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Wednesday, October 18, 2017

News For Retirees

UNION BANK RETIRED EMPLOYEES' ASSOCIATION
To
All the regular recipients of our Association's e-mails,

Friends,

PF Optee Retirees of Union Bank are also eligible to join the Medical Insurance Scheme

    Please see the following e-mail received from Com.M.K.Mundul, Joint General Secretary, All India Union Bank Retirees' Federation.

Yours sincerely,
B.G.Raithatha,
General Secretary
Subject: PF Retiree Optees seeking to join Med Ins Scheme

It has been brought to our attention that PF retiree Optees are not aware that they too are eligible to join the Med Ins Scheme, started BY IBA/UFBU.

However, we are advising these retirees to fill in the annex form attached to Staff Circular 6674 and submit the same to CO.
Kindly ensure to include these cases along with new entrants to the Scheme.



Latest News:

Our Jt. General Secretary Com. M K Mundul has written a letter No. 128/17 dated 16/10/17 to MD & CEO of our bank requesting an early credit of pension for the month of October 2017 to enable pensioners to enjoy Diwali festival with their families.

We are happy to inform you that our coordinated efforts with Com. N. Shankar, GS, AIUBEA the management has agreed to release pension for Oct 17 on 18/10/2017.
We request every one to inform other colleagues.
RK Powar,GS, AIUBRF



*What is spiritual maturity?*
1. Spiritual Maturity is when you *stop trying to change others, ...instead focus on changing yourself.*
2. Spiritual Maturity is when you *accept people as they are.*
3. Spiritual Maturity is when you *understand everyone is right in their own perspective.*
4. Spiritual Maturity is when you *learn to "let go".*
5. Spiritual Maturity is when you are able to *drop "expectations" from a relationship and give for the sake of giving.*
6. Spiritual Maturity is when you *understand whatever you do, you do for your own peace.*
7. Spiritual Maturity is when you *stop proving to the world, how intelligent you are.*
8. Spiritual Maturity is when you *don't seek approval from others.*
9. Spiritual Maturity is when you *stop comparing with others.*
10. Spiritual Maturity is when you *are at peace with yourself.*
11. Spiritual Maturity is when you *are able to differentiate between "need" and "want" and are able to let go of your wants.*
& last but most meaningful !
12. You gain Spiritual Maturity when you *stop attaching "happiness" to material things !!*
"Wishing all a happy Spiritually matured life.



सिमित शब्द हो और
असीमित अर्थ हो...!
लेकिन इतना ही हो कि
शब्द से कष्ट ना हो...!!
शब्द महके तो "लगाव" करते हैं*
*और*
*शब्द बहके तो "घाव" करते हैं* ........
*"अनुभव कहता है*
*खामोशियाँ ही बेहतर हैं,*
*शब्दों से लोग रूठते बहुत हैं..."
*पर बहोत खामोश रिश्तें ज्यादा दिनों तक जिन्दा नहीं रहते........*
इसलिए जब थोड़ी फुरसत मिले अपने दिल की बात कह दीजिये........,
पर कभी भी बुद्धि को हड़ताल पर*
*जाने मत दिजीए *
*अन्यथा ज़ुबाँ ओवर टाइम काम*
*करने लगती है!*
*बोले इतना की सामनेवाला का
इज्जत का खयाल रहे
*जो दूसरों को इज़्ज़त देता है*
*असल में वो खुद इज़्ज़तदार होता है*
*क्योकि*
*इंसान दूसरो को वही दे पाता है*
*जो उसके पास होता है।*
*घमंड से अपना सर ऊँचा न करें*
*जीतने वाले भी अपना गोल्ड मैडल सिर झुका के हासिल करते हैं...*



एक बादशाह की आदत थी, कि वह भेस
बदलकर लोगों की खैर-ख़बर लिया करता था I

एक दिन अपने वज़ीर के साथ गुज़रते हुए
शहर के किनारे पर पहुंचा तो देखा एक
आदमी गिरा पड़ा हैl

बादशाह ने उसको हिलाकर देखा तो वह मर
चुका था ! लोग उसके पास से गुज़र रहे थे,
बादशाह ने लोगों को आवाज़ दी लेकिन
कोई भी उसके नजदीक नहीं आया,
क्योंकि लोग बादशाह को पहचान ना सके ।

बादशाह ने वहां रह रहे लोगों से पूछा क्या
बात है? इस को किसी ने क्यों नहीं उठाया?
लोगों ने कहा यह बहुत बुरा और गुनाहगार इंसान है ।।

बादशाह ने कहा क्या ये "इंसान" नहीं है?
और उस आदमी की लाश उठाकर उसके
घर पहुंचा दी, और उसकी पत्नी को लोगों
के रवैये के बारे में बताया ।।।

उसकी पत्नी अपने पति की लाश देखकर रोने लगी, और कहने लगी :
"मैं गवाही देती हूं मेरा पति बहुत नेक इंसान है"!!!!

इस बात पर बादशाह को बड़ा ताज्जुब हुआ कहने लगा I
"यह कैसे हो सकता है? लोग तो इसकी बुराई
कर रहे थे और तो और इसकी लाश को हाथ
तक लगाने को भी तैयार ना थे?"

उसकी बीवी ने कहा "मुझे भी लोगों से यही उम्मीद थीI

दरअसल हकीकत यह है कि मेरा पति हर रोज शहर के शराबखाने में जाता, शराब खरीदता और घर लाकर नालियों में डाल देता और कहता कि चलो कुछ तो गुनाहों का बोझ इंसानों से हल्का हुआ I

और रात में इसी तरह एक बुरी औरत यानी
वेश्या के पास जाता और उसको एक रात
की पूरी कीमत देता और कहता कि अपना
दरवाजा बंद कर ले, कोई तेरे पास ना आए I
घर आकर कहता ख़ुदा का शुक्र है,
आज उस औरत और नौजवानों के गुनाहों
का मैंने कुछ बोझ हल्का कर दिया,
लोग उसको उन जगहों पर जाता देखते थे I

मैं अपने पति से कहती "याद रखो जिस दिन
तुम मर गए, लोग तुम्हें नहलाने तक नहीं
आएंगे, ना तुम्हारी अर्थी को कंधा देने आएंगे ।

वह हंसते और मुझसे कहते कि घबराओ नहीं तुम देखोगी कि मेरी अर्थी वक्त का बादशाह और नेक लोग उठाएंगे....

यह सुनकर बादशाह रो पड़ा और कहने लगा मैं बादशाह हूं I कल हम इसको नहलायेंगे, इसकी अर्थी को कंधा देंगे, और इसका दाह संस्कार भी करवाएंगे l

आज हम बज़ाहिर कुछ देखकर या दूसरों से कुछ सुनकर, अहम फैसले कर बैठते हैं I
अगर हम दूसरों के दिलों के भेद जान जाएं, तो हमारी ज़बाने गूंगी हो जाएं,

किसी को गलत समझने से पहले देख लिया
करें कि वह ऐसा है भी कि नहीं ?
और हमारे सही या ग़लत कहने से सही
ग़लत नहीं हो जायेगा और जो ग़लत है
वो सही नहीं हो जायेगा ।

हम दूसरों के बारे में फैसला करने में महज़
अपना वक़्त ज़ाया कर रहे हैं..I बेहतर ये है
कि अपना कीमती वक़्त किसी की बुराई
करने की बजाय, अच्छी सोच के साथ परोपकार में लगाएं !!!

कहानी अच्छी लगती हो तो कृपया

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