 300 points. This also indicates  that share market and  business  community as a whole have more trust  on BJP led governments and specially on Modi than Rahul Gandhi  led Congress Party or Hardik Patel or other two youths who were continuously engaged in hate campaign  against  Modi.

Some TV channels were fully busy in creating positive environment  in favour of Hardik, Agnesh and Rahul Gandhi but they failed to ensure Victory for corrupt Congress Party. I hope now anchors on TV and writers on social sites will discard caste and communal  politics and they will refrain from focusing on news which results in division of society and which lead to communal disharmony. I say so because in this modern era of social sites and TV channels , role of media is very important in making lovely social relations and in keeping peace in society along with growth .

In the interest of all Indians  it is duty of all of us also to give value to development  and growth only and not swayed away and cheated by false news makers . 

Results of election held in last 12 months provide  a lesson for newly made President of Congress Party to understand that only negativity against a person or a party cannot result in  a success. 

Rahul Gandhi is now heading a more than hundred year old Congress Party and he should assert himself and focus on long cherished ideals of his party instead of depending on regional small parties or on childish , inexperienced and caste oriented leaders like Hardik Patel leaders , or Jignesh Thakur or  Kanhaiya or other hate mongers. He must focus on growth plans only and prove his caliber in states where his party is in power. 

Mere promising loan waiver to farmers on the eve of election  or reservation for some group or the other or promise to give stipend to unemployed youths may give negligible advantage , rather it generates more enemies than friends in the long run. 

It is only good performance which lasts long. Rahul Gandhi has to teach his colleagues not to indulge in negativity but focus on their area to win real sympathy from public.  Modi by his concerted effort and best possible performance in Gujarat during 14 years of rule as CM has won the heart of not only Gujaratis but all Indians. He as Prime Minister of the country has done unprecedented good work in last three and half years . He never talks of caste or community but always focus on Sabka Sath Sabka Vikas. There is heaven and hell difference between Modi and Rahul Gandhi 

Position of election result as on 18th December 2017  as per website of election commissioner is as follows 

गुजरात के पिछले 6 विधानसभा चुनावों में वोट शेयर कुछ इस तरह से है-

1995 : बीजेपी 42.5 ; कांग्रेस 32.9

1998 : बीजेपी 44.8 ; कांग्रेस 34.9

2002 : बीजेपी 49.9 ; कांग्रेस 39.3

2007 : बीजेपी 49.1 ; कांग्रेस 39.1

2012 : बीजेपी 47.9 ; कांग्रेस 38.9

2017 : बीजेपी 49.1 ; कांग्रेस 41.4

इस 2017 के चुनाव में बीजेपी ने वो 15 सीटें हारी है जहां 'नोटा' पर पड़े वोट बीजेपी द्वारा कांग्रेस से हारे गये अंतर से ज्यादा थे और यह इसलिए प्रतिस्थापित होता है क्योंकि *'नोटा' हमेशा सत्ताधारी दल के विरुद्ध आक्रोश* को प्रदशित करता है।

और राज्यों के चुनाव से अलग गुजरात मे 'नोटा' को 2% वोट शेयर मिला है जो बहुत ज्यादा है। यह साफ स्पष्ट करता है कि *बीजेपी के ही वोटर ने अपना आक्रोश कांग्रेस को वोट न देकर*,  'नोटा' पर बटन दबा कर, बीजेपी के प्रत्याशी को वोट नहीं किया है।


2019 में ऐसा नही होगा।

14 सीटों पर भाजपा केवल नोटा के कारण हारी है.....।
     सीट                       नोटा को वोट         हार का अन्तर
1.Chota  Udaipur           5870                 1093
2.Dangs                          2184                   768       
3.Dasada                        3796                 3728         
4.Deodar                        2988                  972  
5.Dhanera                      3214                2518
6.Kaprada(S                   3868                   170
7.Mansa                          3000                  524
8.Modasa                        3515                  147
9.Morbi                           3069                 3069
10.Morva Hadaf             4962                 4366 
11.Sojitra                        3112                  2388
12.Talaja                          2918                 1779
13.Wankner                    3170                 1361
14.Lunawada                  3419                  3200 

लगता है कि जनता में भाजपा के प्रति गुस्सा तो था लेकिन जनता भाजपा को हटाना नही चाहती थी... 

सबक देना चाहती थी, कांग्रेस के प्रति कोई प्रेम नही था..!!

चुनाव आयोग की रिपोर्ट ने खोली कांग्रेस के ‘नैतिक विजय’ की पोल-पट्टी
Another analysis of result is as follows which is posted on WhatsApp  by a member on 28.12.2017.
गुजरात चुनाव में भाजपा को मिली जीत के बारे में यह कहा गया कि भाजपा को प्राप्त परिणाम ‘बहुत अच्छे नहीं’ हैं। न केवल कांग्रेस बल्कि अधिकांश मीडिया हाउसों ने भी इन परिणामों को कांग्रेस के लिए एक बड़ी नैतिक जीत के रूप में चित्रित किया और कहा कि नरेंद्र मोदी की यह जीत उनके कवच पर एक दरार के समान है। गुजराती, हिंदी और अंग्रेजी भाषा के अधिकांश अखबारों ने गुजरात चुनाव के नतीजों को कांग्रेस के लिए एक नैतिक विजय या नवसर्जन के रूप में चित्रित किया (“नवसर्जन गुजरात” कांग्रेस गुजरात अभियान की टैगलाइन थी)।
गुजरात चुनाव से प्राप्त परिणामों के एक दिन बाद मीडिया को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि प्रधान मंत्री मोदी के पास विश्वसनीयता की समस्या है और राहुल गांधी ने गुजरात चुनावों में एक नैतिक जीत प्राप्त करने का दावा भी किया। राहुल गांधी मात्र इतने पर ही नहीं रुके और उन्होंने इस बारे में ट्वीट भी किया कि “मोदीजी का जो विकास मॉडल है, उसे गुजरात के लोग नहीं मानते, वो अंदर से खोखला है। मोदीजी की विश्वसनीयता पर बहुत बड़ा सवाल उठ गया है। वो जो कह रहे हैं, उनका संगठन उसे दोहरा रहा है, लेकिन देश उसको सुन नहीं रहा।”
वास्तविक तथ्य (डेटा) राहुल गांधी के नैतिक विजय   के दावे के साथ सहमत नही है।
आइए इन तथ्यों की समीक्षा करें –
◆ भाजपा ने 2012 में 115 सीटें जीती थीं जिसमें उसने अपनी 81 सीटें बरकरार रखीं। जबकि कांग्रेस 61 सीटों में से केवल 42 सीटों को ही बरकरार रख सकी। इस प्रकार भाजपा का सीटें बरकारार रखने का प्रतिशत 70.43 प्रतिशत रहा और कांग्रेस के लिए ये प्रतिशत 68.85 प्रतिशत रहा। इस प्रकार आंकड़े बताते हैं कि इस चुनाव में भी लोगों ने भाजपा पर वैसा ही विश्वास दिखाया जैसा उन्होंने पिछले चुनाव में दिखाया था।

◆ इतना ही नहीं ये 81 सीटें, जो भाजपा ने बरकरार रखीं, में से 48 सीटों पर भाजपा ने बड़े अंतर से जीत हासिल की। जो कि बरकरार रखी गयी सीटों का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा है। मोटे तौर पर देखा जाए तो, इन 48 सीटों पर जीत का यह अंतर 11.5 लाख वोट से अधिक है (गुजरात में कुल मतदान का लगभग 3.8 प्रतिशत)। इसलिए, न केवल लोगों ने भाजपा में विश्वास दिखाया है बल्कि उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया है कि भाजपा चुनावों में शानदार अंतर के साथ विजय हासिल करे।

◆ 33 सीटों में से 17 सीटें जो भाजपा कांग्रेस से हार गई, उनमें भी जीत का अंतर 5000 वोटों से कम था।

◆ 16 में से 10 सीटें भाजपा ने कांग्रेस से छीनी हैं और 2012 के मुकाबले भाजपा को कांग्रेस से बेहतर अंतर से जीत प्राप्त हुई है।

◆ कांग्रेस के द्वारा जीती हुई 77 सीटों में से 11 सीटों की जीत का अंतर नोटा वोटों की संख्या से भी कम था।

◆ मोटे तौर पर, हर 2 गुजराती वोटर में से 1 ने भाजपा पर भरोसा किया है, जो भाजपा का वोट शेयर दर्शाता है, जो 2012 में 47.85 प्रतिशत से बढ़कर 2017 में 49.1 प्रतिशत हो गया।

◆ भाजपा के 20 उम्मीदवारों ने 50,000 से अधिक वोटों के अंतर के साथ चुनाव जीता है। जबकि कांग्रेस का केवल एक उम्मीदवार ही इस उपलब्धि को 50776 वोटों के साथ हासिल कर पाया।
इन तथ्यों (डेटा) और मतदान पैटर्न का विश्लेषण करने के बाद, कोई मूर्ख ही होगा जो इसे कांग्रेस की नैतिक जीत कहेगा।

वास्तविकता ये है कि कांग्रेस ने 2017 के गुजरात चुनाव में एक अच्छा प्रदर्शन करने में कामयाबी हासिल की, वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि *कांग्रेस ने वहाँ जातिगत* खेल खेला। 

तथ्य यह साबित करते हैं...
*गुजरात के लोगों ने भाजपा को फिर से सत्ता में लाने के लिए "अधिक प्रेम और अधिक वोट" दिए हैं।*

कांग्रेस को अपने भाग्यशाली सितारों का शुक्रिया अदा करना चाहिए कि वे *अपने जाति के खेल में कामयाब* रहे, अन्यथा-
कांग्रेस 2012 में जीती हुई 61 सीटों में से 30 सीटों पर ही सिमट जाती।

स्रोत: ये डेटा *चुनाव आयोग की आधिकारिक परिणाम वेबसाइट* से 19-12-2017 को रात्रि 10:00 से रात्रि 10:30 के बीच संकलित किया गया था।

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