Sunday, July 5, 2026

पिछले 50 वर्षों में भारत में धार्मिक स्थलों पर हुई चोरी

 अयोध्या राम मंदिर में चोरी सभी भारतीयों के लिए दुख की बात हैलेकिन चोरी की ऐसी घटनाएं कोई नई या अनोखी बात नहीं हैं। ऐसी चोरी के कई मामले पहले भी सामने आए हैं। 


सरकार को चोरों का पता लगाने और उन्हें कानून के मुताबिक सज़ा दिलाने के लिए हर संभव कोशिश करनी चाहिए। योगी सरकार इस दिशा में पूरी कोशिश कर रही है और हमें पूरा भरोसा है कि राम मंदिर के मामले में न्याय होगा और दोषियों को सज़ा मिलेगी।


लेकिन जो नेता सत्ता में नहीं हैं और मोदी और योगी से नफ़रत करते हैंवे इसे सत्ता से हटाने के हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने लगे हैं। मुझे लगता है कि यह उनकी नादानी हैउन्हें तो आगे आकर दोषियों को कानून के कटघरे में लाने में सरकार की मदद करनी चाहिए। 


अफ़सोस की बात है कि वे अपने फ़ायदे के लिए काम कर रहे हैंजो ईमानदार और बेगुनाह लोगों पर आरोप लगाकर सत्ता हथियाने की कोशिश कर रहे है , वो भी एक और तरह की चोरी के बराबर है। अगर वे गलत तर्क और बेबुनियाद दलीलें देकर किसी अच्छे इंसान की छवि खराब करने की कोशिश करते हैंतो भगवान उन्हें माफ़ नहींकरेंगे।



Theft in Ayodhya Ram temple is a matter of pain for all Indians but such incidents of theft are not new and unique. There are several instances of such theft which took place during preceding years.


 Government has to make best efforts to find out thieves and punish them as per law. Yogi government has been doing his best in this direction and we all are confident that justice will be with Ram Temple and guilty will be punished.


But politicians who are not in power and who hate Modi and Yogi have started using it as a weapon to dethrone them from power. 


I think it is their foolishness, rather they should come forward and help government in bringing guilty to face legal ordeal. If they feel any big fish is out of trap they should expose them with substantial evidence. After all , law has its own limitations. Court cannot allow arresting of any person on hearsay without evidence of proof of theft.


Unfortunately they are trying to serve their interest which also tantamount to another type of stealing power by accusing honest and innocent. 


God will not excuse them if they try to tarnish image of a good person by giving wrong logic and baseless arguments. 


पिछले 50 वर्षों में भारत में धार्मिक स्थलों पर हुई मूर्तियोंप्राचीन धरोहरों और दान राशि की चोरी की उन 30 बड़ीघटनाओं की सूची नीचे दी गई हैजिन्होंने देश में सबसे बड़ी सार्वजनिक बहसराजनीतिक विवाद या अदालती हस्तक्षेप को जन्म दिया:


अंतर्राष्ट्रीय प्राचीन वस्तुएं और विरासत तस्करी घोटाले

इन मामलों ने भारत में सांस्कृतिक सुरक्षा के दृष्टिकोण को पूरी तरह से बदल दिया और चोरी हुई विरासत को वापस लाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय राजनयिक वार्ताओं को जन्म दिया।


 1. श्रीपुरंतन नटराज मामला (तमिलनाडुचोरी: 2006): श्रीपुरंतन के बृहदीश्वरर मंदिर से चोल काल की एकअद्भुत कांस्य नटराज मूर्ति चोरी हो गई थी। इसे सुभाष कपूर नेटवर्क द्वारा तस्करी कर निकाला गया औरऑस्ट्रेलिया के नेशनल गैलरी को $5 मिलियन (लगभग 40 करोड़ रुपयेमें बेचा गया। इस पर हुए बड़े विवाद केबाद 2014 में इसे भारत वापस लाया गया।


 2. सुथामल्ली वरदराज पेरुमल लूट (तमिलनाडुचोरी: 2008): एक संगठित गिरोह ने सुथामल्ली गांव के एकबंद पड़े मंदिर से 18 प्राचीन कांस्य मूर्तियां गायब कर दीं। इस घटना ने ग्रामीण मंदिरों की सुरक्षा में भारी चूक कोलेकर देशव्यापी आक्रोश पैदा किया था।


 3. कपालेश्वर मयूर मूर्ति का बदला जाना (चेन्नईविवाद: 2018):

मायलापुर मंदिर में कुंभाभिषेकम् (consecration) के दौरानगर्भगृह की एक ऐतिहासिक मोर की मूर्ति (जिसकेमुंह में फूल थाको कथित तौर पर चुराकर सांप वाली नकली मूर्ति से बदल दिया गया। इस खुलासे के बाद मद्रासउच्च न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा और वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू हुई।


 4. श्रीरंगम रंगनाथस्वामी मंदिर नवीनीकरण विवाद (त्रिची, 2018):

विरासत कार्यकर्ताओं ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की कि मंदिर के जीर्णोद्धार के दौरान प्राचीन विदेशीलकड़ी के दरवाजेऐतिहासिक ग्रेनाइट के फर्श और कई अमूल्य संरचनात्मक खजाने चुपके से बदल दिए गए हैंजिसके बाद राज्य में बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।


 5. गढ़वा किला बुद्ध मूर्ति डकैती (प्रयागराज, 2002): 

एएसआई (ASI) संरक्षित इस स्मारक पर एक सशस्त्र गिरोह ने धावा बोलाचौकीदार की हत्या की और भगवानबुद्ध की एक बेशकीमती प्राचीन पत्थर की मूर्ति चुरा ली। इस मामले के अंतिम फरार आरोपी को जुलाई 2026 मेंसीबीआई ने गिरफ्तार कियाजिससे यह पुरानी सुरक्षा चूक फिर से सुर्खियों में  गई।


 6. दक्ष प्रजापति मंदिर चोरी (ओडिशा, 2020):

बाणपुर में इस 13वीं शताब्दी के एएसआई-संरक्षित मंदिर के भारी तालों को तोड़कर चोर 22 दुर्लभ *अष्टधातुमूर्तियां ले उड़े। इस घटना ने ओडिशा की प्राचीन विरासतों के डिजिटल दस्तावेजीकरण और सुरक्षा की कमी परतीखी बहस छेड़ दी।


 7. सीवन कूडल की चोल कांस्य गणेश मूर्ति (तमिलनाडुचोरी: 1990 के दशक):

एक 1000 साल पुरानी चोल गणेश मूर्ति चोरी होकर अमेरिका के बॉल स्टेट यूनिवर्सिटी म्यूजियम में पहुंच गई थी।इसकी लंबी रिकवरी प्रक्रिया ने प्राचीन वस्तुओं के मालिकाना हक की कानूनी परिभाषा पर बहस तेज की।


 8. कांगड़ा किला जैन तीर्थंकर मूर्ति चोरी (हिमाचल प्रदेश):

किले के खंडहरों से एक मध्यकालीन जैन पत्थर की मूर्ति गायब हो गई। इस जांच ने पहाड़ी और सुदूर विरासतस्थलों की सुरक्षा में लगी कमियों को उजागर कियाजहां कोई घेराबंदी या सुरक्षा गार्ड नहीं थे।


हाई-प्रोफाइल वित्तीयसंपत्ति और अवशेष चोरियां

इन घटनाओं ने धार्मिक स्थलों की अत्यधिक प्रसिद्धि और जनता के पैसे या अपरिवर्तनीय ऐतिहासिक अवशेषों केशामिल होने के कारण राष्ट्रव्यापी बहस पैदा की।


 9. राम मंदिर दान राशि गबन विवाद (अयोध्या, 2026):

जून 2026 में एक बड़ा विवाद तब खड़ा हुआ जब एक विशेष जांच दल (SIT) ने दान गणना कक्षों के अंदर करोड़ोंरुपये के नकद गबन का पर्दाफाश किया। इस घोटाले के बाद मंदिर ट्रस्ट के एक शीर्ष अधिकारी को इस्तीफादेना पड़ा और मंदिर प्रशासन की पारदर्शिता पर राष्ट्रीय बहस छिड़ गई।


 10. बद्रीनाथ मंदिर विशेष ऑडिट (उत्तराखंड, 2026):

अयोध्या के घटनाक्रम के बादमध्य-2026 में उत्तराखंड राज्य अधिकारियों द्वारा कराए गए एक विशेष ऑडिट मेंबद्रीनाथ मंदिर में समकालीन नकद लॉगिंग और बहुमूल्य धातुओं के दान में गंभीर विसंगतियां सामने आईंजिससेबड़े मंदिरों के राजस्व के प्रबंधन पर सवाल खड़े हुए।


 11. जगन्नाथ मंदिर रत्न भंडार की लापता चाबियां (पुरीविवाद: 2018):

पुरी के प्रसिद्ध मंदिर के 'रत्न भंडार' (जहां टन सोना और हीरे रखे हैंके आंतरिक कक्ष की चाबियां गायब होने कीखबर ने ओडिशा की राजनीति में भूचाल ला दिया थाजिसके बाद एक उच्च स्तरीय न्यायिक आयोग का गठनकरना पड़ा।


 12. तिरुमाला तिरुपति स्वर्ण परिवहन विवाद (आंध्र प्रदेश, 2019):

चुनाव अधिकारियों द्वारा बिना उचित सुरक्षा प्रोटोकॉल के एक बैंक के माध्यम से ले जाए जा रहे तिरुपति मंदिर के1,300 किलोग्राम से अधिक सोने को जब्त किए जाने के बाद मंदिर की संपत्ति के प्रबंधन को लेकर एक बड़ीसार्वजनिक बहस छिड़ गई थी।


 13. पद्मनाभस्वामी मंदिर 'तिजोरी बीसुरक्षा विवाद (केरल, 2011-वर्तमान):

मंदिर के भूमिगत तहखानों में अरबों के खजाने की खोज के बाद, "तिजोरी बी" (Vault B) को खोलने को लेकरकानूनी और धार्मिक युद्ध छिड़ गया। गुप्त रास्तों से ऐतिहासिक रूप से चोरी होने के आरोपों के बाद सुप्रीम कोर्टको इस पर सख्त निगरानी रखनी पड़ी।


 14. हजरतबल पवित्र अवशेष चोरी (श्रीनगर, 1963 - विरासत बहस):

यद्यपि यह घटना 50 वर्ष की सीमा से थोड़ी बाहर (पुरानीहैलेकिन इसके व्यापक भू-राजनीतिक प्रभाव केकारण यह आज भी प्रासंगिक है। श्रीनगर के हजरतबल दरगाह से पैगंबर मोहम्मद के पवित्र बाल(मोई--मुकद्दसकी चोरी ने पूरे जम्मू-कश्मीर में अशांति फैला दी थीजिसके बाद रहस्यमयी तरीके से इसेबहाल किया गया।


 15. महाबोधि मंदिर बोधि वृक्ष शाखा विवाद (बोधगया, 2002):

यह आरोप कि पवित्र बोधि वृक्ष (जहां भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त किया थाकी एक महत्वपूर्ण शाखा को चुपके सेकाटकर अंतर्राष्ट्रीय खरीदारों को बेच दिया गया थाने वैश्विक बौद्ध समुदाय में भारी आक्रोश पैदा किया औरसीबीआर्इ जांच तक बात पहुंची।


 16. सबरीमाला लापता योगदंड मामला (केरल, 2000 का दशक):

मंदिर के अनुष्ठानों में उपयोग की जाने वाली एक प्राचीनऐतिहासिक रूप से पवित्र औपचारिक छड़ी (*योगदंड*) के गायब होने से स्थानीय समुदाय में भारी आक्रोश फैल गया और आंतरिक मंदिर सुरक्षा पर लंबी पुलिस जांचचली।


सामाजिक और सांप्रदायिक बहस को जन्म देने वाली घटनाएं

ये चोरियां केवल संपत्ति के अपराध तक सीमित नहीं रहींबल्कि इनसे सामाजिक ध्रुवीकरणसार्वजनिक अशांतिया व्यापक विधायी बदलाव हुए।


 17. बुर्ज जवाहर सिंह वाला पवित्र ग्रंथ चोरी (फरीदकोट, 2015):

एक गांव के गुरुद्वारे से *गुरु ग्रंथ साहिबके पावन स्वरूप की चोरी तेजी से उग्र रूप ले गईजिसे 'बरगाड़ी बेअदबीमामलाकहा गया। इसके कारण पूरे पंजाब में हिंसक प्रदर्शन हुएजिसने एक दशक तक राज्य की राजनीति कीदिशा बदल दी।


 18. हुब्बल्ली-धारवाड़ दिगंबर जैन मंदिर सिलसिलेवार चोरी (कर्नाटक, 2026):

एक शातिर अंतर-राज्यीय गिरोह ने एक ही सप्ताह में चार अलग-अलग जैन मंदिरों को निशाना बनाया औरडिजिटल नेटवर्क को बंद करके प्राचीन चांदी की मूर्तियां चुरा लीं। इसके बाद अल्पसंख्यक समुदायों ने धार्मिकस्थलों की सुरक्षा के लिए विशेष पुलिस विंग की मांग उठाई।


 19. इंदौर अष्टधातु जैन मूर्ति चोरी (मध्य प्रदेश, 2026):

चोरों ने एक प्रमुख शहरी जैन मंदिर से लगभग 15 किलोग्राम वजनी ऐतिहासिक *अष्टधातुकी धार्मिक थालियांऔर मूर्तियां चुरा लीं। इस घटना के बाद स्थानीय जैन समुदाय ने अपनी पवित्र मूर्तियों की असुरक्षा को लेकर बड़ेपैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया।


 20. गोवा के ऐतिहासिक चर्चों में घंटियों और चांदी की चोरी (गोवा, 2010 का दशक):

पुर्तगाली काल के सदियों पुराने चर्चों को निशाना बनाकर की गई चोरियों के एक सिलसिले में बड़े-बड़े प्राचीन चर्चबेल (घंटेऔर चांदी के पवित्र प्याले गायब कर दिए गएजिसने तटीय ईसाइयों की विरासत की सुरक्षा पर बहसछेड़ दी।


 21. ट्रुलक चर्च तोड़फोड़ और चोरी (नई दिल्ली, 2015):

पश्चिमी दिल्ली के एक चर्च में ताला तोड़कर की गई चोरी और तोड़फोड़ एक संवेदनशील राजनीतिक माहौल केदौरान हुई थी। इसने अल्पसंख्यक पूजा स्थलों की सुरक्षा पर तीखी राष्ट्रीय बहस पैदा कीहालांकि बाद में जांच मेंयह एक सामान्य स्थानीय चोरों का काम निकला।


 22. कल्याणी हनुमान मंदिर लूट और तोड़फोड़ (पश्चिम बंगाल, 2023):

एक मध्यरात्रि की डकैती में जहां मंदिर के नकद भंडार को लूट लिया गया और मुख्य देवता के ढांचे को नुकसानपहुंचाया गयाजिसके बाद राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर राजनीतिक और सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनहुए।


 23. चारमीनार भाग्यलक्ष्मी मंदिर आभूषण चोरी (हैदराबाद):

ऐतिहासिक चारमीनार स्मारक से सटे अत्यधिक संवेदनशील भाग्यलक्ष्मी मंदिर से चांदी के आभूषणों की चोरी कीघटना के बाद तुरंत सुरक्षा लॉकडाउन लगा दिया गया और सांप्रदायिक तनाव बढ़ने लगालेकिन पुलिस द्वारात्वरित रिकवरी से स्थिति को संभाल लिया गया।


 24. अजमेर शरीफ दरगाह दान पेटी विवाद (राजस्थान):

विश्व प्रसिद्ध सूफी दरगाह पर 'खादिमोंके सार्वजनिक दान कंटेनरों से होने वाली कथित चोरियों और उनकेवितरण को लेकर आंतरिक प्रतिद्वंद्विता ने दरगाह प्रबंधन के नियमों पर अदालती हस्तक्षेप को अनिवार्य बनाया।


घरेलू और क्षेत्रीय संरचनात्मक चोरियां

इन मामलों में गंभीर स्थानीय प्रभाव देखा गयाया चोरों ने वास्तुकला से जुड़ी धातुओं और प्राचीन मूर्तियों कोनिशाना बनाया।


 25. कोनेरिराजपुरम उमा महेश्वरार सुरक्षा संकट (नागापट्टिनम):

उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका से खुलासा हुआ कि करोड़ों रुपये की अमूल्य *पंचलोहामूर्तियां एकजर्जर कमरे में साधारण से सस्ते ताले के भरोसे रखी गई थींजिससे विरासत संरक्षण के प्रति सरकारी उदासीनतापर भारी बहस हुई।


 26. सेंथलाई मीनाक्षी सुंदरेश्वरार सुरक्षा चूक (तंजावुर):

कार्यकर्ताओं ने पाया कि लगभग 30 अत्यंत मूल्यवान प्राचीन *पंचलोहामूर्तियां बिना किसी सुरक्षा गार्ड केअसुरक्षित रखी हुई थींजिसके बाद दूरदराज के गांवों की मूर्तियों को सुरक्षित केंद्रीय तिजोरियों (Icon Vaults) में स्थानांतरित करने के सुधार लागू किए गए।


 27. अलवर जैन मंदिर चांदी का छत्र चोरी (राजस्थान, 2021):

मुख्य तीर्थंकर मूर्ति के ऊपर लटके कई किलोग्राम वजनी चांदी के नक्काशीदार छत्र को एक पेशेवर गिरोह ने रातभर में साफ काट दियाजिसने अर्ध-ग्रामीण अल्पसंख्यक तीर्थस्थलों की संवेदनशीलता को उजागर किया।


 28. उत्तर प्रदेश मजार पीतल गुंबद चोरी (पश्चिमी यूपी):

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ऐतिहासिक सूफी मजारों पर चोरियों का एक अजीब सिलसिला देखा गयाजहां चोरों नेगुंबदों पर चढ़कर भारी तांबे और पीतल की क्लैडिंग (परतको उखाड़ लियाजिससे स्थानीय कानून व्यवस्था परसवाल उठे।


 29. भद्रक मंदिर रिकवरी विफलता (ओडिशा):

एक विधायी बहस तब छिड़ गई जब INTACH की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि एक दशक में भद्रक क्षेत्र में प्राचीनमूर्तियों की चोरी के 20 मामले दर्ज किए गए थेलेकिन स्थानीय पुलिस की रिकवरी दर 0% रही।


 30. प्राची घाटी प्राचीन मूर्तियों का गायब होना (ओडिशा):

विरासत सर्वेक्षकों ने आधिकारिक तौर पर दस्तावेज जारी किए कि प्राची घाटी के गैर-दस्तावेजी(undocumented) मंदिरों से 300 से अधिक ऐतिहासिक मूर्तियां चुपचाप गायब हो चुकी हैंजिसने देश में एकएकीकृत 'राष्ट्रीय विरासत संरक्षण नीति' (National Heritage Protection Policy) की तत्काल आवश्यकतापर बहस शुरू कर दी।


अंतर्निहित संकट:

टेंपल रेडर्स जैसे दस्तावेजी शोधों और रिपोर्टों के अनुसारभारत हर साल घरेलू और अंतरराष्ट्रीय अवैध कालेबाजारों में अनुमानित 1,200 प्राचीन मूर्तियां और कलाकृतियां खो देता है। 


एंटीक्विटीज एंड आर्ट ट्रेजर्स एक्ट 1972 जैसे पुराने कानूनों का कमजोर प्रवर्तन आज भी इतिहासकारों और नीतिनिर्माताओं के बीच बहस का एक मुख्य बिंदु बना हुआ है।


I am talking of a highly publicized controversy from South India, most notably the Tirupati Temple Jewellery Scandal that came to light in 2010.


The Tirupati Temple Controversy (2010)

The Lord Venkateswara Temple at Tirumala (administered by the Tirumala Tirupati Devasthanams - TTD) is one of the wealthiest shrines in the world, holding historical jewelry worth thousands of crores donated by devotees and 16th-century rulers like King Krishnadevaraya.


How the Fraud Happened

An internal audit and a subsequent vigilance report exposed severe discrepancies in the Bokkasam (the temple treasury):


 The "Wear and Tear" Excuse:

Corrupt treasury staff and officials were covering up the disappearance of gold, diamonds, and precious stones by writing them off as routine "wear and tear" or damage over time during daily rituals.


 Replacing with Fakes: 

Investigation leaks revealed that authentic, antique gold ornaments and diamond-studded crowns donated by bhakts  (devotees) were systematically being pilfered and substituted with look-alike imitation jewelry or lower-grade gold.


 The Gold Coin Swindle: At the temple's gold dollar sales counter, thousands of gold coins were found to have been sold off the record by staff who pocketed the cash without issuing receipts to pilgrims, while the internal oversight teams hushed it up for months.


The scandal turned tragic when a TTD accounts department employee named B. Suresh, who was acting as a whistleblower, died under mysterious circumstances, sparking massive public outrage and political protests across Andhra Pradesh.


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